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Rohtak News: सोमवार देर रात हुआ जलाभिषेक, 60 फीट ऊंची शिव प्रतिमा बनी आकर्षण का केंद्र
Tue, 11 Aug 2026 02:58 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Tue, 11 Aug 2026 02:58 AM IST
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मन्दिर परिसर में मौजूद पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर व संस्था सेवक।
संवाद न्यूज एजेंसी
कलानौर। कलानौर-रोहतक-भिवानी मार्ग पर स्थित करीब 600 वर्ष पुराने प्राचीन सिद्ध शिव मंदिर में शिवरात्रि पर्व पर श्रद्धालुओं की चहल-पहल दिखी। सोमवार देर रात भगवान शिव का जलाभिषेक किया गया। मंदिर परिसर भोलेनाथ के जयघोष से गूंज उठा।
कांवड़ियों के पहुंचने का सिलसिला देर रात तक जारी रहा। मंदिर में उनके ठहरने, विश्राम, जलपान और चिकित्सा की व्यवस्था की गई है। यह मंदिर कलानौर के इतिहास की भी पहचान है।
पुराने समय में मंदिर करीब 4 कनाल 6 मरले क्षेत्र में था जो अब सवा एकड़ में फैला है। मंदिर के कुएं का पानी बेहद शीतल और मीठा बताया जाता था। इसकी प्राचीन गुंबद आज भी अपने पुराने स्वरूप की याद दिलाती है।
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मंदिर की मान्यताएं और आकर्षण
मंदिर संस्था के सेवक सतेंद्र पाल जुनेजा के अनुसार, यहां स्थापित शिवलिंग की धारा दक्षिण दिशा की ओर है। देश में ऐसे गिने-चुने मंदिर हैं जहां शिवलिंग की धारा दक्षिण दिशा में होती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, मुगल शासन में एक बाबा को जेल से अपने आप बाहर आने की मान्यता है। मंदिर परिसर में 60 फीट ऊंची शिव प्रतिमा और अष्टधातु से निर्मित सिद्ध शिव जी की प्रतिमा भी आकर्षण का केंद्र है। शिवरात्रि से पहले मनीष ग्रोवर और शकुंतला खटक ने भी मंदिर में दर्शन किए।
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कलानौर। कलानौर-रोहतक-भिवानी मार्ग पर स्थित करीब 600 वर्ष पुराने प्राचीन सिद्ध शिव मंदिर में शिवरात्रि पर्व पर श्रद्धालुओं की चहल-पहल दिखी। सोमवार देर रात भगवान शिव का जलाभिषेक किया गया। मंदिर परिसर भोलेनाथ के जयघोष से गूंज उठा।
कांवड़ियों के पहुंचने का सिलसिला देर रात तक जारी रहा। मंदिर में उनके ठहरने, विश्राम, जलपान और चिकित्सा की व्यवस्था की गई है। यह मंदिर कलानौर के इतिहास की भी पहचान है।
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पुराने समय में मंदिर करीब 4 कनाल 6 मरले क्षेत्र में था जो अब सवा एकड़ में फैला है। मंदिर के कुएं का पानी बेहद शीतल और मीठा बताया जाता था। इसकी प्राचीन गुंबद आज भी अपने पुराने स्वरूप की याद दिलाती है।
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मंदिर की मान्यताएं और आकर्षण
मंदिर संस्था के सेवक सतेंद्र पाल जुनेजा के अनुसार, यहां स्थापित शिवलिंग की धारा दक्षिण दिशा की ओर है। देश में ऐसे गिने-चुने मंदिर हैं जहां शिवलिंग की धारा दक्षिण दिशा में होती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, मुगल शासन में एक बाबा को जेल से अपने आप बाहर आने की मान्यता है। मंदिर परिसर में 60 फीट ऊंची शिव प्रतिमा और अष्टधातु से निर्मित सिद्ध शिव जी की प्रतिमा भी आकर्षण का केंद्र है। शिवरात्रि से पहले मनीष ग्रोवर और शकुंतला खटक ने भी मंदिर में दर्शन किए।

मन्दिर परिसर में मौजूद पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर व संस्था सेवक।