{"_id":"646fb98f7cd4a0807f0f34f6","slug":"jinds-land-gave-strength-to-another-movement-rohtak-news-c-199-1-sroh1007-347-2023-05-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rohtak News: जींद की जमीन ने एक और आंदोलन को दी ताकत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rohtak News: जींद की जमीन ने एक और आंदोलन को दी ताकत
Fri, 26 May 2023 01:09 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Fri, 26 May 2023 01:09 AM IST
विज्ञापन
25जेएनडी36 : खटकड़ टोल प्लाजा पर हुई महापंचायत में भाग लेती महिलाएं व पुरुष। संवाद
सतीश जागलान
जींद। प्रदेश में जब भी कोई बड़ा आंदोलन हुआ है, उसका सीधा संबंध जींद से जरूर रहा है। जींद में खापों के समर्थन के बाद आंदोलन मजबूत हुए हैं। इसके बाद यह आंदोलन सफल भी हुए हैं। अब दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे पहलवानों के आंदोलन को जींद की खापों का समर्थन मिल गया है। इसके भविष्य में क्या परिणाम होंगे, इसका तो पता नहीं, लेकिन जिन आंदोलनों को जींद का समर्थन मिला है, वह सफल हुए हैं। किसी भी आंदोलन में जींद की खाप पंचायतें बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती हैं।
अगस्त 2020 में किसान आंदोलन पंजाब से शुरू हुआ था। इसके बाद यह एक साल तक दिल्ली में चला। किसान आंदोलन जब टूटने की कगार पर पहुंच गया था तो 28 जनवरी 2021 को रात को जब राकेश टिकैत के आंसू निकले तो जींद से काफी संख्या में किसान रात को ही दिल्ली पहुंच गए थे। इसके बाद इस आंदोलन ने तेजी पकड़ी। इसके बाद तीन फरवरी को कंडेला गांव में एक महापंचायत हुई, जिसमें राकेश टिकैत पहुंचे थे। इसके बाद ही इस आंदोलन को समर्थन मिलता चला गया।
इसी प्रकार 2002 में प्रदेश में बिजली बिलों की माफी के लिए आंदोलन हुआ था। इसका भी केंद्र बिंदु जींद जिला ही रहा था। 2002 में हुए इस आंदोलन में कंडेला गांव में नौ लाेगों की पुलिस की गोली लगने से मौत हुई थी। इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला ने बिजली बिल माफी की योजना बनाई थी। (संवाद)
विज्ञापन
2016 में जींद से ही मिला था जाट आरक्षण आंदोलन को समर्थन
वर्ष 2016 में प्रदेश में हुए जाट आरक्षण आंदोलन को जींद से ही सबसे ज्यादा समर्थन मिला था। यहां ईक्कस गांव के पास लगभग तीन महीने तक प्रदेशभर के लोग जाट आरक्षण की मांग को लेकर धरने पर बैठे रहे थे। इसके बाद तत्कालीन अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने दिल्ली कूच की घोषणा की थी। इसके बाद ही सरकार ने समिति से बातचीत की और सभी मांगें पूरी करने का आश्वासन दिया था।
विज्ञापन
जींद। प्रदेश में जब भी कोई बड़ा आंदोलन हुआ है, उसका सीधा संबंध जींद से जरूर रहा है। जींद में खापों के समर्थन के बाद आंदोलन मजबूत हुए हैं। इसके बाद यह आंदोलन सफल भी हुए हैं। अब दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे पहलवानों के आंदोलन को जींद की खापों का समर्थन मिल गया है। इसके भविष्य में क्या परिणाम होंगे, इसका तो पता नहीं, लेकिन जिन आंदोलनों को जींद का समर्थन मिला है, वह सफल हुए हैं। किसी भी आंदोलन में जींद की खाप पंचायतें बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती हैं।
अगस्त 2020 में किसान आंदोलन पंजाब से शुरू हुआ था। इसके बाद यह एक साल तक दिल्ली में चला। किसान आंदोलन जब टूटने की कगार पर पहुंच गया था तो 28 जनवरी 2021 को रात को जब राकेश टिकैत के आंसू निकले तो जींद से काफी संख्या में किसान रात को ही दिल्ली पहुंच गए थे। इसके बाद इस आंदोलन ने तेजी पकड़ी। इसके बाद तीन फरवरी को कंडेला गांव में एक महापंचायत हुई, जिसमें राकेश टिकैत पहुंचे थे। इसके बाद ही इस आंदोलन को समर्थन मिलता चला गया।
विज्ञापन
इसी प्रकार 2002 में प्रदेश में बिजली बिलों की माफी के लिए आंदोलन हुआ था। इसका भी केंद्र बिंदु जींद जिला ही रहा था। 2002 में हुए इस आंदोलन में कंडेला गांव में नौ लाेगों की पुलिस की गोली लगने से मौत हुई थी। इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला ने बिजली बिल माफी की योजना बनाई थी। (संवाद)
विज्ञापन
2016 में जींद से ही मिला था जाट आरक्षण आंदोलन को समर्थन
वर्ष 2016 में प्रदेश में हुए जाट आरक्षण आंदोलन को जींद से ही सबसे ज्यादा समर्थन मिला था। यहां ईक्कस गांव के पास लगभग तीन महीने तक प्रदेशभर के लोग जाट आरक्षण की मांग को लेकर धरने पर बैठे रहे थे। इसके बाद तत्कालीन अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने दिल्ली कूच की घोषणा की थी। इसके बाद ही सरकार ने समिति से बातचीत की और सभी मांगें पूरी करने का आश्वासन दिया था।