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Rohtak News: बॉस की बेटी से प्यार कर खोया मानसिक संतुलन
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27सीटीके38...हरियाणा इंस्टिट्यूट ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स रोहतक की ओर से दिल्ली के राजेंद्र नगर में
रोहतक। हरियाणा इंस्टिट्यूट ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स रोहतक के सौजन्य से दिल्ली के 10वें भव्य नाट्य उत्सव में विश्व दीपक त्रिखा की ओर से निर्देशित और डॉ. सुरेंद्र शर्मा अभिनीत एकल नाटक दयाशंकर की डायरी का मंचन किया गया। नादिरा जहीर बब्बर की ओर से लिखा गया इस विख्यात नाटक में एक नाकाम अभिनेता की कहानी के माध्यम से महानगरीय जीवन की त्रासदी को प्रस्तुत किया गया, इसे दर्शकों की भरपूर सराहना मिली। नाटक का मंचन राजेंद्र नगर दिल्ली के स्टूडियो में किया गया।
नाटक दयाशंकर की डायरी एक ऐसे युवा अभिनेता की कहानी है, जो एक्टर बनने मुंबई आता है। लेकिन, मजबूरीवश एक ऑफिस में क्लर्क की नौकरी करने लगता है। थोड़ी सी पगार में घरवालों की जरूरतों को पूरा करते रहने के कारण वह हमेशा तंगहाली में रहता है। दफ्तर के माहौल से दुखी दयाशंकर को इसी बीच अपने बॉस की खूबसूरत बेटी से एकतरफा प्यार हो जाता है। वह उससे शादी करने के सपने देखने लगता है, जबकि लड़की अपने पिता के धनवान दोस्त के बेटे से शादी कर लेती है। इससे दयाशंकर टूट जाता है और उसका मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है। असफलता से भरे जीवन में आर्थिक तंगी और टूटते सपनों की इसी त्रासदी के साथ नाटक का दुखद अंत होता है।
नाटक में संगीत संचालन और प्रकाश व्यवस्था की जिम्मेदारी जगदीप जुगनू ने संभाली। प्रोडक्शन का जिम्मा अविनाश सैनी ने निभाया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि समाजसेवी और आकाशवाणी के एडिटर व उद्घोषक रवि कपूर रहे। इस अवसर पर दिल्ली के विख्यात रंगकर्मी सुरेंद्र सागर, प्रमोद वाजपेयी, संजय अमन पोपली, मंजीत सिंह, सुभाष नगाड़ा उपस्थित रहे।
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नाटक दयाशंकर की डायरी एक ऐसे युवा अभिनेता की कहानी है, जो एक्टर बनने मुंबई आता है। लेकिन, मजबूरीवश एक ऑफिस में क्लर्क की नौकरी करने लगता है। थोड़ी सी पगार में घरवालों की जरूरतों को पूरा करते रहने के कारण वह हमेशा तंगहाली में रहता है। दफ्तर के माहौल से दुखी दयाशंकर को इसी बीच अपने बॉस की खूबसूरत बेटी से एकतरफा प्यार हो जाता है। वह उससे शादी करने के सपने देखने लगता है, जबकि लड़की अपने पिता के धनवान दोस्त के बेटे से शादी कर लेती है। इससे दयाशंकर टूट जाता है और उसका मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है। असफलता से भरे जीवन में आर्थिक तंगी और टूटते सपनों की इसी त्रासदी के साथ नाटक का दुखद अंत होता है।
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नाटक में संगीत संचालन और प्रकाश व्यवस्था की जिम्मेदारी जगदीप जुगनू ने संभाली। प्रोडक्शन का जिम्मा अविनाश सैनी ने निभाया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि समाजसेवी और आकाशवाणी के एडिटर व उद्घोषक रवि कपूर रहे। इस अवसर पर दिल्ली के विख्यात रंगकर्मी सुरेंद्र सागर, प्रमोद वाजपेयी, संजय अमन पोपली, मंजीत सिंह, सुभाष नगाड़ा उपस्थित रहे।
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