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अब संपत्ति के अनापत्ति प्रमाण पत्र के लिए लाइन नहीं, ऑनलाइन आइये

Mon, 03 Aug 2020 01:30 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 03 Aug 2020 01:30 AM IST
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Now no line for NOC of property, come online
प्रॉपर्टी ट्रांसफर में होने वाली गड़बड़ी रोकने के लिए चंडीगढ़ में शहरी निकाय विभाग के अधिकारियों की दो दिवसीय मीटिंग हुई। बैठक में निगम के अधिकारियों को सरकार की तरफ से नया सॉफ्टवेयर दिया गया, जिसमें रोहतक निगम प्रशासन को 1 लाख 81 हजार प्रॉपर्टी का डाटा फीड करना है, जिसमें मालिकाना हक से लेकर बिजली, पानी, सीवरेज कनेक्शन तक का पूरा ब्योरा दर्ज होगा। इसके बाद लोगों को संपत्ति के अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) के लिए लाइन में नहीं लगना पड़ेगा।
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नये सॉफ्टवेयर में प्रॉपर्टी से जुड़ा हर विभाग का रिकॉर्ड भरा जाएगा। इसमें राजस्व विभाग से लेकर, नगर निगम, जिला नगर योजनाकार विभाग, बिजली, पब्लिक हेल्थ व दूसरे विभाग तक शामिल हैं। तहसील में जैसे ही प्रॉपर्टी का आईडी नंबर भरा जाएगा, तत्काल कंप्यूटर उपलब्ध डाटा के आधार पर बताएगा कि उक्त संबंधित का क्या टैक्स या देनदारी किस विभाग की कितनी बची है। यह राशि संबंधित व्यक्ति को तहसील में ही जमा करानी होगी। पैसा जमा होते ही राशि संबंधित विभाग के बैंक स्थित अकाउंट में पहुंच जाएगी। इसके बाद विभाग ऑनलाइन एनओसी अपडेट कर देगा।
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प्रदेश सरकार की तरफ से 22 जुलाई से 14 अगस्त तक तहसीलों में प्रॉपर्टी ट्रांसफर के लिए काम बंद किया गया है। एक तरफ सरकार गड़बड़ी वाली रजिस्ट्रियों की जांच पड़ताल कर रही है, दूसरी तरफ संपत्ति ट्रांसफर में और अधिक पारदर्शिता के लिए नया सॉफ्टवेयर तैयार किया है। इसी सिलसिले में शुक्रवार व शनिवार को शहरी निकाय विभाग चंडीगढ़ में प्रदेश स्तर पर निगमों के अधिकारियों की मीटिंग ली गई। मीटिंग में सरकार द्वारा उपलब्ध कराये गए सॉफ्टवेयर में संबंधित निकाय एरिया की प्रॉपर्टी का डाटा अपलोड करने व ऑपरेटिंग की प्रक्रिया को समझाया गया।
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खसरा नंबर से लेकर कलेक्टर रेट तक होगा दर्ज
रोहतक की 1 लाख 81 हजार से ज्यादा प्रॉपर्टी नगर निगम के रिकॉर्ड में दर्ज है, जिसका निगम द्वारा टैक्स लिया जाता है। इसके अलावा और भी प्रॉपर्टी है, जो राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज है, लेकिन निगम के रिकॉर्ड में नहीं है। ऐसे में अब निगम पहले अपने रिकॉर्ड में दर्ज हर प्रॉपर्टी का ब्योरा उक्त सॉफ्टवेयर में दर्ज करवाएगा, जिसमें प्रॉपर्टी मालिक का नाम, पिता का नाम से लेकर इंतकाल दर्ज होगा। प्रॉपर्टी कब और किसके नाम रही। बिजली, पानी व सीवरेज कनेक्शन है या नहीं। प्रॉपर्टी व विकास शुल्क भरा हुआ है या नहीं।

निगम में एक लाख 81 हजार से ज्यादा प्रॉपर्टी का रिकॉर्ड है, जिसे सरकार द्वारा उपलब्ध कराये गए सॉफ्टवेयर में अपलोड किया जा रहा है। निगम के अलावा दूसरे विभाग भी अपना डाटा डाउनलोड कर रहे हैं। सभी डाटा एक ही सॉफ्टवेयर में अपलोड होने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।
- जगदीश, सीपीओ नगर निगम
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