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पीएम से मन की बात
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एनसीसी डे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को चार कैडेट्स से फोन पर मन की बात की। इस दौरान रोहतक के मकड़ौली गांव निवासी अखिल से प्रधानमंत्री ने दो बार बात की। अखिल ने प्रधानमंत्री से पूछा कि आप इतने व्यस्त रहते हो तो क्या आपको किताब पढ़ने या टीवी देखने या फिल्म देखने का मौका मिलता है। इस पर पीएम ने कहा, किताब पढ़ने में मेरी रुचि रहती है। उसमें समय का बंधन नहीं होता है। फिल्म देखने में कभी रुचि नहीं रही। पीएम बोले कि गूगल ने हमारी आदतें बिगाड़ दी हैं, रेफरेंस के लिए शॉर्टकट सीखा दिया। इसके साथ प्रधानमंत्री ने अखिल से उनके एनसीसी कैंप के बारे में पूछा। इस पर अखिल ने कहा कि एनसीसी ने मुझे और ज्यादा जिम्मेदार बनाया है। इसके अलावा मुझे एनसीसी कैडेट की ड्रिल और यूनिफार्म ज्यादा पसंद आई।
अमर उजाला से बातचीत में अखिल ने बताया कि पीएम मोदी से बात करना गौरव की बात है। कार्यक्रम में पीएम से बात होने पर मुझ से ज्यादा मेरी मां खुश है। अखिल ने बताया कि उसने अपने ताऊ धर्म सिंह के पास रहकर दिल्ली के केंद्रीय विद्यालय से शिक्षा ग्रहण की है। वह इस समय दिल्ली के दयाल सिंह कालेज से फिजिक्स ऑनर्स कर रहे हैं। उसके पिता भगत सिंह खेतीबाड़ी के साथ ड्राइविंग करते हैं। अखिल सेना में अधिकारी बनकर देश की सेवा करना चाहते हैं। उसके परिवार में दादा चांद सिंह, पिता भगत सिंह, माता, छोटी बहन पुष्पांशी है।
ये रही बातचीत........
अखिल : जय हिंद सर, मेरा नाम जूनियर अंडर ऑफिसर अखिल है।
प्रधानमंत्री : हां अखिल, बताइए।
अखिल : मैं रोहतक, हरियाणा का रहने वाला हूं, सर।
प्रधानमंत्री : हां...
अखिल : मैं दयाल सिंह कॉलेज, दिल्ली यूनिवर्सिटी से
फिजिक्स आनर्स कर रहा हूं।
प्रधानमंत्री : हां... हां...
अखिल : सर, मुझे एनसीसी में सबसे अच्छा अनुशासन लगा है सर।
प्रधानमंत्री : वाह...
अखिल : इसने मुझे और ज्यादा रिस्पांसिबल सिटीजन बनाया है सर। एनसीसी कैडेट्स की ड्रिल, यूनिफार्म मुझे बेहद पसंद है।
प्रधानमंत्री : कितने कैंप करने का मौका मिला, कहां - कहां जाने का मौका मिला ?
अखिल : सर, मैंने 3 कैंप किये हैं सर। मैं हाल ही में इंडियन मिलिट्री एकेडमी देहरादून में एटेचमेंट कैंप का हिस्सा रहा हूं।
प्रधानमंत्री : कितने समय का था?
अखिल : सर, ये 13 दिन का कैंप का था सर।
प्रधानमंत्री : अच्छा..
अखिल : सर, मैंने वहां पर भारतीय फौज में अफसर कैसे बनते हैं ,उसको बढ़े करीब से देखा है और उसके बाद मेरा भारतीय फौज में अफसर बनने का संकल्प और ज्यादा दृढ़ हुआ है सर।
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प्रधानमंत्री : वाह...
अखिल : और सर मैंने रिपब्लिक डे प्रेड में भी हिस्सा लिया था और वो मेरे लिए और मेरे परिवार के लिए बहुत ही गर्व की बात थी।
प्रधानमंत्री : शाबाश...
अखिल : मेरे से ज्यादा खुश मेरी माँ थी सर। जब हम सुबह 2 बजे उठ कर राजपथ पर प्रेक्टिस करने जाते थे तो जोश हम में इतना होता था कि वो देखने लायक था। बाकी आकस्मिक बल के लोग जो हमें इतना प्रोत्साहित करते थे, राजपथ पर मार्च करते वक्त हमारे रोंगटे खड़े हो गए थे सर ।
प्रधानमंत्री : चलिए आप चारों से बात करने का मौका मिला और वो भी एनसीसी डे पर। मेरे लिये बहुत खुशी की बात है।
दूसरी बार अखिल की बातचीत
अखिल : प्रधानमंत्री जी...
प्रधानमंत्री : जी...
अखिल : आप दिन में इतने व्यस्त रहते हो तो मेरी ये जिज्ञासा थी जानने की कि आपको टी.वी. देखने का, फिल्म देखने का या किताब पढ़ने का समय मिलता है ?
