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रीढ़ के विकार का सही कारण जांचना जरूरी : डाॅ. रूप सिंह
Mon, 07 Apr 2025 12:55 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Mon, 07 Apr 2025 12:55 AM IST
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06सीटीके28-पीजीआईएमएस में आयोजित पीजी टीचिंग कोर्स के दौरान मौजूद पीजी चिकित्सक। स्रोत:पीजीआईएम
रोहतक। पीजीआईएमएस में लेक्चर थिएटर वन में चल रहे छठे पीजी टीचिंग कोर्स के अवसर पर रविवार को हड्डी रोग विभागाध्यक्ष डाॅ. रूप सिंह ने पीजी चिकित्सकों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि रीढ़ के विकार का सही कारण जांचना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि रीढ़ की हड्डी में विकार पोलियो, जन्म के समय ऑक्सीजन की कमी, किसी बीमारी से नर्व का दबना आदि कारणों से हो सकता है। उन्होंने बताया कि करीब दो दर्जन मरीज प्रतिभा विभाग की ओपीडी में ऐसे आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि बच्चे की रीढ़ की विकृति के लक्षण उनकी स्थिति के प्रकार, गंभीरता और प्रभावित क्षेत्र के आधार पर अलग-अलग होंगे। कुछ जन्मजात असामान्यताएं सौम्य हो सकती हैं और रीढ़ की हड्डी में कोई विकृति नहीं पैदा कर सकती है और उनका पता भी नहीं चल पाता है। डाॅ. रूप सिंह ने बताया कि जन्मजात रीढ़ की विकृति का पता जन्म के तुरंत बाद शारीरिक परीक्षण के दौरान लगाया जा सकता है। कुछ रीढ़ की विकृति बचपन में ही दिखाई देने लगती है। उन्होंने बताया कि जन्मजात रीढ़ की विकृति का कभी-कभी गर्भ में ही पता लगाया जा सकता है।
पीआरओ डाॅ. उमेश यादव ने बताया डाॅ. एसएस सांगवान, डाॅ. जिले सिंह कुंडू, डाॅ. आशीष व उन्होंने बोन ट्यूमर पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि हड्डियों में दर्द, हड्डी कमजोर होना, वजन कम होना, ज्यादा थकान, तेज बुखार और कमजोरी, हड्डियों में गांठ बनना आदि बोन ट्यूमर के लक्षण हो सकते हैं। इस अवसर पर डाॅ. मैथ्यू, डाॅ. सांगवान, डाॅ. आशीष देवगन, डाॅ. साहिल अरोड़ा, डाॅ. प्रदीप कंबोज व डाॅ. राज सिंह ने भी व्याख्यान दिया।
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उन्होंने कहा कि रीढ़ की हड्डी में विकार पोलियो, जन्म के समय ऑक्सीजन की कमी, किसी बीमारी से नर्व का दबना आदि कारणों से हो सकता है। उन्होंने बताया कि करीब दो दर्जन मरीज प्रतिभा विभाग की ओपीडी में ऐसे आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि बच्चे की रीढ़ की विकृति के लक्षण उनकी स्थिति के प्रकार, गंभीरता और प्रभावित क्षेत्र के आधार पर अलग-अलग होंगे। कुछ जन्मजात असामान्यताएं सौम्य हो सकती हैं और रीढ़ की हड्डी में कोई विकृति नहीं पैदा कर सकती है और उनका पता भी नहीं चल पाता है। डाॅ. रूप सिंह ने बताया कि जन्मजात रीढ़ की विकृति का पता जन्म के तुरंत बाद शारीरिक परीक्षण के दौरान लगाया जा सकता है। कुछ रीढ़ की विकृति बचपन में ही दिखाई देने लगती है। उन्होंने बताया कि जन्मजात रीढ़ की विकृति का कभी-कभी गर्भ में ही पता लगाया जा सकता है।
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पीआरओ डाॅ. उमेश यादव ने बताया डाॅ. एसएस सांगवान, डाॅ. जिले सिंह कुंडू, डाॅ. आशीष व उन्होंने बोन ट्यूमर पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि हड्डियों में दर्द, हड्डी कमजोर होना, वजन कम होना, ज्यादा थकान, तेज बुखार और कमजोरी, हड्डियों में गांठ बनना आदि बोन ट्यूमर के लक्षण हो सकते हैं। इस अवसर पर डाॅ. मैथ्यू, डाॅ. सांगवान, डाॅ. आशीष देवगन, डाॅ. साहिल अरोड़ा, डाॅ. प्रदीप कंबोज व डाॅ. राज सिंह ने भी व्याख्यान दिया।
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