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बेटी की गला घोंट कर हत्या करने के दोषी माता-पिता व भाई को उम्रकैद

Fri, 04 Nov 2022 01:42 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 04 Nov 2022 01:42 AM IST
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Life imprisonment to parents and brother guilty of strangling their daughter
रोहतक। जिले के एक गांव में चार साल पहले की गई बेटी की हत्या के केस में अदालत ने माता-पिता व भाई को उम्रकैद व 47-47 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न भरने पर करीब डेढ़-डेढ़ साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी। खास बात यह है कि वारदात के समय भाई की उम्र 17 साल के करीब थी, लेकिन अब वह बालिग हो चुका है। तीनों दोषियों को कोर्ट ने बराबर सजा सुनाई है।
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पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक सितंबर 2018 में सूचना मिली कि जिले के एक गांव में युवती की मौत हो गई है, उसका जल्दबाजी में परिजनों ने अंतिम संस्कार किया गया है। चिता श्मशान में जल रही है। पुलिस तत्काल गांव में पहुंची, जहां श्मशान में जल रही चिता को फायर ब्रिगेड को बुलाकर बुझवाया। युवती के शव को बाहर निकाला गया। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी करवाई गई। साथ ही एफएसएल की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच पड़ताल की। इसके बाद पुलिस ने हत्या व सबूत मिटाने का मामला दर्ज कर जांच करते हुए युवती के माता-पिता को गिरफ्तार कर लिया।
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पूछताछ में आरोपी पिता ने पुलिस को बताया कि वारदात से पहले बेटी ने दूध में कुछ मिला दिया था, जिससे उसे व उसके बेटे को चक्कर आने लगे थे। पूछने पर बेटी ने बताया कि उसने दूध में नींद की गोलियां मिलाई थी। इस बात को लेकर बेटी व बेटे के बीच झगड़ा भी हुआ था। इसी दौरान बेटी ने कुछ खा लिया। इसके बाद बेटे ने बेटी के हाथ व पैर पकड़ लिए, जबकि उसने परने से गला घोंट दिया। सूचना पाकर बेटी की मां भी आ गई। उसने कहा कि यह ठीक किया, नहीं तो यह सभी को कुछ खिलाकर मार देती। थोड़ी देर बाद बेटी की मौत हो गई। सुबह परिवार वालों को बता दिया कि रात को बेटी ने उल्टी व सीने में दर्द की शिकायत की थी। इसके बाद उसका अंतिम संस्कार कर दिया। पुलिस ने युवती के माता-पिता को गिरफ्तार कर लिया था, जबकि बेटे को बाल सुधार भेजा गया था। क्योंकि उस समय आरोपी की उम्र 18 साल से कम थी। तभी से जिला अदालत में केस की सुनवाई चल रही थी। चार साल चली सुनवाई के बाद अदालत ने माता-पिता व भाई को दोषी मानते हुए सजा सुनाई है।
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तीनों को उम्रकैद की सजा, 47-47 हजार रुपये जुर्माना भी भरना होगा
अदालत ने तीनों दोषियों को आईपीसी की धारा 302 के तहत उम्रकैद व 20-20 हजार रुपये जुर्माना, जुर्माना न देने पर एक-एक साल की अतिरिक्त सजा, जबकि सबूत मिटाने की धारा 201 के तहत सात-सात साल की कैद व 5-5 हजार रुपये जुर्माना, जुर्माना न देने पर छह-छह माह की अतिरिक्त सजा सुनाई गई है। इसके अलावा धारा 203 के तहत 2-2 साल कैद व दो-दो हजार रुपये जुर्माना, जुर्माना न भरने पर एक-एक माह की अतिरिक्त सजा और साजिश में शामिल होने की धारा 120बी, 34 के तहत उम्रकैद व 20-20 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी है।
हत्या के समय नाबालिग था भाई, बालिग मानकर सुनाई गई सजा
मामले में युवती के माता-पिता के अलावा उसके भाई को भी उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। वारदात सितंबर 2018 में हुई थी, उस समय मृतका के भाई की उम्र 17 साल के करीब थी। उसे बाल सुधार गृह भेजा गया था। उसके खिलाफ प्रिंसिपल कोर्ट में केस चला। फैसले के समय अब वह बालिग हो चुका है। अदालत ने माता-पिता के साथ उसे भी उम्रकैद की सजा दी है।

निर्भया कांड के बाद हुआ था कानून में संशोधन
जिला अदालत के वरिष्ठ वकील एडवोकेट दीपक भारद्वाज ने बताया कि दिल्ली में हुए निर्भया हत्याकांड के बाद कानून में संशोधन हुआ था। तय हुआ था कि अगर वारदात के समय नाबालिग की उम्र 16 साल से ऊपर है तो वह अच्छा व बुरा समझने की समझ रखता है। उसे बालिग मानकर केस चलाया जा सकता है।
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