जाट आरक्षण आंदोलन : रसोई हुई खाली, न नाश्ता, न खाने का राशन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जाट आरक्षण आंदोलन ने हर किसी की समस्या को बढ़ा दिया है। यह समस्या केवल सड़क पर ही नहीं है, बल्कि घर के अंदर रसोई तक पहुंच गई है। पांच दिन से चक्का जाम होने के कारण रसोई खाली हो गई, जहां न नाश्ते का सामान बचा है और न खाने का राशन। शहर के अंदर भी सड़क जाम होने से बाजार तक लोग नहीं पहुंच रहे हैं। कई घरों में रसोई गैस खत्म हो चुकी है और सिलेंडर नहीं मिलने से आफत आ गई है।
आरक्षण की मांग को लेकर पिछले पांच दिनों से जाट आंदोलन कर रहे हैं। अब शहर के अंदर भी सभी रास्ते जाम हैं। जिससे हर किसी की परेशानी बढ़ गई है। लोग घरों से बाहर सड़कों पर नहीं चल पा रहे हैं तो घर के अंदर भी समस्या कम नहीं है। सभी रास्ते जाम होने के कारण दैनिक सामान बाजार तक नहीं पहुंच रहा है। दूध, ब्रेड और मक्खन बाजार से खत्म हो चुके हैं और लोगों के लिए नाश्ता नहीं बचा है। वहीं, लोगों के घरों में खाना बनाने के लिए राशन खत्म हो गया है।
दाल, आटा, तेल और मसाले खत्म हो चुके हैं। यह सामान लेने के लिए लोग घर से बाहर मुख्य बाजार तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। इन बाधाओं को पार करके यदि कोई पैदल ही बाजार में पहुंचता है तो वहां सामान नहीं मिल पा रहा है। इससे लोगों की समस्या काफी बढ़ गई है। पुरानी अनाज मंडी के सचिव राजेंद्र बंसल कहते हैं कि रिटेल मार्केट के व्यापारी भी मंडी में सामान लेने के लिए नहीं पहुंच सकते। अब कुछ सामान ही बचा है, लेकिन रास्ते में कई जगह जाम होने के कारण खरीदार नहीं आ रहे हैं।
शहर में पेट्रोल नहीं मिलेगा, गैस सिलेंडर की किल्लत
पेट्रोल पंप एसोसिएशन के प्रधान राजेंद्र चौधरी ने बताया कि अब शहर में किसी पंप पर तेल नहीं मिलेगा। इसके लिए प्रशासन ने सख्ती से मनाही की है। अगले आदेश आने तक सभी पेट्रोल पंप अब बंद रहेंगे। वहीं, आम लोगों के घरों में गैस सिलेंडर खत्म होने से समस्या बढ़ गई है। गैस सिलेंडर की गाड़ियां नहीं आ रही हैं।
रोडवेज की बसों के पहिये रुके
जाट आरक्षण के चलते बृहस्पतिवार को भी हरियाणा रोडवेज की बसें डिपो से बाहर नहीं निकल पाईं। लगातार दूसरे दिन भी रोडवेज को 15 लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। इससे यात्रियों को बड़ी परेशानी हो रही है और बस डिपो पर काफी लोग रुके हुए हैं।
पीजीआई में हाई अलर्ट, सिक्योरिटी भी बढ़ाई
पीजीआई के आपात विभाग में हाई अलर्ट घोषित किया गया है। आंदोलन के चलते दिन की ओपीडी दस हजार से घटकर महज 1500 में सिमट गई है। बृहस्पतिवार को पीजीआई प्रशासन ने एक यूनिट के साथ तीन अन्य यूनिट को आपात स्थिति में तैयार रहने के निर्देश दिए हैं।
एक यूनिट में सीनियर डॉक्टर से लेकर जूनियर डॉक्टर तक शामिल होते हैं। वहीं, प्रशासन ने बताया कि जाम के चलते उनका दस फीसदी स्टाफ संस्थान से बाहर है। लेकिन कोई समस्या नहीं है, वे हर स्थिति से निपटने को तैयार हैं। वहीं, पीजीआई में सिक्योरिटी भी बढ़ा दी गई है, जिससे वहां किसी तरह की कोई घटना नहीं हो सके।
शहर में दवा उपलब्ध
शहर में दवा विक्रेता पाल मेडिकल स्टोर संचालक ने बताया कि हमारे पास करीब 10 दिन की दवाओं का स्टाक होता है। यदि किसी को कोई स्पेशल दवा चाहिए तो समस्या हो सकती है। फिलहाल शहर में दवाओं का कोई संकट नहीं है।