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नगर निगम : अमृत प्रोजेक्ट 301 करोड़ खर्च, फिर भी सीवर व पानी की समस्या हल नहीं
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माई सिटी रिपोर्टर
रोहतक। शहर की महत्वाकांक्षी योजना अमृत प्रोजेक्ट पर केंद्र सरकार का 331 करोड़ में से 301 करोड़ खर्च हो चुका है। फिर भी शहर में सीवर व पेयजल की समस्या हल नहीं हो सकी है। मंगलवार को नगर निगम हाउस की नौ दिन में दूसरी बार बैठक होगी। बैठक में पहली बार नगर निगम के पार्षद सीधे ठेकेदारों से नगर निगम, जनस्वास्थ्य विभाग, पीडब्ल्यूडी व सिंचाई विभाग के एसई या एक्सीएन के सामने जवाब मांगेगे। निगम आयुक्त की तरफ से दोबारा पत्र भेजकर 14 फरवरी को हाउस की बैठक बुलाई गई है। साथ ही विभागों के आला अधिकारियों का आना अनिवार्य किया गया है।
2005 से लेकर अब तक प्रदेश के मुख्यमंत्री का गृह जिला होने के बावजूद शहर में सीवर, पानी, सड़क व जलभराव की समस्याएं हैं। 2014 तक कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा मुख्यमंत्री रहे, जो जिले के गांव सांघी के मूल निवासी हैं। 2014 से अब तक मनोहर लाल प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं, जिनका पैतृक गांव जिले में ही निंदाना व बनियानी हैं। 2018 में केंद्र सरकार ने अमृत प्रोजेक्ट के तहत रोहतक शहर का चयन किया। 331 करोड़ की लागत से पानी व सीवरेज व्यवस्था पर खर्च किए जाने थे। 2018 में शुरू हुए प्रोजेक्ट को 18 माह में पूरा किया जाना था, लेकिन अब तक प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो सका है। नगर निगम के सूत्रों का कहना है कि 331 करोड़ में से निगम 330 करोड़ की राशि का ठेकेदारों को भुगतान कर चुका है। इसमें 194 करोड़ सीवरेज व 107 करोड़ पेजयल का कार्य करने वाले ठेकेदार को दिए जा चुके हैं। अब मात्र 30 करोड़ रुपये की राशि बची हुई है।
हाउस की बैठक में ये पूछे जाएंगे सवाल
: शहर में बीएंडआर की 12 सड़कें हैं, जिनके गड्ढे अब तक भरे नहीं गए। सफेद पट्टी खींचकर ग्रिल की मरम्मत हुई या नहीं।
: सेक्टरों में बारिश के पानी की जलनिकासी को लेकर क्या कदम उठाए गए।
: शहर में रेहड़ी वालों के लिए 12 जगह अब तक व्यवस्था क्यों नहीं हुई।
: सिंचाई विभाग शहर से बारिश के पानी की निकासी को लेकर क्या व्यवस्था कर रहा है।
: कन्हेली रोड स्थित डेयरी कांप्लैक्स में डेयरियों को स्थापित करने के लिए चार एकड़ में प्लाट काटने की अनुमति कब तक मिलेगी।
: अमृत प्रोजेक्ट के तहत पानी के 13 बूस्टर बनने थे। चार साल बाद भी अभी तक चालू नहीं हुए। अमृत प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारी व ठेकेदार जवाब दें।
: अमृत प्रोजेक्ट के तहत चार एसटीपी अभी तक नहीं बने। संबंधित ठेकेदार व अधिकारी जवाब दें।
: अमृत प्रोजेक्ट के तहत सीवरेज लाइन व पेयजल लाइन बिछाने के लिए गलियां तोड़ी गई थी। अभी तक दोबारा नहीं बनाई गई।
नगर निगम हाउस की मंगलवार को सुबह 11 बजे जिला विकास भवन में बैठक होगी। बैठक में विभागों के शीर्ष अधिकारियों व ठेकेदारों को बुुलाया गया है। बैठक में सीवर, पानी, सड़क व जलभराव की समस्याओं को लेकर पार्षदों द्वारा जवाब मांगे जाएंगे। अगर आला अधिकारी नहीं आए तो मुख्य सचिव को पत्र लिखा जाएगा।
