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इंटरनेशनल डे फॉर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी: रोहतक पीजीआईएमएस में बगैर चीर-फाड़ भरा जाता है दिल का छेद
Sat, 16 Sep 2023 09:23 AM IST
नवीन दलाल
विकास सैनी, रोहतक (हरियाणा)
विकास सैनी, रोहतक (हरियाणा)
Published by: नवीन दलाल
Updated Sat, 16 Sep 2023 09:23 AM IST
सार
रोहतक पीजीआईएमएस में कार्डियोलॉजी विभाग वर्ष 1999 में स्थापित हुआ था। दिल के मरीजों को राहत पहुंचाने के कार्डियोलॉजी विभाग में पहली बार वर्ष 2003 में कैथ लैब की स्थापना से बड़ी शुरुआत की गई।उस समय विभाग में आधुनिक तकनीकी सुविधाओं का अभाव था।
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पीजीआई राेहतक
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दिल के मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। प्रदेश के सबसे बड़े चिकित्सा केंद्र पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (पीजीआईएमएस) में अब दिल का इलाज बगैर चीर-फाड़ के होने लगा है। इसमें बच्चे के दिल का छेद भरना हो या ढलती उम्र के लोगों के दिल में वाल्व लगाना मुख्य है। इसके लिए डेढ़ से दो घंटे का ऑपरेशन होता है। जबकि पहले पूरा सीना फाड़ कर घंटों चलने वाला गंभीर ऑपरेशन करना पड़ता था। इंटरनेशनल डे फॉर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी की पूर्व संध्या पर पीजीआईएमएस के कॉर्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह लालड़ ने अमर उजाला से हुई बातचीत में विभाग की प्रगति यात्रा साझा की।
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मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य लाभ पहुंचा रहा
विभागाध्यक्ष ने कहा कि पीजीआईएमएस में कार्डियोलॉजी विभाग वर्ष 1999 में स्थापित हुआ था। उस समय विभाग में आधुनिक तकनीकी सुविधाओं का अभाव था। वर्तमान में विभाग पूरी तरह से आधुनिक तकनीकी सुविधाओं से मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य लाभ पहुंचा रहा है। इसमें स्कूली बच्चों में होने वाली जन्मजात दिल की बीमारी व छेद भरने के लिए लगाया जाने वाला वाल्व मुख्य है। इसके अलावा ढलती उम्र में लोगों को होने वाले ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व इम्प्लांटेशन (टीएवीआई) में भी चीर-फाड़ की आवश्यकता नहीं पड़ती है। इसके लिए अब नई तकनीक से चिकित्सक जांघ की बड़ी नाड़ी (फीमेल आर्टरी) के रास्ते वायर डालकर दिल तक नया वाल्व पहुंचाते हैं। यह वाल्व फिट कर मरीज को राहत दी जाती है।
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वर्ष 2003 में स्थापित हुई कैथ लैब
दिल के मरीजों को राहत पहुंचाने के कार्डियोलॉजी विभाग में पहली बार वर्ष 2003 में कैथ लैब की स्थापना से बड़ी शुरुआत की गई। इसके बाद संस्थान में मरीजों को बेहतर उपचार मिलने लगा। अब कैथ लैब को अपडेट करते हुए नई तकनीकी सुविधा वाले उपकरण लगाए गए हैं। फरवरी 2004 में यहां स्टंट व एंजियोप्लास्टी की सुविधा शुरू हुई। अब तक यहां करीब 4000 मरीजों का स्टंट डाले जा चुके हैं। हर साल यहां करीब 2000 दिल की विभिन्न बीमारी से पीड़ित लोग इलाज के लिए पहुंचते हैं।
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कुलपति के आने से शुरू हुआ बच्चों का इलाज
स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. अनीता सक्सेना के संस्थान में आने के बाद से पीडिएट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट की कमी दूर हो गई है। इससे दिल के रोगों से ग्रसित बच्चों को राहत मिलने लगी है। कुलपति खुद दो दिन ओपीडी में मरीज देखने के अलावा इनकी ईको जांच व ऑपरेशन भी करती हैं।