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कबड्डी कोच देने में सरकार फिसड्डी
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Sat, 03 Oct 2015 02:16 AM IST
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खेल प्रतिभाओं को तैयार करने में प्रदेश की माटी का कोई मुकाबला नहीं है। प्रदेश में भले ही ‘द्रोणाचार्य’ की कमी हो, लेकिन यहां फिर भी एक से बढ़कर प्रतिभावान ‘अर्जुन’ तैयार हो रहे हैं। यहां के कबड्डी खिलाड़ी द्रोणाचार्य की सीख के बिना राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहे हैं। सरकार की अनदेखी के चलते प्रदेश में खेल मात्र 15 कोच के भरोसे ही चल रहा है।
प्रदेश के हर गली-मोहल्ले में कुश्ती के अखाड़े चल रहे हैं तो वहीं कबड्डी भी पीछे नहीं है। कबड्डी के खेल का रिकार्ड देखें तो भारतीय कबड्डी टीम के पूर्व कप्तान राममेहर हो या फिर प्रो कबड्डी पटना टीम के कप्तान राकेश कुमार जैसे खिलाड़ियों बदौलत भले ही राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम छाया है, लेकिन सरकारी स्तर पर इसके हालात दयनीय है।
अधिकतर जिले तो ऐसे हैं जहां पर कबड्डी कोच की कोई सुविधा ही नहीं है। वर्ष 1995 के बाद से अभी तक कबड्डी कोच की कोई भर्ती ही नहीं निकाली गई। राममेहर, रमेश, सुंदर सिंह, अनुप, हसन कुमार, राकेश कुमार, मनजीत सिंह, सूरजीत नरवाल, कविता आदि कबड्डी के चर्चित खिलाड़ी है।
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कबड्डी के साथ खो-खो की भी जिम्मेदारी
प्रदेश में कबड्डी कोच चंद्र और शर्मिला रोहतक, शकुंतला भिवानी, ऊषा राजबाला जींद, जसवंत सिंह, जयभगवान, श्रीपाल, कमल सिंह, मदनपाल, दयानंद, विकास, बलविंद्र सिंह, कुलदीप सिंह, दलबीर और राजवीर है। बता दें कि यह कबड्डी के साथ खो-खो के कोच भी है।
इन जिलों में नहीं है कोच
कबड्डी कोच की बात करें तो सिरसा, फतेहाबाद, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, गुड़गांव, पानीपत, कुरुक्षेत्र, करनाल, मेवात, फरीदाबाद, झज्जर, यमुनानगर, कैथल आदि कई जिलों में कोच ही नहीं है। हालांकि स्थानीय स्तर पर कुछ कोच खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए प्रशिक्षित जरूर कर रहे हैं।
कबड्डी में खिलाड़ी शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकार को इस खेल में अधिक से अधिक कोच भर्ती करने चाहिए, जिससे प्रतिभाओं को और अधिक निखारा जा सके।
- डॉ. डीएस ढुल, खेल निदेशक एमडीयू
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प्रदेश के हर गली-मोहल्ले में कुश्ती के अखाड़े चल रहे हैं तो वहीं कबड्डी भी पीछे नहीं है। कबड्डी के खेल का रिकार्ड देखें तो भारतीय कबड्डी टीम के पूर्व कप्तान राममेहर हो या फिर प्रो कबड्डी पटना टीम के कप्तान राकेश कुमार जैसे खिलाड़ियों बदौलत भले ही राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम छाया है, लेकिन सरकारी स्तर पर इसके हालात दयनीय है।
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अधिकतर जिले तो ऐसे हैं जहां पर कबड्डी कोच की कोई सुविधा ही नहीं है। वर्ष 1995 के बाद से अभी तक कबड्डी कोच की कोई भर्ती ही नहीं निकाली गई। राममेहर, रमेश, सुंदर सिंह, अनुप, हसन कुमार, राकेश कुमार, मनजीत सिंह, सूरजीत नरवाल, कविता आदि कबड्डी के चर्चित खिलाड़ी है।
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कबड्डी के साथ खो-खो की भी जिम्मेदारी
प्रदेश में कबड्डी कोच चंद्र और शर्मिला रोहतक, शकुंतला भिवानी, ऊषा राजबाला जींद, जसवंत सिंह, जयभगवान, श्रीपाल, कमल सिंह, मदनपाल, दयानंद, विकास, बलविंद्र सिंह, कुलदीप सिंह, दलबीर और राजवीर है। बता दें कि यह कबड्डी के साथ खो-खो के कोच भी है।
इन जिलों में नहीं है कोच
कबड्डी कोच की बात करें तो सिरसा, फतेहाबाद, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, गुड़गांव, पानीपत, कुरुक्षेत्र, करनाल, मेवात, फरीदाबाद, झज्जर, यमुनानगर, कैथल आदि कई जिलों में कोच ही नहीं है। हालांकि स्थानीय स्तर पर कुछ कोच खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए प्रशिक्षित जरूर कर रहे हैं।
कबड्डी में खिलाड़ी शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकार को इस खेल में अधिक से अधिक कोच भर्ती करने चाहिए, जिससे प्रतिभाओं को और अधिक निखारा जा सके।
- डॉ. डीएस ढुल, खेल निदेशक एमडीयू