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Rohtak News: नप ने 29 की जगह 39 करोड़ रुपये का भेजा टेंडर, दोबारा संशोधित हुआ तब मिली स्वीकृति
Mon, 18 Aug 2025 12:26 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Mon, 18 Aug 2025 12:26 AM IST
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फ़ोटो: 13 शहर के भाड़ावास के पास कूड़े में मुंह मारते पशु। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। इसे सरकारी मशीनरी की ढिलाई कहें, हीलाहवाली कहें या लापरवाही। नगर परिषद ने करीब 15 दिन पहले रेवाड़ी शहर में घर-घर कचरा उठान का टेंडर 39 करोड़ रुपये का बनाकर सीएम से स्वीकृति के लिए भेज दिया जबकि टेंडर 29 करोड़ रुपये की राशि का था। नगर परिषद की लापरवाही के कारण टेंडर में 10 करोड़ रुपये की राशि अधिक भर दी गई जिससे सीएम ने फाइल रिजेक्ट कर दी और पूरी प्रक्रिया लंबित हो गई। अब नगर परिषद ने अपनी गलती सुधारते हुए दोबारा 29 करोड़ रुपये की फाइल भेजी जिसे स्वीकृति मिल गई।
नगर परिषद के एक्सईएन अंकित ने बताया कि 29.28 करोड रुपये की राशि 5 साल के लिए खर्च की जाएगी। टेंडर भरने की अंतिम तिथि 6 सितंबर है। टेंडर की शर्तों के अनुसार, 48 ई-रिक्शा, 58 टिपर (टेंपो) और 4 ट्रैक्टर शहर में चलाए जाएंगे। रिक्शा से छोटी गलियों में कचरा उठाया जाएगा। ट्रैक्टरों के माध्यम से कचरे को रामसिंहपुरा डंपिंग यार्ड तक भेजा जाएगा। शहर से रोजाना करीब 110 टन कूड़ा निकलता है।
चौथी बार जारी किया गया टेंडर
इससे पहले 7 साल के लिए टेंडर जारी किया गया था। इस पर मुख्यालय की तरफ से कहा गया था कि समय को कम करके इसे 5 साल किया जाए। फिर 5 साल के लिए टेंडर हुआ था, जिसे कुछ कारणों से रद्द कर दिया गया था। 3 माह के लिए टेंडर जारी करने के पीछे का कारण यह बताया गया था कि अभी 5 साल वाले टेंडर को लेकर कुछ बदलाव किया जाना है, इसकी वजह से उस टेंडर को रद्द कर दिया गया। टेंडर में बदलाव को लेकर समय मांगा गया था जिसे अब पूरा किया गया है।
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कूड़े के पहाड़ का भी होगा निस्तारण
रामसिंहपुरा में पुराने पड़े 2.85 लाख टन से अधिक कचरे के निस्तारण के टेंडर को स्वीकृति मिल गई है। करीब 16 करोड़ रुपये से कूड़े के पहाड़ को खत्म किया जाएगा। अगस्त 2023 से पहले नगर परिषद रेवाड़ी की ओर से कचरे के निस्तारण का टेंडर नहीं किया गया था। इस वजह से रामसिंहपुरा स्थित साइट पर कचरे का ढेर लगता चला गया। सबसे बड़ी समस्या यह थी कि यहां न केवल रेवाड़ी का बल्कि धारूहेड़ा बावल और मानेसर तक का कचरा लाकर डाला जाता रहा। जब यह कचरा पहाड़ की तरह एक जगह इकट्ठा हो गया, यह आसपास के लोगों के लिए परेशानी बनता चला गया। आसपास के गांव में इसका विरोध भी किया। टीम की ओर से कचरे का आकलन किया गया तो यह 2 लाख 85 हजार टन आंका गया। अब कम से रेट अप्रूवल होने के बाद इसे मंजूरी मिल गई है। करीब 16 करोड़ रुपये में ठेका दिया गया है।
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रेवाड़ी। इसे सरकारी मशीनरी की ढिलाई कहें, हीलाहवाली कहें या लापरवाही। नगर परिषद ने करीब 15 दिन पहले रेवाड़ी शहर में घर-घर कचरा उठान का टेंडर 39 करोड़ रुपये का बनाकर सीएम से स्वीकृति के लिए भेज दिया जबकि टेंडर 29 करोड़ रुपये की राशि का था। नगर परिषद की लापरवाही के कारण टेंडर में 10 करोड़ रुपये की राशि अधिक भर दी गई जिससे सीएम ने फाइल रिजेक्ट कर दी और पूरी प्रक्रिया लंबित हो गई। अब नगर परिषद ने अपनी गलती सुधारते हुए दोबारा 29 करोड़ रुपये की फाइल भेजी जिसे स्वीकृति मिल गई।
नगर परिषद के एक्सईएन अंकित ने बताया कि 29.28 करोड रुपये की राशि 5 साल के लिए खर्च की जाएगी। टेंडर भरने की अंतिम तिथि 6 सितंबर है। टेंडर की शर्तों के अनुसार, 48 ई-रिक्शा, 58 टिपर (टेंपो) और 4 ट्रैक्टर शहर में चलाए जाएंगे। रिक्शा से छोटी गलियों में कचरा उठाया जाएगा। ट्रैक्टरों के माध्यम से कचरे को रामसिंहपुरा डंपिंग यार्ड तक भेजा जाएगा। शहर से रोजाना करीब 110 टन कूड़ा निकलता है।
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चौथी बार जारी किया गया टेंडर
इससे पहले 7 साल के लिए टेंडर जारी किया गया था। इस पर मुख्यालय की तरफ से कहा गया था कि समय को कम करके इसे 5 साल किया जाए। फिर 5 साल के लिए टेंडर हुआ था, जिसे कुछ कारणों से रद्द कर दिया गया था। 3 माह के लिए टेंडर जारी करने के पीछे का कारण यह बताया गया था कि अभी 5 साल वाले टेंडर को लेकर कुछ बदलाव किया जाना है, इसकी वजह से उस टेंडर को रद्द कर दिया गया। टेंडर में बदलाव को लेकर समय मांगा गया था जिसे अब पूरा किया गया है।
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कूड़े के पहाड़ का भी होगा निस्तारण
रामसिंहपुरा में पुराने पड़े 2.85 लाख टन से अधिक कचरे के निस्तारण के टेंडर को स्वीकृति मिल गई है। करीब 16 करोड़ रुपये से कूड़े के पहाड़ को खत्म किया जाएगा। अगस्त 2023 से पहले नगर परिषद रेवाड़ी की ओर से कचरे के निस्तारण का टेंडर नहीं किया गया था। इस वजह से रामसिंहपुरा स्थित साइट पर कचरे का ढेर लगता चला गया। सबसे बड़ी समस्या यह थी कि यहां न केवल रेवाड़ी का बल्कि धारूहेड़ा बावल और मानेसर तक का कचरा लाकर डाला जाता रहा। जब यह कचरा पहाड़ की तरह एक जगह इकट्ठा हो गया, यह आसपास के लोगों के लिए परेशानी बनता चला गया। आसपास के गांव में इसका विरोध भी किया। टीम की ओर से कचरे का आकलन किया गया तो यह 2 लाख 85 हजार टन आंका गया। अब कम से रेट अप्रूवल होने के बाद इसे मंजूरी मिल गई है। करीब 16 करोड़ रुपये में ठेका दिया गया है।