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बांड पॉलिसी के विरोध में सड़क पर उतरे एमबीबीएस के विद्यार्थी, गूंजा वी वांट जस्टिस का नारा

Tue, 01 Nov 2022 11:51 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 01 Nov 2022 11:51 PM IST
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MBBS students took to the road in protest against the bond policy, the slogan of Gunja We Want Justice
विरोध मार्च निकालते एमबीबीएस स्टूडेंट्स । अमर उजाला
रोहतक। प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की प्रवेश प्रक्रिया शुरुआत में ही विवादों में उलझ गई है। सरकार की दस लाख रुपये सालाना बांड पॉलिसी इसकी वजह बताई जा रही है। कोर्स में प्रवेश के लिए सरकार की इस शर्त का विरोध शुरू हो गया है। इसी कड़ी में मंगलवार को पीजीआई के एमबीबीएस विद्यार्थियों व अभिभावकों ने निदेशक कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों ने निदेशक कार्यालय से मेडिकल मोड़ तक विरोध मार्च निकालकर पॉलिसी के प्रति रोष प्रकट किया। यहां प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों के बीच वी वांट जस्टिस का नारा गूंजता रहा।
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विद्यार्थियों ने कहा कि सरकार प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को बहाल ही नहीं करना चाहती है। इसमें सुधार की बजाय व्यवस्था और गड़बड़ाने वाले कदम उठाए जा रहे हैं। एमबीबीएस में प्रवेश के लिए बांड पॉलिसी लागू करना इसी का उदाहरण है। इसके तहत विद्यार्थियों को चार साल तक दस लाख रुपये का बांड देना होगा। एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए देश के किसी भी प्रांत के सरकारी मेडिकल कॉलेज में इतनी भारी फीस नहीं है। हरियाणा को छोड़कर सभी राज्यों में बेहद कम फीस पर विद्यार्थियों को चिकित्सा शिक्षा दी जा रही है।
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मेडिकल मोड़ पर प्रदर्शन के दौरान विद्यार्थियों ने हाथों में थामी स्लोगन लिखी पट्टिकाएं लोगों को दिखाते हुए बांड पॉलिसी वापस लेने की अपील की। यहां से सभी सड़क पर नारेबाजी करते हुए वापस निदेशक कार्यालय के बाहर पहुंचे। यहां निदेशक डॉ. एसएस लोहचब ने उनसे बातचीत की। कुछ विद्यार्थियों को समस्या के संबंध में बुलाया व समाधान पर मंथन किया। शाम तक यहां किसी तरह का समाधान नहीं हुआ था।
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विद्यार्थी व अभिभावक हो जाएंगे कर्जदार
प्रदेश में एमबीबीएस के प्रवेश के समय ही एक वर्ष के लिए 10 लाख रुपये के बांड की अनिवार्यता लागू की गई है। चार साल तक यह राशि देनी होगी। इतनी बड़ी रकम अभिभावकों के लिए देना नामुमकिन है। सरकार के इस फैसले से केवल धनाढ्य वर्ग ही डॉक्टरी की पढ़ाई कर सकेगा। जबकि आम घरों के होनहार विद्यार्थी इस दायरे से बाहर हो जाएंगे। इससे स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह चरमरा जाएंगी। यही नहीं, विद्यार्थी व उनके अभिभावक कर्जदार हो जाएंगे।
बांड से खत्म हो जाएगा नीट का वजूद
विद्यार्थियों ने कहा कि बांड पॉलिसी के तहत रुपये देकर प्रवेश मिलेगा। इससे अमीर घरों के बच्चों को अच्छे सरकारी कॉलेजों में प्रवेश मिल जाएगा। अब तक ऐसे विद्यार्थी निजी कॉलेजों में मोटी फीस देकर प्रवेश लेते थे। जबकि होनहार विद्यार्थी नीट में टॉप कर अच्छे अंकों के आधार पर प्रवेश प्राप्त करते थे। इस नई व्यवस्था से नीट का वजूद ही नहीं रहेगा।
नई शिक्षा नीति के नाम पर धोखा
विद्यार्थियों ने कहा कि नई शिक्षा नीति के नाम पर सरकार विद्यार्थियों के साथ धोखा कर रही है। नई व्यवस्था के बहाने में बेतहाशा फीस बढ़ाई जा रही है। यह न तो विद्यार्थियों के हित में है न शिक्षा के। इससे शिक्षा की जरूरत वाला बड़ा तबका अध्ययन से वंचित हर जाएगा। आम घरों के बच्चे न पढ़ पाएंगे न नौकरी लग पाएंगे। वे केवल मजदूरी करेंगे। यही मेडिकल शिक्षा में हो रहा है। यह अन्याय है। इसका विरोध किया जाएगा।

डायरेक्टर नेे जानी समस्या, धरना-प्रदर्शन जारी
मंगलवार शाम पीजीआई निदेशक ने प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों से मुलाकात की। उनसे बातचीत कर उनकी समस्या जानी। यहां विद्यार्थियों ने शांतिपूर्वक बांड पॉलिसी का विरोध करने की बात कही। इस पर प्रशासन ने भी उन्हें शांति व्यवस्था बनाए रखने की नसीहत दी। शाम को विद्यार्थियों ने बैठक कर बुधवार सुबह भी अपना रोष मार्च व धरना-प्रदर्शन जारी रखने का फैसला लिया।
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