प्रधानमंत्री : वैसे मेरी किताब पढ़ने की रुचि तो रहती थी। फिल्म देखने की कभी रुचि भी नहीं रही, उसमें समय का बंधन तो नहीं है और न ही उस प्रकार से टी.वी. देख पाता हूं। बहुत कम। कभी-कभी पहले डिस्कवरी चैनल देखा करता था, जिज्ञासा के कारण। और किताबें पढ़ता था लेकिन इन दिनों तो पढ़ नहीं पाता हूं और दूसरा गूगल के कारण भी आदतें खराब हो गई हैं क्योंकि अगर किसी रेफरेंस को देखना है तो तुरंत शार्टकट ढूंढ लेते हैं। तो कुछ आदतें जो सबकी बिगड़ी हैं, मेरी भी बिगड़ी है। चलिए दोस्तों, मुझे बहुत अच्छा लगा आप सबसे बात करने के लिए और मैं आपके माध्यम से एनसीसी के सभी कैडेट्स को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। बहुत-बहुत धन्यवाद दोस्तों, थैंक यू!
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अमर उजाला से बातचीत में अखिल ने बताया कि पीएम मोदी से बात करना गौरव की बात है। कार्यक्रम में पीएम से बात होने पर मुझ से ज्यादा मेरी मां खुश है। अखिल ने बताया कि उसने अपने ताऊ धर्म सिंह के पास रहकर दिल्ली के केंद्रीय विद्यालय से शिक्षा ग्रहण की है। वह इस समय दिल्ली के दयाल सिंह कालेज से फिजिक्स ऑनर्स कर रहे हैं। उसके पिता भगत सिंह खेतीबाड़ी के साथ ड्राइविंग करते हैं। अखिल सेना में अधिकारी बनकर देश की सेवा करना चाहते हैं। उसके परिवार में दादा चांद सिंह, पिता भगत सिंह, माता, छोटी बहन पुष्पांशी है।
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ये रही बातचीत........
अखिल : जय हिंद सर, मेरा नाम जूनियर अंडर ऑफिसर अखिल है।
प्रधानमंत्री : हां अखिल, बताइए।
अखिल : मैं रोहतक, हरियाणा का रहने वाला हूं, सर।
प्रधानमंत्री : हां...
अखिल : मैं दयाल सिंह कॉलेज, दिल्ली यूनिवर्सिटी से
फिजिक्स आनर्स कर रहा हूं।
प्रधानमंत्री : हां... हां...
अखिल : सर, मुझे एनसीसी में सबसे अच्छा अनुशासन लगा है सर।
प्रधानमंत्री : वाह...
अखिल : इसने मुझे और ज्यादा रिस्पांसिबल सिटीजन बनाया है सर। एनसीसी कैडेट्स की ड्रिल, यूनिफार्म मुझे बेहद पसंद है।
प्रधानमंत्री : कितने कैंप करने का मौका मिला, कहां - कहां जाने का मौका मिला ?
अखिल : सर, मैंने 3 कैंप किये हैं सर। मैं हाल ही में इंडियन मिलिट्री एकेडमी देहरादून में एटेचमेंट कैंप का हिस्सा रहा हूं।
प्रधानमंत्री : कितने समय का था?
अखिल : सर, ये 13 दिन का कैंप का था सर।
प्रधानमंत्री : अच्छा..
अखिल : सर, मैंने वहां पर भारतीय फौज में अफसर कैसे बनते हैं ,उसको बढ़े करीब से देखा है और उसके बाद मेरा भारतीय फौज में अफसर बनने का संकल्प और ज्यादा दृढ़ हुआ है सर।
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अखिल : और सर मैंने रिपब्लिक डे प्रेड में भी हिस्सा लिया था और वो मेरे लिए और मेरे परिवार के लिए बहुत ही गर्व की बात थी।
प्रधानमंत्री : शाबाश...
अखिल : मेरे से ज्यादा खुश मेरी माँ थी सर। जब हम सुबह 2 बजे उठ कर राजपथ पर प्रेक्टिस करने जाते थे तो जोश हम में इतना होता था कि वो देखने लायक था। बाकी आकस्मिक बल के लोग जो हमें इतना प्रोत्साहित करते थे, राजपथ पर मार्च करते वक्त हमारे रोंगटे खड़े हो गए थे सर ।
प्रधानमंत्री : चलिए आप चारों से बात करने का मौका मिला और वो भी एनसीसी डे पर। मेरे लिये बहुत खुशी की बात है।
दूसरी बार अखिल की बातचीत
अखिल : प्रधानमंत्री जी...
प्रधानमंत्री : जी...
अखिल : आप दिन में इतने व्यस्त रहते हो तो मेरी ये जिज्ञासा थी जानने की कि आपको टी.वी. देखने का, फिल्म देखने का या किताब पढ़ने का समय मिलता है ?
प्रधानमंत्री : वैसे मेरी किताब पढ़ने की रुचि तो रहती थी। फिल्म देखने की कभी रुचि भी नहीं रही, उसमें समय का बंधन तो नहीं है और न ही उस प्रकार से टी.वी. देख पाता हूं। बहुत कम। कभी-कभी पहले डिस्कवरी चैनल देखा करता था, जिज्ञासा के कारण। और किताबें पढ़ता था लेकिन इन दिनों तो पढ़ नहीं पाता हूं और दूसरा गूगल के कारण भी आदतें खराब हो गई हैं क्योंकि अगर किसी रेफरेंस को देखना है तो तुरंत शार्टकट ढूंढ लेते हैं। तो कुछ आदतें जो सबकी बिगड़ी हैं, मेरी भी बिगड़ी है। चलिए दोस्तों, मुझे बहुत अच्छा लगा आप सबसे बात करने के लिए और मैं आपके माध्यम से एनसीसी के सभी कैडेट्स को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। बहुत-बहुत धन्यवाद दोस्तों, थैंक यू!