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Rohtak News: बच्चों में कुपोषण बढ़ा, सांस संबंधी बीमारियों में भी वृद्धि
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15jjrp02- आंगनबाड़ी में शिक्षा ग्रहण करते बच्चे। स्रोत : विभाग
झज्जर। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-6) की तरफ से जारी आंकड़ों में जिले पांच साल से कम उम्र के बच्चों में कुपोषण के विभिन्न रूपों में वृद्धि दर्ज की गई है। इसके साथ ही, डायरिया और तीव्र श्वसन संक्रमण (एआरआई) जैसी बचपन की बीमारियां भी बढ़ी है।
सर्वेक्षण के अनुसार, पांच साल से कम उम्र के बच्चों में स्टंटिंग (उम्र के हिसाब से कम ऊंचाई) होना 8 फीसदी तक बढ़ गया है। 2019-21 में यह 15.6 फीसदी था। 2023-24 में बढ़कर 23.6 फीसदी हो गया है। इसके अलावा वेस्टिंग (ऊंचाई के हिसाब से कम वजन) में 10.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
वर्ष 2019-21 में यह 8.0 फीसदी था, जो 2023-24 में बढ़कर 18.3 फीसदी पर पहुंच गई है। इसी तरह, अंडरवेट (उम्र के हिसाब से कम वजन) बच्चों का प्रतिशत 15.7 फीसदी बढ़ा है।
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2019-21 में यह 9.7 फीसदी था, जो 2023-24 में बढ़कर 25.4 फीसदी हो गया है। ये आंकड़े बच्चों के पोषण स्तर में गंभीर गिरावट का संकेत देते हैं।
हालांकि राहत की खबर यह है कि इस अवधि में गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों का प्रतिशत कम हुआ है। यह 2019-21 में 3.5 फीसदी था, जो अब कम होकर 3.0 हो गया है। पांच साल से कम उम्र के बच्चों में अधिक वजन का प्रतिशत भी 6.3 से घटकर 0.4 फीसदी हो गया है। यह एक सकारात्मक पहलू है।
12-23 माह के बच्चों में कुल पूर्ण टीकाकरण (कार्ड या मां की याददाश्त के आधार पर) 90.9 फीसदी से घटकर 90.0 फीसदी हो गया है। बीसीजी और पेंटावेलेंट टीकों की कवरेज में भी मामूली कमी आई है।
माताओं को प्रसव के दो दिन के भीतर स्वास्थ्य कर्मियों से प्रसवोत्तर देखभाल मिलने का प्रतिशत 96.0 से बढ़कर 96.4 फीसदी हुआ है। वहीं रिपोर्ट में प्रसवोत्तर देखभाल की भी अच्छी स्थिति अच्छी नहीं है।
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सर्वेक्षण के अनुसार, पांच साल से कम उम्र के बच्चों में स्टंटिंग (उम्र के हिसाब से कम ऊंचाई) होना 8 फीसदी तक बढ़ गया है। 2019-21 में यह 15.6 फीसदी था। 2023-24 में बढ़कर 23.6 फीसदी हो गया है। इसके अलावा वेस्टिंग (ऊंचाई के हिसाब से कम वजन) में 10.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
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वर्ष 2019-21 में यह 8.0 फीसदी था, जो 2023-24 में बढ़कर 18.3 फीसदी पर पहुंच गई है। इसी तरह, अंडरवेट (उम्र के हिसाब से कम वजन) बच्चों का प्रतिशत 15.7 फीसदी बढ़ा है।
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2019-21 में यह 9.7 फीसदी था, जो 2023-24 में बढ़कर 25.4 फीसदी हो गया है। ये आंकड़े बच्चों के पोषण स्तर में गंभीर गिरावट का संकेत देते हैं।
हालांकि राहत की खबर यह है कि इस अवधि में गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों का प्रतिशत कम हुआ है। यह 2019-21 में 3.5 फीसदी था, जो अब कम होकर 3.0 हो गया है। पांच साल से कम उम्र के बच्चों में अधिक वजन का प्रतिशत भी 6.3 से घटकर 0.4 फीसदी हो गया है। यह एक सकारात्मक पहलू है।
12-23 माह के बच्चों में कुल पूर्ण टीकाकरण (कार्ड या मां की याददाश्त के आधार पर) 90.9 फीसदी से घटकर 90.0 फीसदी हो गया है। बीसीजी और पेंटावेलेंट टीकों की कवरेज में भी मामूली कमी आई है।
माताओं को प्रसव के दो दिन के भीतर स्वास्थ्य कर्मियों से प्रसवोत्तर देखभाल मिलने का प्रतिशत 96.0 से बढ़कर 96.4 फीसदी हुआ है। वहीं रिपोर्ट में प्रसवोत्तर देखभाल की भी अच्छी स्थिति अच्छी नहीं है।