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ओमिक्रॉन वैरिएंट : विदेशी नंबर व स्थानीय पता सही न होना बना परेशानी

Mon, 06 Dec 2021 12:39 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 06 Dec 2021 12:39 AM IST
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Omicron variant: Incorrect foreign number and local address became a problem
संजय कुमार
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रोहतक। कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट के संक्रमण फैलने से रोकने में दूसरे देश के बंद मोबाइल नंबर आड़े आ रहे हैं। जिले में विदेश यात्रा से रोजाना लोग लौट रहे हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग के लिए उन व्यक्तियों की जांच करने में समस्या आ रही है, जिनके रिकॉर्ड में दूसरे देश का मोबाइल नंबर लिखे हैं और वह देश में बंद हैं। यही नहीं कुछ के पासपोर्ट में दिया गया स्थानीय पता भी सही नहीं है। ऐसे में विभाग इन लोगों से कैसे संपर्क करे, यह चिंता का विषय बना हुआ है।
जारी गाइडलाइन के अनुसार अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विदेश से आने वाले प्रत्येक यात्री की जांच होती है और उससे शपथ पत्र भरवाया जाता है कि वह होम क्वारंटीन नियम का पालन करेगा। हर यात्री का ब्योरा उसके राज्य के मुख्यालय को भी भेजी जाती है, ताकि वहां से संबंधित जिला प्रशासन के पास जानकारी भेजी जा सके। इसमें दो से तीन दिन का समय लग जाता है। इस दौरान यात्री आराम से शहर व अपने परिचितों के पास घूमता है। स्वास्थ्य विभाग की टीम आन रिकॉर्ड के अनुसार ही उस यात्री की जांच व सैंपल के लिए उसकी तलाश करती रहती है। ऐसे में अंदेशा बना रहता है कि यदि यात्री कोरोना से संक्रमित हुआ तो वह कई लोगों को संक्रमित कर सकता है। जबकि नियमानुसार विदेश से आने वाले व्यक्ति को एक सप्ताह तक निगेटिव रिपोर्ट आने के बाद भी होम क्वारंटीन रहना अनिवार्य होता है। क्योंकि यदि संक्रमण होता है तो इस अवधि में पता चल जाता है।
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आठ से 20 सैंपल तक की होती है जांच
स्वास्थ्य विभाग विदेश से आए 8-20 लोगों की रोजाना जांच कर रहा है । कभी कभार एक दिन में एक भी व्यक्ति का विदेश से आने का रिकॉर्ड नहीं आता।
जांच का क्या है महत्व
एक्सपर्ट बताते हैं कि व्यक्ति की विदेश में ही जांच कर विमान में बैठने की अनुमति दी जाती है। उस समय व्यक्ति की जांच रिपोर्ट निगेटिव होती है, लेकिन अंदेशा रहता है कि व्यक्ति संक्रमित हो सकता है। ऐसे में उसमें संक्रमण के लक्षण एक सप्ताह बाद आते हैं। इसलिए देश में आने पर व्यक्ति की एयरपोर्ट पर जांच होती है और फिर उसके गृह जिले में। गृह जिले में आने के एक सप्ताह बाद भी आरटीपीसीआर जांच होती है, इसमें निगेटिव आने के बाद ही उसे सही समझा जाता है।
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जो एक सप्ताह के लिए आया, वह कैसे रहे क्वारंटीन
समस्या आ रही है कि जो व्यक्ति विदेश से किसी समारोह में शिरकत करने महज एक सप्ताह के लिए आया है, वह इस दौरान कैसे होम क्वारंटीन रहे।
पहले लगते थे पोस्टर, बनता था कंटेनमेंट जोन
स्वास्थ्य विभाग की मुसीबत है कि पहले आशंकित व्यक्ति को होम क्वारंटीन कर उसके घर के बाहर पोस्टर लगा दिया जाता था और उसके एरिया को कंटेनमेंट जोन बना दिया जाता था। इससे सभी आसपास में अलर्ट हो जाते थे और संबंधित व्यक्ति पर नजर भी रखी जाती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है और व्यक्ति आराम से कहीं भी आ-जा सकता है। हालांकि नियमानुसार ऐसे नियम तोड़ने वालों पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान भी है।

वर्जन
जिले में विदेश से आ रहे लोगों की लगातार सैंपलिंग की जा रही है। उन्हें एक सप्ताह घर पर क्वारंटीन रहने को कहा गया है। वह एयरपोर्ट पर शपथ पत्र भरकर भी आते हैं कि वह होम क्वारंटीन पीरियड की गाइडलाइन का पालन करेंगे। यदि कोई नियम तोड़ता है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. तरुण मधुर, पब्लिक हेल्थ मैनेजर, स्वास्थ्य विभाग
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