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Rohtak News: हर वर्ष महंगा हो रहा ज्ञान, जिम्मेदार बने अनजान

Sat, 06 Apr 2024 03:10 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 06 Apr 2024 03:10 AM IST
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Knowledge is becoming expensive every year, unknown people become responsible
रोहतक।
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नए शैक्षणिक सत्र में निजी स्कूल संचालकों की मनमानी अभिभावकों की जेब पर भारी पड़ रही है। प्राथमिक कक्षाओं की किताबें ही दो से तीन हजार रुपये में बिक रही हैं जबकि छठी से आठवीं के लिए चार हजार से 4500 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। इनमें राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के बजाय निजी प्रकाशकों की किताबें अधिक हैं। यही नहीं, काॅपियां स्कूलों में अलग से एक हजार से 1500 रुपये में दी जा रही हैं। इन पर भी स्कूलों की मुहर लगी होती है।
अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों में पिछले साल से करीब 500 से 1500 रुपये अधिक फीस वसूली जा रही है। नर्सरी कक्षा में ही बच्चों के प्रवेश के लिए 12 हजार रुपये प्रवेश शुल्क रखा गया है। इसके अलावा अन्य शुल्क मिलाकर करीब 15 हजार रुपये चुकाने पर बच्चे का दाखिला हुआ है। दो हजार रुपये की किताबें और एक हजार रुपये की कापियां मिलीं। कक्षा तीसरी के लिए तीन हजार रुपये के किताबें खरीदनी पड़ी। काॅपियां स्कूल ने 1200 रुपये में दीं। डायरी भी 200 से 500 रुपये में अलग से दी जा रही है। स्कूलों में न तो शिक्षकों का वेतन बढ़ा है न दूसरे खर्चे। इसके बावजूद अभिभावकों की जेब पर डाका डाला जा रहा है। ज्यादातर स्कूलों ने अपनी एक निश्चित दुकान तय की है। वहीं से किताबें बच्चों को लेनी पड़ रही हैं। कमीशन के खेल में कुछ स्कूलों के अंदर ही पुस्तकें और कॉपियां उपलब्ध कराई जा रही हैं। विभाग सब जानकार भी अनजान है।
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बिन मॉनिटरिंग कमेटी कैसे रुके मनमानी
निजी स्कूलों की मनमानी व ठगी पर अंकुश लगाना शिक्षा विभाग के लिए फिलहाल नामुमकिन नजर आ रहा है। इसकी बड़ी वजह अब तक मॉनिटरिंग कमेटी का नहीं बनना है। यह कमेटी नहीं बनने से स्कूल संचालक बेखौफ अभिभावकों को लूट रहे हैं।
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अपने बच्चे का दूसरी कक्षा में दाखिला कराया है। 3400 रुपये में पुस्तकें खरीदीं। बिल करीब 41 सौ रुपये का बना था। दूसरी कक्षा के विद्यार्थियों की फीस और किताबें ही इतनी महंगी हैं कि घर का बजट बिगड़ गया है।
तृप्ति, अभिभावक।

नए सत्र में बच्चे को नौवीं कक्षा में प्रवेश दिलाया है। हजारों रुपये फीस भरने के बाद करीब 45 सौ रुपये की किताबें खरीदी हैं। काॅपियों के लिए स्कूल में करीब 15 सौ रुपये जमा कराने हैं। डायरी अलग से लेनी है।

अमित, अभिभावक।



स्कूल दस प्रतिशत तकफीस बढ़ा सकते हैं। शिक्षक की फीस बढ़ाने या खर्च बढ़ने पर फीस बढाई जा सकती है। मॉनिटरिंग कमेटी जल्द बनाई जाएगी। फीस संबंधी कोई शिकायत मिलती है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।
मंजीत मलिक, जिला शिक्षा अधिकारी।
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