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अब ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए 3500 रुपये अतिरिक्त करने पड़ेंगे खर्च
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अब नया ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) बनवाने के लिए 3500 रुपये अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा। साथ ही 21 दिन का प्रशिक्षण प्रमाणपत्र देना भी अनिवार्य कर दिया गया है। वहीं, मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर (एमवीआई) के समक्ष टेस्ट भी पास करना होगा। नए नियम के लागू होने के चलते सोमवार को एसडीएम कार्यालय में कोई नया लाइसेंस बनवाने के लिए आवेदन नहीं किया गया।
मोटर व्हीकल एक्ट 1988 के तहत बना सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स 1989 के नियमों को 2021 में पूर्णतया लागू किया जा रहा है। इनमें सबसे अहम रूल मान्यता प्राप्त ड्राइविंग स्कूल का प्रमाणपत्र लोगों की जेब हल्की करेगा। आवेदक को लाइसेंस बनवाने के लिए प्रमाणपत्र अनिवार्य रूप से देना होगा। डीएल बनवाने वालों को अब प्रशिक्षण प्रमाणपत्र के लिए 21 दिन का समय निकालने के साथ 3500 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पडे़ंगे। अब तक ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए प्रशिक्षण प्रमाणपत्र की अनिवार्यता नहीं थी।
ऐसे महंगा पडे़गा लाइसेंस और लगेंगे अधिक दिन
युवाओं को लर्निंग लाइसेंस बनवाने के लिए पहले आईडीटीआर में 150 रुपये फीस जमा करनी होगी। इसके बाद यहां दो से तीन घंटे प्रशिक्षण अभ्यर्थी को लेना अनिवार्य होगा। इसके अगले दिन लर्निंग लाइसेंस के लिए आवेदन करना होगा। इसमें एलएमवी के लिए 650 व ट्रैक्टर के लिए 950 रुपये देने होंगे। इसके बाद एसडीएम कार्यालय में समय लेना होगा और ऑनलाइन टेस्ट देना होगा। यहां 10 में से छह अंक लेने अनिवार्य होंगे। यहां टेस्ट पास करने के बाद लर्निंग का लाइसेंस बनेगा, जो एक माह के लिए वैध होगा। इसके बाद पक्के लाइसेंस के लिए एलएमवी के लिए 1280 रुपये व ट्रैक्टर के लिए 1580 फीस जमा करनी होगी। इसके साथ रेडक्रॉस में 300 रुपये जमा कराने होंगे। इसमें फिर सड़क के संकेतकों को बताया जाएगा। इसके बाद मान्यता प्राप्त ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल से 21 दिन वाहन चलाना सीखने का प्रमाणपत्र देना होगा। इसके बाद एमवीआई टेस्ट लेंगे और पास होने पर लाइसेंस दिया जाएगा।
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आरटीओ से मिलेगी ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूलों को मान्यता
लाइसेंस बनवाने के दौरान वही प्रशिक्षण प्रमाणपत्र मान्य होगा, जो आरटीओ से मान्यता प्राप्त ड्राइविंग ट्रेेनिंग स्कूल देंगे। इसके लिए एसडीएम कार्यालय में 11 प्रशिक्षण केंद्रों की सूची चस्पा की गई है। नियम के अनुसार सभी आवेदकों को 21 दिन का प्रशिक्षण लेना अनिवार्य होगा।
देश भर में लागू होगा नियम
मोटर व्हीकल एक्ट 1988 में बना। इसके बाद सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स 1989 में बनाए गए। यह तत्कालीन समय से ही अनिवार्य किया गया था। इसमें से एक प्रशिक्षण प्रमाणपत्र की अनिवार्यता को अब लागू किया गया है। यह देश भर में लागू होगा। अब इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। नियम के तहत लाइसेंस ऑफ ड्राइवर व्हीकल रूल 3 से 27 के बीच में इन सभी का जिक्र है।
- डॉ. दीपक भारद्वाज, एडवोकेट पूर्व सचिव बार एसोसिएशन रोहतक
नियम बनाना और फीस महंगा करना सही नहीं
महज नियम बनाना और फीस महंगा करना सही नहीं है। सरकार व प्रशासन को देखना चाहिए कि वह टेस्ट कहां लेते हैं। इन जगहों पर कोई सुविधा व सुरक्षा नहीं है। 21 दिन का प्रशिक्षण हर किसी के लिए सही नहीं है। खासकर उनके लिए, जिनको वाहन चलाना आता हो। दो पहिया वाहन चालकों के लिए तो कहीं भी प्रशिक्षण केंद्र ही नहीं हैं। दो माह पहले परिचित ने डीएल के लिए आवेदन किया था। बीच में कोरोना के चलते आवेदन नहीं हो पाया। सोमवार को आवेदन फाइल ही नहीं ली गई।
- कुनाल गर्ग
