शिक्षा विभाग में कार्यरत मिड-डे मील कार्यकर्ताओं की मांगों व समस्याओं को लेकर मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन के सदस्यों ने विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए तहसीलदार गुलाब सिंह के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। साथ ही चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों को पूरा नहीं किया तो प्रदेशभर में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
सीटू जिला प्रधान कमलेश लाहली व जिला सचिव प्रकाशचंद्र ने कहा कि मिड-डे मील योजना को पीएम पोषण योजना का नाम दिया गया है। इसमें काम करने वाले 25 लाख के करीब वर्कर्स के हालात दयनीय हैं। देश के करीब 12 करोड़ बच्चों के लिए 11 लाख स्कूलों में कार्यरत वर्कर्स के मानदेय में केंद्र सरकार ने 2009 के बाद एक रुपये की भी बढ़ोतरी नहीं की। महंगाई बढ़ने के कारण इतने कम मानदेय में गुजारा संभव नहीं है। सरकार नई शिक्षा नीति के नाम पर गरीब परिवारों के बच्चों को शिक्षा से बेदखल करने का काम कर रही है। स्कूल बंद करने या मर्ज करने के नाम पर मिड-डे मील कार्यकर्ताओं की नौकरी छीनी जा रही है। यूनियन ने केंद्र व राज्य सरकार से मांग की कि नई शिक्षा नीति वापस ली जाए और केंद्रीय बजट में मिड-डे मील कार्यकर्ताओं के मानदेय में बढ़ौतरी की जाए। इस मौके पर सीटू जिला सचिव विनोद, धर्मबीर हुड्डा, मंजू, सुनीता, शीला, अंजू सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।