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Rohtak News: ढोल नगाड़ों की थाप पर श्रद्धालु ही नहीं खूब साधु संत भी थिरके

Sun, 17 Mar 2024 02:43 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक Updated Sun, 17 Mar 2024 02:43 AM IST
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Not only devotees but also many saints danced to the beats of drums.
संवाद न्यूज एजेंसीरोहतक। आस्था और विश्वास के प्रतीक बाबा मस्तनाथ मठ अस्थल बोहर में शनिवार को सप्तमी के दिन तीन दिवसीय मेले का आगाज हुआ। सुबह चार बजे से ही श्रद्धालुओं की भीड़ लगनी शुरू हुई। मठ के महंत बालकनाथ योगी मठ की परंपरा के अनुसार गद्दी पर विराजमान हुए और भक्तों को आशीर्वाद दिया। मान्यता है कि गद्दी पर विराजमान महंत में भक्तों को बाबा मस्तनाथ के दर्शन होते हैं और मांगी गई मन्नत पूरी होती हैं। वहीं ढोल नगाड़ोंं की थाप पर श्रद्धालु ही नहीं मेले में पहुंचे साधु-संत भी खूब थिरके।
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महंत बालकनाथ योगी के दर्शन के लिए दिनभर भक्तों का तांता लगा रहा। सुबह से ही भक्त मठ में धूणे और समाधि पर पूजा का क्रम शुरू हुआ। श्रद्धालुओं ने कहीं पर देसी घी की जोत लगाई तो कहीं पर गुड और कंबल चढ़ाते हुए मन्नतें मांगीं। मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भंडारे में बाबा को भोग लगने के बाद प्रसाद की व्यवस्था सुबह से ही भक्तों के लिए शुरू हुई। पहले दिन प्रसाद में श्रद्धालुओं को लड्डू, बालूशाही, चावल, सब्जी, मलीदा, मूंग की दाल, रोटी और पूड़ी वितरित की गई। इस अवसर पर अनेक साधुसंतों सहित बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय की प्रो चांसलर डॉ. अंजना राव, कुलपति डॉ. आर.एस. यादव, रजिस्ट्रार डॉ. मनोज कुमार वर्मा, डीन एकेडमिक अफेयर्स डॉ. नवीन शर्मा, परीक्षा नियंत्रक डॉ.मुकेश सिंगला, सलाहकार ओपी सचदेवा, प्रो. बी एम यादव, डॉ. ललित कुमार आदि उपस्थित रहे।
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खरीदारी के साथ-साथ भक्तों ने झूलों का लिया आनंद
मेले के पहले दिन श्रद्धालुओं ने खरीददारी के साथ-साथ जमकर झूलों का आनंद उठाया। इसके अलावा देश विदेश से आए भक्तों के लिए मंदिर निर्माण में उपयोग हो रही शिल्प कला भी खास चर्चाओं में है। मंदिर साज-सज्जा में उपयोग किए गए पुष्प भी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। टैटू बनवाने को लेकर भी युवा उत्साहित दिखे।
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शेर और गाय एक साथ पालने वाले बाबा
12 पंथ भेख में बाबा मस्तनाथ ही ऐसे संत हैं जो शेर और गाय एक साथ पालते थे। वह दोनों एक साथ बाबा मस्तनाथ के सामने बैठते थे। इसी अस्थल बोहर पर उन्होंने तपस्या की और अनेक चमत्कार दिखाए। यही वजह है कि कई साल बीतने के बाद भी बाबा मस्तनाथ के प्रति लोगों की आस्था बरकरार है और हर साल मेले में भक्तों की संख्या बढ़ती जा रही है।

पैराग्लाइडिंग का बच्चों ने जमकर उठाया लुत्फ
मेले में अब की बार बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय के गेट नंबर 6 पर स्थित हेलीपैड से श्रद्धालुओं के लिए मोटर पैराग्लाइडिंग की सुविधा भी मनोरंजन के लिए उपलब्ध कराई गई है। बच्चे और नवयुवक पैराग्लाइडिंग के जरिए आकाश से जमीन काा नजारा देखकर अत्यंत खुश नजर आ रहे हैं। पहली बार यह मोटर पैराग्लाइडिंग आने से टिकट काउंटर पर लोगों की भीड़ उमड़ रही है।


भजनों को सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु
पहले दिन मेले में रात के समय भजन संध्या में कलाकारों के भजनों को सुन भक्तजन भाव विभोर हुए। कलाकारों ने बाबा मस्तनाथ की लीलाओं से संबंधित अनेक भजनों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं।
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