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बेईमान वोट न हो तो एसवाईएल और जाट आरक्षण का फैसला चुटकी में
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Thu, 10 Sep 2015 02:23 AM IST
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अंबाला से भाजपा सांसद रतन लाल कटारिया के बयान ने सियासी हलकों में हलचल बढ़ा दी है।
रोहतक पहुंचे कटारिया ने कहा कि अगर बेईमान वोट बीच में न हो तो एसवाईएल और जाट आरक्षण जैसे मुद्दों का फैसला चुटकियों में हो सकता है।
सांसद कटारिया बुधवार को यहां स्थित पार्टी के प्रदेश कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे थे। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि एसवाईएल के पानी पर हरियाणा का हक है और यह मिलना चाहिए। इसके लिए हम जोरों से आवाज उठाएंगे।
बहुत समय बीत चुका है और अब यह स्पष्ट होना चाहिए। प्रदेश में एसवाईएल का मुद्दा भी जाट आरक्षण की तरह उलझा हुआ है। इन दोनों मुद्दों में यदि ये बेईमान वोट न हों तो इससे भी बडे़-बडे़ फैसले चुटकी में हो सकते हैं।
हमारी बिरादरी में पढ़े लिखे लोगों की संख्या कम
सांसद ने पंचायत चुनाव में शिक्षित होने की शर्त को सराहनीय कदम बताया। कई भाजपाइयों की ओर से उठाई गई आपत्ति पर उन्होंने कहा कि मैं शुक्रगुजार हूं कि हम लोग जिस बिरादरी (राजनेता) में हैं, उसमें पढ़े-लिखे लोगों की संख्या कम है। इसके बावजूद हम इस निर्णय का स्वागत कर रहे हैं तो अन्य लोगों को भी इसका स्वागत करना चाहिए। लोकसभा और विधानसभा में न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता के सवाल पर सांसद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यदि इस पर विचार करने को कहेंगे तो यह यहां भी लागू होना चाहिए।
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रोहतक पहुंचे कटारिया ने कहा कि अगर बेईमान वोट बीच में न हो तो एसवाईएल और जाट आरक्षण जैसे मुद्दों का फैसला चुटकियों में हो सकता है।
सांसद कटारिया बुधवार को यहां स्थित पार्टी के प्रदेश कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे थे। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि एसवाईएल के पानी पर हरियाणा का हक है और यह मिलना चाहिए। इसके लिए हम जोरों से आवाज उठाएंगे।
बहुत समय बीत चुका है और अब यह स्पष्ट होना चाहिए। प्रदेश में एसवाईएल का मुद्दा भी जाट आरक्षण की तरह उलझा हुआ है। इन दोनों मुद्दों में यदि ये बेईमान वोट न हों तो इससे भी बडे़-बडे़ फैसले चुटकी में हो सकते हैं।
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हमारी बिरादरी में पढ़े लिखे लोगों की संख्या कम
सांसद ने पंचायत चुनाव में शिक्षित होने की शर्त को सराहनीय कदम बताया। कई भाजपाइयों की ओर से उठाई गई आपत्ति पर उन्होंने कहा कि मैं शुक्रगुजार हूं कि हम लोग जिस बिरादरी (राजनेता) में हैं, उसमें पढ़े-लिखे लोगों की संख्या कम है। इसके बावजूद हम इस निर्णय का स्वागत कर रहे हैं तो अन्य लोगों को भी इसका स्वागत करना चाहिए। लोकसभा और विधानसभा में न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता के सवाल पर सांसद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यदि इस पर विचार करने को कहेंगे तो यह यहां भी लागू होना चाहिए।
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