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Rohtak News: भालौठ सब ब्रांच नहर को पक्का करने का विरोध
Sun, 17 May 2026 08:24 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Sun, 17 May 2026 08:24 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। भालौठ सब ब्रांच नहर को कंक्रीट से पक्का करने के विरुद्ध 6 गांवों के किसानों व ग्रामीणों ने रविवार को नहरों पर धरना दिया। साथ ही विभाग व सरकार की इस नीति का विरोध किया।
उनका कहना है कि इससे न तो पीने का पानी और न ही सिंचाई के लिए पानी बचेगा। कान्ही-रिठाल रोड स्थित नहर पर रिठाल, धमाड, किलोई, मोई हुड्डा, कान्ही व घिलोड़ के किसानों व ग्रामीणों ने धरना प्रदर्शन किया।
धामड़ के ग्रामीण रणधीर ने बताया कि काफी समय पहले जेएलएन नहर को पक्का कर दिया था। अब सरकार भालौठ सब ब्रांच नहर को कंक्रीट डाल कर पक्का कर रही है। पुलों के पास कहीं घाट नहीं छोड़े जा रहे हैं। इससे इन गांवों के लिए पीने के पानी का संकट पैदा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि भूमिगत पानी न बचने से सिंचाई का पानी भी उपलब्ध नहीं हो पाएगा। पीने का पानी बाहर से खरीदने तक मजबूर हो जाएंगे।
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किसान उमेद रिठान ने बताया कि सरकार की यह नीति एकतरफा है। पहले जेएलएन नहर को पक्का करने का अनुभव काफी खराब रहा है। वहां पानी के नलके भी नहीं बचे हैं। उमेद ने कहा कि आज भी इन गांवों के लोग नहर से ही पीने के पानी का इस्तेमाल करते है।
जयप्रकाश किलोई कहा कि ग्रामीण सिंचाई विभाग व सरकार से इस नीति को बदलने, पुलों के पास घाट छोड़ने व लोगों के जायज सवालों के समाधान की मांग करते हैं। ऐसा न होने पर आंदोलन को तेज किया जाएगा।
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रोहतक। भालौठ सब ब्रांच नहर को कंक्रीट से पक्का करने के विरुद्ध 6 गांवों के किसानों व ग्रामीणों ने रविवार को नहरों पर धरना दिया। साथ ही विभाग व सरकार की इस नीति का विरोध किया।
उनका कहना है कि इससे न तो पीने का पानी और न ही सिंचाई के लिए पानी बचेगा। कान्ही-रिठाल रोड स्थित नहर पर रिठाल, धमाड, किलोई, मोई हुड्डा, कान्ही व घिलोड़ के किसानों व ग्रामीणों ने धरना प्रदर्शन किया।
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धामड़ के ग्रामीण रणधीर ने बताया कि काफी समय पहले जेएलएन नहर को पक्का कर दिया था। अब सरकार भालौठ सब ब्रांच नहर को कंक्रीट डाल कर पक्का कर रही है। पुलों के पास कहीं घाट नहीं छोड़े जा रहे हैं। इससे इन गांवों के लिए पीने के पानी का संकट पैदा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि भूमिगत पानी न बचने से सिंचाई का पानी भी उपलब्ध नहीं हो पाएगा। पीने का पानी बाहर से खरीदने तक मजबूर हो जाएंगे।
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किसान उमेद रिठान ने बताया कि सरकार की यह नीति एकतरफा है। पहले जेएलएन नहर को पक्का करने का अनुभव काफी खराब रहा है। वहां पानी के नलके भी नहीं बचे हैं। उमेद ने कहा कि आज भी इन गांवों के लोग नहर से ही पीने के पानी का इस्तेमाल करते है।
जयप्रकाश किलोई कहा कि ग्रामीण सिंचाई विभाग व सरकार से इस नीति को बदलने, पुलों के पास घाट छोड़ने व लोगों के जायज सवालों के समाधान की मांग करते हैं। ऐसा न होने पर आंदोलन को तेज किया जाएगा।