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Rohtak News: माेखरा की ओलंपियन बेटी साक्षी से प्रेरणा ले कुश्ती में भविष्य संवार रहीं बेटियां

Fri, 08 May 2026 02:36 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 08 May 2026 02:36 AM IST
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Inspired by Sakshi, the Olympian daughter of Mokhra, the girls are building their future in wrestling.
21 गांव की चौपाल में बैठे ग्रामीण। संवाद - फोटो : Archive
अभिषेक कीरत
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रोहतक। साक्षी मलिक ने 2016 के ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर मोखरा गांव को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाई है। महिला कुश्ती में देश को पहला पदक दिलाकर गांव की दूसरी बेटियों की नई राह खोली है। साक्षी से प्रेरित होकर ही गांव की बेटियां ओलंपिक में पदक जीतने के लिए कुश्ती का अभ्यास कर रही हैं। गांव को भी अपनी बेटी पर नाज है।
बलबीर सिंह उर्फ बाली पहलवान ने विधायक बनकर गांव को राजनीति मंच पर जगह दिलाई। सेवानिवृत्त जिला शिक्षा अधिकारी एवं श्रीकृष्ण गोशाला की संचालिका विद्या मलिक 700 गोवंशों की देखभाल कर रही हैं। वह 275 बच्चों को नाममात्र फीस पर पढ़ा रही हैं। संवाद
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गांव की बेटियां नेशनल चैंपियनशिप में जीत चुकीं स्वर्ण व कांस्य पदक
साक्षी मलिक महाविद्यालय मोखरा की प्राचार्य डॉ. मीनू नैन ने बताया कि 2014 में स्थापना की गई। 2024-25 में यहां लड़कों को भी शिक्षा देना शुरू किया। इससे पहले यह महिला महाविद्यालय था। यहां केवल एक कोर्स बीए चल रहा है। इसकी 160 सीटें हैं। छह फैकल्टी है। कुल 195 छात्र हैं। लाइब्रेरी कंप्यूटर व्यवस्था से लैस है। सेमिनार हॉल, कॉन्फ्रेंस हॉल, कक्षाएं भी साफ-सुथरी व फर्नीचर से लैस हैं।
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आगे छात्रों के बढ़ने पर नए कोर्स शुरू करने की कोशिश की जाएगी। कॉलेज की छात्राएं खेलों में बढ़-चढ़कर भाग ले रही हैं। कॉलेज की दो छात्राओं ने 11 जनवरी 2026 तक लखनऊ में चली नेशनल मर्दानी चैंपियनशिप में फाइट इवेंट में स्वर्ण पदक व सिंगल लाठी इवेंट में कांस्य पदक जीतकर गांव के साथ महाविद्यालय का नाम रोशन किया है।

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हर माह दूध-मक्खन, घी से गोशाला को डेढ़ लाख का मुनाफा
रिटायर्ड जिला शिक्षा अधिकारी व गोशाला संचालिका विद्या मलिक ने बताया कि हर माह गोवंश से मिलने वाले दूध, घी, मक्खन व खाद से गोशाला को डेढ़ लाख तक मुनाफा हो रहा है।
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ये बोले ग्रामीण

साक्षी मलिक ने ओलंपिक में पदक जीतकर गांव का नाम रोशन किया। यह हर मोखरा निवासी के लिए गर्व की बात है। जब साक्षी ने पदक जीता था, तब गांव का माहौल ही अलग बन गया था।
- रविंद्र कुमार, ग्रामीण

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साक्षी मलिक ने ओलंपिक में मेडल जीतकर सारे गांव को देशभर में प्रसिद्ध कर दिया। उनकी याद में गांव में कॉलेज व जिम भी शुरू की गई है।

- जयभगवान, ग्रामीण
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गांव पहलवानों का गढ़ रहा है। ऐसे पहलवान भी रहे जो पांच किलो दूध व मीठा खा जाते थे। विद्या मलिक जिला शिक्षा अधिकारी के पद से रिटायर होने के बाद गोसेवा में लगी हैं। - अत्तर, ग्रामीण।
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साक्षी मलिक ने मेडल जीतकर गांव का नाम रोशन किया था। बलबीर सिंह बाली दो बार विधायक बने व गांव की सड़कों व गलियों को सुधारने का कार्य किया। - श्रीनिवास, ग्रामीण

21 गांव की चौपाल में बैठे ग्रामीण। संवाद

21 गांव की चौपाल में बैठे ग्रामीण। संवाद- फोटो : Archive

21 गांव की चौपाल में बैठे ग्रामीण। संवाद

21 गांव की चौपाल में बैठे ग्रामीण। संवाद- फोटो : Archive

21 गांव की चौपाल में बैठे ग्रामीण। संवाद

21 गांव की चौपाल में बैठे ग्रामीण। संवाद- फोटो : Archive

21 गांव की चौपाल में बैठे ग्रामीण। संवाद

21 गांव की चौपाल में बैठे ग्रामीण। संवाद- फोटो : Archive

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