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Rohtak News: चंडीगढ़ की काव्या बोल नहीं पाती, दौड़ में पदक जीतकर देती हैं जवाब

Thu, 05 Feb 2026 03:14 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक Updated Thu, 05 Feb 2026 03:14 AM IST
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Kavya from Chandigarh, who can't speak, responds by winning a medal in a race.
5-वंदना, चंडीगढ़।
रतन चंदेल
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रोहतक। स्पेशल ओलंपिक्स भारत राष्ट्रीय एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भाग ले रहे स्पेशल बच्चों का खेल स्पर्धाओं में प्रदर्शन भी खास है। चंडीगढ़ की दिव्यांग एथलीट काव्या भी बेहतरीन प्रदर्शन कर रही हैं। कोच खुशी ने बताया कि खिलाड़ी काव्या बोल नहीं पाती हैं लेकिन दौड़ प्रतियोगिता में उनके कदम किसी से पीछे नहीं रहते हैं और वे अक्सर शीर्ष तीन खिलाड़ियों में शामिल होने का प्रयास करती हैं।
कोच खुशी ने बताया कि काव्या को खेलना अच्छा लगता है। जब कभी उनको गुस्सा आ जाए तो वह दौड़ लगाती हैं और 400 व 800 मीटर दौड़ में हर बार बेहतर प्रदर्शन करने की सोचती हैं।
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चैंपियनशिप में प्रतिभाग करने वाले पंजाब के गुरतेज व सागर और चंडीगढ़ की वंदना व काव्या की रफ्तार के सब मुरीद हैं। खेल के प्रति इनके समर्पण और प्रतिभा को देख आम दर्शक भी दंग रह जाते हैं।
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महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) में आयोजित स्पेशल ओलंपिक्स भारत राष्ट्रीय एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 26 राज्यों से 500 से अधिक खिलाड़ी, उनके कोच और सहयोगी भाग ले रहे हैं। चैंपियनशिप को लेकर इन खिलाड़ियों में गजब का उत्साह है। संवाद
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एथलीट वंदना : कोरोना में वंदना के माता-पिता का निधन, कई पदक जीत चुकीं
चंडीगढ़ की दिव्यांग एथलीट वंदना बताती हैं कि वर्ष 2020 में कोरोना के समय उनकी मां ऊषा व पिता बबलू का आकस्मिक निधन होने से उन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उनको नारी निकेतन भेजा गया। उन्होंने वहां खेलों की तरफ रुख किया और कई पदक जीते हैं। वे 200 व 400 मीटर मुकाबले में सरपट दौड़ लगाती हैं। बैडमिंटन की भी नेशनल खिलाड़ी हैं। वे कहती हैं कि खेल उनके जीवन का हिस्सा बन गए हैं।
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शॉटपुट व 200 मीटर दौड़ में चार बार गोल्ड जीत चुके पंजाब के सागर
पंजाब के होशियारपुर निवासी स्पेशल एथलीट सागर का कहना है कि उनके पिता रामलाल चाय का ठेला लगाते हैं जबकि मां रूपरानी गृहिणी हैं। सात साल पहले आत्मसुख स्पेशल स्कूल होशियारपुर में उनका दाखिला हुआ था। यहीं से उन्होंने खेलों की ओर कदम बढ़ाए। वह अब शॉटपुट व 200 मीटर दौड़ में चार बार गोल्ड जीत चुके हैं। फुटबाॅल में भी नेशनल स्तर के खिलाड़ी हैं और पिछले साल कोलकाता में रजत पदक जीत चुके हैं।

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चार साल से गुरतेज जीत रहे गोल्ड
पंजाब के तरनतारण निवासी गुरतेज बचपन से बोल नहीं सकते। मां राजकौर के अलावा उनकी बड़ी बहन भी दिव्यांग हैं। कोरोना के समय 2020 में पिता हीरा सिंह का निधन हो गया। इसके बाद समर्पण स्पेशल स्कूल में उनका दाखिला हुआ। कोच अनमप्रीत काैर, मनदीप सिंह व विजय शर्मा ने बताया कि गुरतेज चार साल से स्टेट में शॉटपुट व 200 मीटर दौड़ में गोल्ड मेडल जीत रहे हैं। 2024 में जूडो में भी उन्होंने गोल्ड जीता है। स्पेशल खिलाड़ियों में गजब की प्रतिभा है।

5-वंदना, चंडीगढ़।

5-वंदना, चंडीगढ़।

5-वंदना, चंडीगढ़।

5-वंदना, चंडीगढ़।

5-वंदना, चंडीगढ़।

5-वंदना, चंडीगढ़।

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