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Rohtak News: शहीद के बेटे को पेट्रोल पंप का लाइसेंस देने का झांसा देकर 9.19 लाख रुपये ठगे
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रोहतक। शहीद के बेटे को पेट्रोल पंप का लाइसेंस देने का झांसा देकर साइबर अपराधियों ने 9.19 लाख रुपये ठगी का मामला सामने आया है। एसडीएम कार्यालय में क्लर्क के तौर पर कार्यरत सैंपल गांव निवासी नीरज ने इस संबंध में साइबर क्राइम थाना में केस दर्ज कराया है।
पुलिस को दी शिकायत में गांव सैंपल, हाल रेवन्यू कॉलोनी निवासी नीरज ने बताया कि वह उनके पिता सेना में थे और वह 2003 में शहीद हो गए थे। वह अपनी मां सुदेश देवी के नाम से वार विडो कोटे से पेट्रोल पंप लेना चाहते हैं। इसके लिए लाइसेंस लेने की प्रक्रिया के बारे में जानने के लिए उन्होंने गूगल पर सर्च किया। उन्हें गूगल पर एक बेवसाइट मिली, जिस पर उसने फार्म भर करके भेज दिया। 7 फरवरी 2024 को उनके पास कॉल आई। एक महिला बोली कि आपने पेट्रोल पंप के लाइसेंस के लिए जो आवेदन किया था वह स्वीकार हो गया है। इसके बाद उसे ई-मेल व दूसरे नंबर दिए गए। उससे आवेदन फीस के नाम पर 29 हजार 500 रुपये जमा करवाए गए। एलआईओ, डीलरशिप लाइसेंस, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) एनओसी व दूसरे कागजात के नाम पर 9 लाख 19 हजार 500 से अधिक राशि जमा करवाई गई। उनसे कहा गया कि टीम मौके का दौरा करने आ रही है। जब टीम नहीं आई तो उसे शक हुआ। उसने छानबीन की तो पता चला कि उसके साथ ठगी हुई है।
तीन माह में 28 केस दर्ज, एक करोड़ की हुई ठगी
पुलिस विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक एक जनवरी से 21 मार्च तक साइबर क्राइम थाने में 28 केस दर्ज हो चुके हैं, जिनमें करीब एक करोड़ रुपये की ठगी की गई है। खास बात यह है कि किसी भी केस में 2 लाख से कम की ठगी नहीं हुई है।
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पुलिस को दी शिकायत में गांव सैंपल, हाल रेवन्यू कॉलोनी निवासी नीरज ने बताया कि वह उनके पिता सेना में थे और वह 2003 में शहीद हो गए थे। वह अपनी मां सुदेश देवी के नाम से वार विडो कोटे से पेट्रोल पंप लेना चाहते हैं। इसके लिए लाइसेंस लेने की प्रक्रिया के बारे में जानने के लिए उन्होंने गूगल पर सर्च किया। उन्हें गूगल पर एक बेवसाइट मिली, जिस पर उसने फार्म भर करके भेज दिया। 7 फरवरी 2024 को उनके पास कॉल आई। एक महिला बोली कि आपने पेट्रोल पंप के लाइसेंस के लिए जो आवेदन किया था वह स्वीकार हो गया है। इसके बाद उसे ई-मेल व दूसरे नंबर दिए गए। उससे आवेदन फीस के नाम पर 29 हजार 500 रुपये जमा करवाए गए। एलआईओ, डीलरशिप लाइसेंस, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) एनओसी व दूसरे कागजात के नाम पर 9 लाख 19 हजार 500 से अधिक राशि जमा करवाई गई। उनसे कहा गया कि टीम मौके का दौरा करने आ रही है। जब टीम नहीं आई तो उसे शक हुआ। उसने छानबीन की तो पता चला कि उसके साथ ठगी हुई है।
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तीन माह में 28 केस दर्ज, एक करोड़ की हुई ठगी
पुलिस विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक एक जनवरी से 21 मार्च तक साइबर क्राइम थाने में 28 केस दर्ज हो चुके हैं, जिनमें करीब एक करोड़ रुपये की ठगी की गई है। खास बात यह है कि किसी भी केस में 2 लाख से कम की ठगी नहीं हुई है।
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