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Rohtak News: ट्रॉमा सेंटर आने वाले घायलों को अब डेढ़ लाख तक का मुफ्त इलाज
Sat, 12 Jul 2025 01:10 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Sat, 12 Jul 2025 01:10 AM IST
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पीजीआई में आयुष्मान मित्र कक्ष का उद्घाटन करते निदेशक डाॅ.एस.के. सिंघल व अन्य। स्रोत: पीजीआई
रोहतक। पंडित भगवत दयाल शर्मा स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान चिकित्सा संस्थान के धनवंतरी एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में आने वाले मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। शुक्रवार को पीजीआई के निदेशक डाॅ. एसके सिंघल ने ट्रॉमा सेंटर में आयुष्मान मित्र कक्ष का रिबन काटकर उद्घाटन किया। निदेशक ने बताया कि हरियाणा में सड़क हादसे में घायल होकर 24 घंटे में ट्रॉमा सेंटर आने वाले लोगों को अब डेढ़ लाख तक का मुफ्त इलाज मिलेगा।
पहले मरीजों को अपना डाटा अपलोड कराने के लिए इधर-उधर जाना पड़ता था। इससे कई बार उन्हें परेशानी होती थी। आयुष्मान मित्र कक्ष के स्थापित होने से मरीजों को राहत मिलेगी। वे आसानी से एक जगह से अपना डाटा अपलोड करा सकेंगे।
इस व्यवस्था के तहत सड़क दुर्घटना का मरीज ट्रॉमा सेंटर में पहुंचता है तो जीडीएमओ उसकी ई पोर्टल पर जानकारी भरेगा और आम मरीज की तरह वह भर्ती हो जाएगा। इसके पश्चात ट्रांजेक्शन मैनेजमेंट सिस्टम पोर्टल पर इस कक्ष से मरीज की एक आईडी बनाई जाएगी। आईडी बनने के बाद वह फाइल पर लिखी जाएगी।
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ट्रामा सेंटर के इंचार्ज डॉ. राजेश रोहिल्ला ने बताया कि सड़क हादसे में घायल व्यक्ति का डेटा सॉफ्टवेयर में अपलोड कर अस्पताल संबंधित पुलिस थाने को भेजेगा। पुलिस को छह घंटे में पुष्टि करनी होगी कि व्यक्ति सड़क हादसे में घायल है या नहीं।
पुष्टि होने के बाद घायल व्यक्ति को कैशलेस इलाज की सुविधा दी जाएगी। इसके लिए फार्मासिस्ट विशेष रूप से नियुक्त किया गया है। योजना के तहत डेढ़ लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज या 7 दिन तक अस्पताल में चलने वाले इलाज का खर्च संस्थान अपनी तरफ से करेगा।
योजना लागू करने में सेंटर के इंचार्ज डॉ. राजेश रोहिल्ला की अहम भूमिका बताई जा रही है। इस योजना का नोडल अफसर ट्रॉमा सेंटर के डीएमएस डॉ. पंकज छिक्कारा को बनाया गया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के आदेश पर यह पहल संस्थान में शुरू की गई है।
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पहले मरीजों को अपना डाटा अपलोड कराने के लिए इधर-उधर जाना पड़ता था। इससे कई बार उन्हें परेशानी होती थी। आयुष्मान मित्र कक्ष के स्थापित होने से मरीजों को राहत मिलेगी। वे आसानी से एक जगह से अपना डाटा अपलोड करा सकेंगे।
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इस व्यवस्था के तहत सड़क दुर्घटना का मरीज ट्रॉमा सेंटर में पहुंचता है तो जीडीएमओ उसकी ई पोर्टल पर जानकारी भरेगा और आम मरीज की तरह वह भर्ती हो जाएगा। इसके पश्चात ट्रांजेक्शन मैनेजमेंट सिस्टम पोर्टल पर इस कक्ष से मरीज की एक आईडी बनाई जाएगी। आईडी बनने के बाद वह फाइल पर लिखी जाएगी।
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ट्रामा सेंटर के इंचार्ज डॉ. राजेश रोहिल्ला ने बताया कि सड़क हादसे में घायल व्यक्ति का डेटा सॉफ्टवेयर में अपलोड कर अस्पताल संबंधित पुलिस थाने को भेजेगा। पुलिस को छह घंटे में पुष्टि करनी होगी कि व्यक्ति सड़क हादसे में घायल है या नहीं।
पुष्टि होने के बाद घायल व्यक्ति को कैशलेस इलाज की सुविधा दी जाएगी। इसके लिए फार्मासिस्ट विशेष रूप से नियुक्त किया गया है। योजना के तहत डेढ़ लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज या 7 दिन तक अस्पताल में चलने वाले इलाज का खर्च संस्थान अपनी तरफ से करेगा।
योजना लागू करने में सेंटर के इंचार्ज डॉ. राजेश रोहिल्ला की अहम भूमिका बताई जा रही है। इस योजना का नोडल अफसर ट्रॉमा सेंटर के डीएमएस डॉ. पंकज छिक्कारा को बनाया गया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के आदेश पर यह पहल संस्थान में शुरू की गई है।