नियम लागू करना हमारी जिम्मेदारी
नया नियम सरकार की ओर से आया है। इसे लागू करना हमारी जिम्मेदारी है। ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने संबंधी नियम नए लाइसेंस पर लागू होंगे। किसी को कोई समस्या आती है तो वह कार्यालय में संपर्क कर सकता है।
-राकेश कुमार, एसडीएम
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मोटर व्हीकल एक्ट 1988 के तहत बना सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स 1989 के नियमों को 2021 में पूर्णतया लागू किया जा रहा है। इनमें सबसे अहम रूल मान्यता प्राप्त ड्राइविंग स्कूल का प्रमाणपत्र लोगों की जेब हल्की करेगा। आवेदक को लाइसेंस बनवाने के लिए प्रमाणपत्र अनिवार्य रूप से देना होगा। डीएल बनवाने वालों को अब प्रशिक्षण प्रमाणपत्र के लिए 21 दिन का समय निकालने के साथ 3500 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पडे़ंगे। अब तक ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए प्रशिक्षण प्रमाणपत्र की अनिवार्यता नहीं थी।
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ऐसे महंगा पडे़गा लाइसेंस और लगेंगे अधिक दिन
युवाओं को लर्निंग लाइसेंस बनवाने के लिए पहले आईडीटीआर में 150 रुपये फीस जमा करनी होगी। इसके बाद यहां दो से तीन घंटे प्रशिक्षण अभ्यर्थी को लेना अनिवार्य होगा। इसके अगले दिन लर्निंग लाइसेंस के लिए आवेदन करना होगा। इसमें एलएमवी के लिए 650 व ट्रैक्टर के लिए 950 रुपये देने होंगे। इसके बाद एसडीएम कार्यालय में समय लेना होगा और ऑनलाइन टेस्ट देना होगा। यहां 10 में से छह अंक लेने अनिवार्य होंगे। यहां टेस्ट पास करने के बाद लर्निंग का लाइसेंस बनेगा, जो एक माह के लिए वैध होगा। इसके बाद पक्के लाइसेंस के लिए एलएमवी के लिए 1280 रुपये व ट्रैक्टर के लिए 1580 फीस जमा करनी होगी। इसके साथ रेडक्रॉस में 300 रुपये जमा कराने होंगे। इसमें फिर सड़क के संकेतकों को बताया जाएगा। इसके बाद मान्यता प्राप्त ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल से 21 दिन वाहन चलाना सीखने का प्रमाणपत्र देना होगा। इसके बाद एमवीआई टेस्ट लेंगे और पास होने पर लाइसेंस दिया जाएगा।
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आरटीओ से मिलेगी ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूलों को मान्यता
लाइसेंस बनवाने के दौरान वही प्रशिक्षण प्रमाणपत्र मान्य होगा, जो आरटीओ से मान्यता प्राप्त ड्राइविंग ट्रेेनिंग स्कूल देंगे। इसके लिए एसडीएम कार्यालय में 11 प्रशिक्षण केंद्रों की सूची चस्पा की गई है। नियम के अनुसार सभी आवेदकों को 21 दिन का प्रशिक्षण लेना अनिवार्य होगा।
देश भर में लागू होगा नियम
मोटर व्हीकल एक्ट 1988 में बना। इसके बाद सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स 1989 में बनाए गए। यह तत्कालीन समय से ही अनिवार्य किया गया था। इसमें से एक प्रशिक्षण प्रमाणपत्र की अनिवार्यता को अब लागू किया गया है। यह देश भर में लागू होगा। अब इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। नियम के तहत लाइसेंस ऑफ ड्राइवर व्हीकल रूल 3 से 27 के बीच में इन सभी का जिक्र है।
- डॉ. दीपक भारद्वाज, एडवोकेट पूर्व सचिव बार एसोसिएशन रोहतक
नियम बनाना और फीस महंगा करना सही नहीं
महज नियम बनाना और फीस महंगा करना सही नहीं है। सरकार व प्रशासन को देखना चाहिए कि वह टेस्ट कहां लेते हैं। इन जगहों पर कोई सुविधा व सुरक्षा नहीं है। 21 दिन का प्रशिक्षण हर किसी के लिए सही नहीं है। खासकर उनके लिए, जिनको वाहन चलाना आता हो। दो पहिया वाहन चालकों के लिए तो कहीं भी प्रशिक्षण केंद्र ही नहीं हैं। दो माह पहले परिचित ने डीएल के लिए आवेदन किया था। बीच में कोरोना के चलते आवेदन नहीं हो पाया। सोमवार को आवेदन फाइल ही नहीं ली गई।
- कुनाल गर्ग
नियम लागू करना हमारी जिम्मेदारी
नया नियम सरकार की ओर से आया है। इसे लागू करना हमारी जिम्मेदारी है। ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने संबंधी नियम नए लाइसेंस पर लागू होंगे। किसी को कोई समस्या आती है तो वह कार्यालय में संपर्क कर सकता है।
-राकेश कुमार, एसडीएम