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संशोधित: प्रेम हर व्याधि का इलाज और सत्संग प्रेम का उद्गम : कंवर साहेब
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04सीटीके04..अमृतवर्षा करते सतगुरु कंवर साहेब।संवाद
रोहतक। दुनिया की तमाम वस्तुएं प्राप्त की जा सकती हैं। वह बार-बार प्राप्त हो सकती हैं, लेकिन इस जगत में पूर्ण संत का सत्संग मिलना दुर्लभ है। सत्संग जहां मिले उसे आत्मसात किजिए। यह सत्संग वचन परम संत सतगुरु हुजूर कंवर साहेब ने अपने वार्षिक सत्संग में कहे। बुधवार को सतगुरु कंवर साहेब के आशीर्वचन सुनने के लिए हजारों की संख्या में गोहाना रोड पर स्थित राधास्वामी दिनोद शाखा आश्रम में अनुयायी पहुंचे। इसके बाद मौन धारण कर सतगुरु के वचनों के एकाग्रचित्त होकर सुना।
सतगुरु ने कहा कि यह दुनिया काल के शासन में चल रही है। काल ने जीव के मन को अपना गुलाम बनाया हुआ है। मन को भांति-भांति के लोभ लालच में फंसाकर इंसान को अंधेरे गहरे कुएं में धकेल रहा है। गुरु महाराज ने कहा कि संत समागम का प्रसाद भी किसी भाग्यशाली को ही मिलता है, क्योंकि उस प्रसाद में प्रेम मिला होता है। प्रेम हर व्याधि का इलाज है और सत्संग प्रेम का उद्गम है। अगर यह प्रेम परमात्मा से हो जाए तो कहना ही क्या। सत्संग परमात्मा का गुणगान है।
सतगुरु ने कहा कि अपने मन को समझाओं, क्योंकि हर भाव का जनक मन ही है। जीव चार तरीके से जन्म लेता है। अंडा, झिल्ली, पानी और मिट्टी से। इन चार खान के जीवों में मनुष्य श्रेष्ठ है, क्योंकि परमात्मा ने इसे विलक्षण बुद्धि दी है और यही बुद्धि मन को समझाती है। अगर इसको बार बार नहीं समझाया जाएगा तो यह आपकाे भटका देगा। मन इन चौरासी लाख घाटियों में आपकी ज्ञान और कर्म की इंद्रियों को भटकाता है। इस भटकाव को केवल संत सतगुरु ही मिटाता है। इसलिए सारे काम छोड़ कर संत सतगुरु की खोज करो।
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हुजूर कंवर साहेब ने कहा कि सदैव परमात्मा की रजा में रहो और बार-बार उनका शुकराना करो। कोई कंगाली में पैदा होता है तो कोई सोने के पालने में झूलता है। गंगा नहाने से शरीर धुलेगा। पाप धोने के लिए गंगा का संकल्प लेकर सत्कर्म करने होंगे। ऐसे ही सत्संगों में जाने से मन का विकार नहीं जा सकता है। विकार मिटाने के लिए गुरु के बताए नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा। यह दुनिया भ्रम से अटी पड़ी है। भ्रम के बंधन से छुटकारा पाने के सत्संग वचन सुनें।
परमात्मा कभी अपने भक्तों से जुदा नहीं होता। पल-पल संतों के सत्संग वचनों का चिंतन करते रहो। माया के फंदे से गुरु की परिधि में रहकर ही बचाव संभव है। सदैव सतर्क रहो। हर पल गुरु की शरण में रहो। नित प्रति अभ्यास करो। मां बाप की सेवा करो। बड़े बुजुर्गों की इज्जत और सम्मान करो। परहित, परोपकार करो। भूखे गरीब की मदद करो। स्वयं अच्छे बनो समाज भी अच्छा बन जाएगा। सत्संग से पहले भंडारा लगाया गया। जहां हजारों की संख्या में अनुयायियों ने लंगर ग्रहण किया। इसके बाद एक बजे सत्संग शुरू हुआ।
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सतगुरु ने कहा कि यह दुनिया काल के शासन में चल रही है। काल ने जीव के मन को अपना गुलाम बनाया हुआ है। मन को भांति-भांति के लोभ लालच में फंसाकर इंसान को अंधेरे गहरे कुएं में धकेल रहा है। गुरु महाराज ने कहा कि संत समागम का प्रसाद भी किसी भाग्यशाली को ही मिलता है, क्योंकि उस प्रसाद में प्रेम मिला होता है। प्रेम हर व्याधि का इलाज है और सत्संग प्रेम का उद्गम है। अगर यह प्रेम परमात्मा से हो जाए तो कहना ही क्या। सत्संग परमात्मा का गुणगान है।
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सतगुरु ने कहा कि अपने मन को समझाओं, क्योंकि हर भाव का जनक मन ही है। जीव चार तरीके से जन्म लेता है। अंडा, झिल्ली, पानी और मिट्टी से। इन चार खान के जीवों में मनुष्य श्रेष्ठ है, क्योंकि परमात्मा ने इसे विलक्षण बुद्धि दी है और यही बुद्धि मन को समझाती है। अगर इसको बार बार नहीं समझाया जाएगा तो यह आपकाे भटका देगा। मन इन चौरासी लाख घाटियों में आपकी ज्ञान और कर्म की इंद्रियों को भटकाता है। इस भटकाव को केवल संत सतगुरु ही मिटाता है। इसलिए सारे काम छोड़ कर संत सतगुरु की खोज करो।
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हुजूर कंवर साहेब ने कहा कि सदैव परमात्मा की रजा में रहो और बार-बार उनका शुकराना करो। कोई कंगाली में पैदा होता है तो कोई सोने के पालने में झूलता है। गंगा नहाने से शरीर धुलेगा। पाप धोने के लिए गंगा का संकल्प लेकर सत्कर्म करने होंगे। ऐसे ही सत्संगों में जाने से मन का विकार नहीं जा सकता है। विकार मिटाने के लिए गुरु के बताए नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा। यह दुनिया भ्रम से अटी पड़ी है। भ्रम के बंधन से छुटकारा पाने के सत्संग वचन सुनें।
परमात्मा कभी अपने भक्तों से जुदा नहीं होता। पल-पल संतों के सत्संग वचनों का चिंतन करते रहो। माया के फंदे से गुरु की परिधि में रहकर ही बचाव संभव है। सदैव सतर्क रहो। हर पल गुरु की शरण में रहो। नित प्रति अभ्यास करो। मां बाप की सेवा करो। बड़े बुजुर्गों की इज्जत और सम्मान करो। परहित, परोपकार करो। भूखे गरीब की मदद करो। स्वयं अच्छे बनो समाज भी अच्छा बन जाएगा। सत्संग से पहले भंडारा लगाया गया। जहां हजारों की संख्या में अनुयायियों ने लंगर ग्रहण किया। इसके बाद एक बजे सत्संग शुरू हुआ।

04सीटीके04..अमृतवर्षा करते सतगुरु कंवर साहेब।संवाद