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मायके ने कन्यादान कर मांगी सरपंची, गांव ने मुंह दिखाई में दी चौधर

Tue, 19 Jan 2016 12:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक Updated Tue, 19 Jan 2016 12:10 AM IST
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new bride win panchayat election in rohtak, villages agree with her name
बहू को गांव मुंह दिखाई में शगुन और जेवर देता है। लेकिन झज्जर जिले के
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गांव माजरा दूबलधन में खास विवाह हुआ और रीत भी अनोखी बनी। बेटी के बाप ने कन्यादान के वक्त बारातियों से वादा लिया कि मैं आपको अपनी बेटी सौंप रहा हूं। आप मिलकर इसे सरपंच बनाना। ससुरालियों ने भी बहू के बाप का मान रखा और नई बहू को मुंह दिखाई में सरपंची का ताज सौंप दिया।

माजरा दूबलधन गांव इस बार एससी महिला के लिए आरक्षित किया गया तो वाल्मीकि दयाकिशन ने अपनी पत्नी को चुनावी जंग में उतारने का फैसला किया। दयाकिशन ने पूरी तैयारी के साथ गांव में प्रचार भी शुरू कर दिया। लेकिन शर्तों ने सपना तोड़ दिया। दयाकिशन की पत्नी अशिक्षित हैं।

 उनके सामने अब एक ही रास्ता बचा कि बेटे सूरज की तुरंत शादी कर दी जाए। भिवानी के सांवड़ गांव में बलवान की बेटी प्रवीन से रिश्ता तय किया और 15 सितंबर की शादी तय कर दी गई, क्योंकि पहले उसी समय चुनाव की घोषणा हुई थी। सूरज की बारात में जाट बिरादरी के भी काफी लोग भी पहुंचे थे।

दुल्हन प्रवीन के पिता बलवान ने बेटी की विदाई से पहले सभी बारातियों से वादा लिया कि वह अपनी बेटी को भले ही सूरज को सौंप रहे हैं लेकिन पूरे गांव को मिलकर उसे सरपंच बनाना है। तभी उनके हाथ से किए गए कन्यादान का फर्ज पूरा होगा।

 ससुराल वालों ने 10वीं पास प्रवीन को अब चुनावी जंग में उतारा तो उसके सामने एससी वर्ग से तीन अन्य प्रत्याशी भी थे। बेटी को सरपंच बनवाने के लिए उसके पिता बलवान, मां और नाना प्रचार करने माजरा आए और लोगों को शादी में किया गया वादा याद लिया। पूरे गांव ने वादा निभाया भी और 541 वोटों से प्रवीन को जीता दिया।

चुनाव में प्रचार करने के लिए मेरे पिता-मां और नाना यहां आये थे। उन्होंने मेरे साथ गांव में वोट भी मांगे। पिता ने शादी के समय भी सभी से कहा था कि बेटी को जिताकर सरपंच बनाना है, क्योंकि ये अब सबकी इज्जत की बात है। अब सभी गांव वालों ने मुझे वोट दिया। गांव में हर तरह से विकास कराया जाएगा।
प्रवीन, नवनिर्वाचित सरपंच
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