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Rohtak News: मांगों के लिए मिड डे मील वर्कर्स 3 दिसंबर को संसद के बाहर करेंगी प्रदर्शन
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रोहतक। न्यूनतम वेतन बढ़ोतरी, पक्की नौकरी और पेंशन लाभ के लिए मिड डे मील वर्कर्स 3 दिसंबर को संसद के बाहर प्रदर्शन करेंगी। यह बात मिड डे मील वर्कर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व सीटू प्रदेश महासचिव जयभगवान ने कही। वह रोहतक में यूनियन की राज्य कमेटी बैठक को संबोधित कर रहे थे।
बैठक की अध्यक्षता राज्य प्रधान सरोज दुजाना ने की। उन्होंने कहा कि देश में 25 लाख के करीब मिड डे मील वर्कर काम कर रही हैं। जो कि देश के 12 करोड़ बच्चों के लिए दोपहर का भोजन बनाते हैं। देश के भविष्य को तैयार करने में लगी है। यह बहुत दुखद है कि महिलाओं के सशक्तीकरण का दावा करने वाली केंद्र सरकार ने पिछले 11 साल से मिड डे मील वर्कर्स के मानदेय में एक रुपये की भी बढ़ोतरी नहीं की गई हे।
यूनियन की राज्य प्रधान सरोज दुजाना ने कहा कि वर्करों से काम लिया जाता है। लेकिन, तय मानदेय भी कई-कई माह तक नहीं मिलता। 11 माह काम करने पर 10 का मानदेय मिलता है। मिड डे मिल वर्कर्स को भी शिक्षकों व अन्य स्टाफ की तरह 12 महीने वेतन मिलना चाहिए। वेतन 26000 रुपये से कम नहीं होना चाहिए।
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2013 में 45वें राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन ने मिड डे मील वर्करों सहित सभी स्कीम वर्कर्स को कर्मचारी व मजदूर का दर्जा देने, न्यूनतम वेतन सहित सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की सिफारिश की थी। इन्हें आज तक लागू नहीं किया गया। इसीलिए मिड डे मील वर्कर्स फेडेरेशन ऑफ इंडिया के आह्वान पर 3 दिसंबर को संसद के बाहर विशाल प्रदर्शन करेंगे। इसमें हरियाणा से भारी संख्या में मिड डे मील वर्कर्स पहुंचेगी।
इस दौरान सत्यवान, सुनीता, संतोष, ओ पी माटा, सोनू, बबीता, संदीप, कविता आदि ने भी विचार रखे।
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बैठक की अध्यक्षता राज्य प्रधान सरोज दुजाना ने की। उन्होंने कहा कि देश में 25 लाख के करीब मिड डे मील वर्कर काम कर रही हैं। जो कि देश के 12 करोड़ बच्चों के लिए दोपहर का भोजन बनाते हैं। देश के भविष्य को तैयार करने में लगी है। यह बहुत दुखद है कि महिलाओं के सशक्तीकरण का दावा करने वाली केंद्र सरकार ने पिछले 11 साल से मिड डे मील वर्कर्स के मानदेय में एक रुपये की भी बढ़ोतरी नहीं की गई हे।
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यूनियन की राज्य प्रधान सरोज दुजाना ने कहा कि वर्करों से काम लिया जाता है। लेकिन, तय मानदेय भी कई-कई माह तक नहीं मिलता। 11 माह काम करने पर 10 का मानदेय मिलता है। मिड डे मिल वर्कर्स को भी शिक्षकों व अन्य स्टाफ की तरह 12 महीने वेतन मिलना चाहिए। वेतन 26000 रुपये से कम नहीं होना चाहिए।
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2013 में 45वें राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन ने मिड डे मील वर्करों सहित सभी स्कीम वर्कर्स को कर्मचारी व मजदूर का दर्जा देने, न्यूनतम वेतन सहित सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की सिफारिश की थी। इन्हें आज तक लागू नहीं किया गया। इसीलिए मिड डे मील वर्कर्स फेडेरेशन ऑफ इंडिया के आह्वान पर 3 दिसंबर को संसद के बाहर विशाल प्रदर्शन करेंगे। इसमें हरियाणा से भारी संख्या में मिड डे मील वर्कर्स पहुंचेगी।
इस दौरान सत्यवान, सुनीता, संतोष, ओ पी माटा, सोनू, बबीता, संदीप, कविता आदि ने भी विचार रखे।