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फसल बीमा वाले किसानों को जगी मुआवजे की आस, खेतीबाड़ी विभाग और इंश्योरेंस कंपनी ने नुकसान का जायजा लेने को शुरू किया सर्वे

Tue, 07 Apr 2020 11:27 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 07 Apr 2020 11:27 PM IST
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रोहतक। प्राकृतिक आपदा से फसलों को होने वाले नुकसान को लेकर बीमा कराने वाले किसानों में मुआवजे की आस जगी है। इसके लिए खेतीबाड़ी विभाग और इंश्योरेंस कंपनी ने खेतों में जाकर नुकसान का जायजा लेने को सर्वे शुरू कर दिया है। रिपोर्ट फाइनल होने के बाद कंपनी मुआवजे की राशि किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर करेगी।
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फरवरी और मार्च 2020 में बारिश, जलभराव और ओलावृष्टि के कारण जिले के कई गांवों में फसलों का काफी नुकसान हुआ था। बहुत से किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अपनी फसलों की बीमा करवाया था। जिन्होंने मुआवजे के लिए आवेदन दिए हैं। पहले चरण में खेतीबाड़ी विभाग को करीब 2900 आवेदन मिले थे। वहीं, दोबारा बारिश होने के बाद करीब डेढ़ सौ आवेदन और मिले। विभाग ने जरूरी दस्तावेज के साथ आवेदनों की पड़ताल कर इन्हें इंश्योरेंस कंपनी के पास भेज दिया था। अब विभाग और कंपनी की टीमों ने सर्वे शुरू कर दिया है। कंपनी के प्रतिनिधि एग्रीकल्चर डेवलपमेंट अफसर के साथ मौके पर जाकर फसल का मुआयना कर रहे हैं। मौके पर ही संबंधित किसान को बुला कर बता दिया जाता है कि कितने प्रतिशत नुकसान है। उसी के मुताबिक उसे मुआवजा दिया जाएगा। फसल की लागत के लिए फार्मूला तय है। इसमें बिजाई, लेबर, पानी, खाद, कीटनाशक आदि का खर्च जोड़ने के बाद लागत निकाली जाती है। उप निदेशक कृषि रोहताश सिंह ने कहा कि जल्द ही सर्वे का काम पूरा हो जाएगा। एक-डेढ़ महीने में मुआवजे की रकम किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर हो जाएगी।
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इन गांवों में हुआ नुकसान
रोहतक : माइना, सिमली, करोंथा, बालन, पहरावत, बनियाम, खेड़ी साध, लाढ़ौत, मकड़ौली कलां व खुर्द, बोहर, भालौठ, कंसाला, बखेता, सांघी, रुडकी, ब्राह्मणवास।
कलानौर : ककराणा, बनियानी, सुडाणा, निगाणा।
महम : करकड़ा, मोखरा, मदीना, भैणी सुरजन, भैणी महाराज, भैणी भैरों, बेडवा, निंदाणा।
लाखनमाजरा : सुंदरपुर, टिटौली।
सांपला : खेड़ी साध, इस्माइला, भैसरू खुर्द व कलां, मोरखेड़ी, समचाणा, बतौड़, नौनंद।
बिना बीमा वाले असमंजस में
जिले में बड़ी संख्या में ऐसे किसान भी हैं, जिन्होंने फसल बीमा नहीं करवाया था। लेकिन उनकी फसलों का भी उतना ही नुकसान हुआ है। प्रशासन ने सिर्फ ओलावृष्टि से प्रभावित सात गांवों में ही स्पेशल गिरदावरी के आदेश दिए थे। उसकी भी अब तक रिपोर्ट नहीं आई है। किसान सभा के प्रधान प्रीत सिंह ने कहा कि इस बार ज्यादा नुकसान बारिश और जलभराव से हुआ है। इन किसानों को भी मुआवजा दिया जाना चाहिए। प्रशासन जल्द से जल्द इस बारे में स्थिति स्पष्ट करे।
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