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मनमोहन गोयल, मेयर नगर निगम
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रोहतक। शहर की महत्वाकांक्षी योजना अमृत प्रोजेक्ट पर केंद्र सरकार का 331 करोड़ में से 301 करोड़ खर्च हो चुका है। फिर भी शहर में सीवर व पेयजल की समस्या हल नहीं हो सकी है। मंगलवार को नगर निगम हाउस की नौ दिन में दूसरी बार बैठक होगी। बैठक में पहली बार नगर निगम के पार्षद सीधे ठेकेदारों से नगर निगम, जनस्वास्थ्य विभाग, पीडब्ल्यूडी व सिंचाई विभाग के एसई या एक्सीएन के सामने जवाब मांगेगे। निगम आयुक्त की तरफ से दोबारा पत्र भेजकर 14 फरवरी को हाउस की बैठक बुलाई गई है। साथ ही विभागों के आला अधिकारियों का आना अनिवार्य किया गया है।
2005 से लेकर अब तक प्रदेश के मुख्यमंत्री का गृह जिला होने के बावजूद शहर में सीवर, पानी, सड़क व जलभराव की समस्याएं हैं। 2014 तक कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा मुख्यमंत्री रहे, जो जिले के गांव सांघी के मूल निवासी हैं। 2014 से अब तक मनोहर लाल प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं, जिनका पैतृक गांव जिले में ही निंदाना व बनियानी हैं। 2018 में केंद्र सरकार ने अमृत प्रोजेक्ट के तहत रोहतक शहर का चयन किया। 331 करोड़ की लागत से पानी व सीवरेज व्यवस्था पर खर्च किए जाने थे। 2018 में शुरू हुए प्रोजेक्ट को 18 माह में पूरा किया जाना था, लेकिन अब तक प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो सका है। नगर निगम के सूत्रों का कहना है कि 331 करोड़ में से निगम 330 करोड़ की राशि का ठेकेदारों को भुगतान कर चुका है। इसमें 194 करोड़ सीवरेज व 107 करोड़ पेजयल का कार्य करने वाले ठेकेदार को दिए जा चुके हैं। अब मात्र 30 करोड़ रुपये की राशि बची हुई है।
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हाउस की बैठक में ये पूछे जाएंगे सवाल
: शहर में बीएंडआर की 12 सड़कें हैं, जिनके गड्ढे अब तक भरे नहीं गए। सफेद पट्टी खींचकर ग्रिल की मरम्मत हुई या नहीं।
: सेक्टरों में बारिश के पानी की जलनिकासी को लेकर क्या कदम उठाए गए।
: शहर में रेहड़ी वालों के लिए 12 जगह अब तक व्यवस्था क्यों नहीं हुई।
: सिंचाई विभाग शहर से बारिश के पानी की निकासी को लेकर क्या व्यवस्था कर रहा है।
: कन्हेली रोड स्थित डेयरी कांप्लैक्स में डेयरियों को स्थापित करने के लिए चार एकड़ में प्लाट काटने की अनुमति कब तक मिलेगी।
: अमृत प्रोजेक्ट के तहत पानी के 13 बूस्टर बनने थे। चार साल बाद भी अभी तक चालू नहीं हुए। अमृत प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारी व ठेकेदार जवाब दें।
: अमृत प्रोजेक्ट के तहत चार एसटीपी अभी तक नहीं बने। संबंधित ठेकेदार व अधिकारी जवाब दें।
: अमृत प्रोजेक्ट के तहत सीवरेज लाइन व पेयजल लाइन बिछाने के लिए गलियां तोड़ी गई थी। अभी तक दोबारा नहीं बनाई गई।
नगर निगम हाउस की मंगलवार को सुबह 11 बजे जिला विकास भवन में बैठक होगी। बैठक में विभागों के शीर्ष अधिकारियों व ठेकेदारों को बुुलाया गया है। बैठक में सीवर, पानी, सड़क व जलभराव की समस्याओं को लेकर पार्षदों द्वारा जवाब मांगे जाएंगे। अगर आला अधिकारी नहीं आए तो मुख्य सचिव को पत्र लिखा जाएगा।
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मनमोहन गोयल, मेयर नगर निगम