{"_id":"5fde20938ebc3e3c5261449c","slug":"india-biotech-s-covaxine-research-slowed-in-phase-iii-rohtakcity-news-rtk5870698116","type":"story","status":"publish","title_hn":"भारत बॉयोटेक की कोवैक्सीन का अनुसंधान तीसरे चरण में हुआ धीमा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भारत बॉयोटेक की कोवैक्सीन का अनुसंधान तीसरे चरण में हुआ धीमा
विज्ञापन
India Biotech's covaxine research slowed in Phase III
संजय कुमार
रोहतक। भारत बॉयोटेक की कोवैक्सीन का अनुसंधान अपने तीसरे चरण में विभिन्न कारणों के चलते धीमा हो गया है। इसमें गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज का कोरोना संक्रमित होना, 2021 में कोवैक्सीन आने की उम्मीद और अनुसंधान में वैक्सीन के साथ प्लेसिबो लगने की सूचना ने स्वयंसेवकों की संख्या में कमी ला दी है। देश में 25,800 स्वयंसेवकों को वैक्सीन लगाने के लक्ष्य से शुरू किया गया अनुसंधान अभी तक लगभग दस हजार के आंकड़े तक ही पहुंचा है। अकेले पीजीआईएमएस रोहतक की बात करें तो यहां एक हजार का लक्ष्य था, जोकि लगभग 330 तक पहुंच पाया है।
कोवैक्सीन अनुसंधान में शामिल पीजीआईएमएस रोहतक ने तीसरे चरण की दूसरी खुराक स्वयंसेवकों को लगानी शुरू कर दी है। हालांकि पहली खुराक 1000 स्वयंसेवकों को लगानी थी, लेकिन यह संख्या अभी पूरी नहीं हो पाई है। अनुसंधान से जुड़े विशेषज्ञों की मानें तो स्वास्थ्य मंत्री के कोरोना ग्रस्त होने के बाद लोगों में भ्रम की स्थिति हो गई है कि वैक्सीन लगने के बाद मंत्री संक्रमित हुए हैं। जबकि ऐसा नहीं है। वैक्सीन की दो खुराक लगने के 42 दिन बाद संक्रमण से लड़ने के लिए शरीर में प्रतिरक्षी बनते हैं। इससे पहले स्वयंसेवक को संक्रमण हो सकता है। हालांकि स्वास्थ्य मंत्री अब कोवैक्सीन के अनुसंधान से बाहर हो गए हैं। वहीं अनुसंधानकर्ता मानते हैं कि यदि देश में 130 लोगों को कोरोना संक्रमण होता है तो अनुसंधान अपने आप रोक दिया जाएगा, लेकिन अभी ऐसा नहीं है। बात जिले की करें तो यहां जनसंख्या कम होने के चलते स्वयंसेवक नहीं मिल पा रहे हैं और जो आ रहे हैं वह दूर-दराज के एरिया से हैं। अनुसंधानकर्ता चाहते हैं कि शहर के आसपास से स्वयंसेवक अनुसंधान में शामिल हों, ताकि उन्हें सैंपल देने के लिए आने में समस्या ना हो। वहीं माना जा रहा है कि लोगों में सूचना फैल चुकी है कि अनुसंधान में वैक्सीन लगने के साथ प्लेसिबो भी लगाई जा रही है। इसलिए कोई प्लेसिबो क्यों लगवाए, जब 2021 में वैक्सीन आ ही रही है।
बोले अधिकारी
तीसरे चरण में 330 के करीब स्वयंसेवकों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है और तीसरे चरण की दूसरी खुराक भी देनी शुरू कर दी है। यदि स्वयंसेवक आते हैं तो ठीक है, नहीं तो दूसरे रिसर्च सेंटर अपने यहां स्वयंसेवकों पर वैक्सीन प्रयोग कर लेंगे। कोवैक्सीन किसी के लिए घातक नहीं हैं, इससे किसी को कोरोना नहीं हुआ है। अनुसंधान में शामिल होना मानवता की भलाई करने जैसा है, जबकि वैक्सीन तैयार होने के बाद तो वह वैक्सीन की तरह उपलब्ध होगी।
विज्ञापन
- डॉ. रमेश वर्मा, को-इन्वेस्टिगेटर, कोवैक्सीन अनुसंधान, पीजीआईएमएस
विज्ञापन
रोहतक। भारत बॉयोटेक की कोवैक्सीन का अनुसंधान अपने तीसरे चरण में विभिन्न कारणों के चलते धीमा हो गया है। इसमें गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज का कोरोना संक्रमित होना, 2021 में कोवैक्सीन आने की उम्मीद और अनुसंधान में वैक्सीन के साथ प्लेसिबो लगने की सूचना ने स्वयंसेवकों की संख्या में कमी ला दी है। देश में 25,800 स्वयंसेवकों को वैक्सीन लगाने के लक्ष्य से शुरू किया गया अनुसंधान अभी तक लगभग दस हजार के आंकड़े तक ही पहुंचा है। अकेले पीजीआईएमएस रोहतक की बात करें तो यहां एक हजार का लक्ष्य था, जोकि लगभग 330 तक पहुंच पाया है।
कोवैक्सीन अनुसंधान में शामिल पीजीआईएमएस रोहतक ने तीसरे चरण की दूसरी खुराक स्वयंसेवकों को लगानी शुरू कर दी है। हालांकि पहली खुराक 1000 स्वयंसेवकों को लगानी थी, लेकिन यह संख्या अभी पूरी नहीं हो पाई है। अनुसंधान से जुड़े विशेषज्ञों की मानें तो स्वास्थ्य मंत्री के कोरोना ग्रस्त होने के बाद लोगों में भ्रम की स्थिति हो गई है कि वैक्सीन लगने के बाद मंत्री संक्रमित हुए हैं। जबकि ऐसा नहीं है। वैक्सीन की दो खुराक लगने के 42 दिन बाद संक्रमण से लड़ने के लिए शरीर में प्रतिरक्षी बनते हैं। इससे पहले स्वयंसेवक को संक्रमण हो सकता है। हालांकि स्वास्थ्य मंत्री अब कोवैक्सीन के अनुसंधान से बाहर हो गए हैं। वहीं अनुसंधानकर्ता मानते हैं कि यदि देश में 130 लोगों को कोरोना संक्रमण होता है तो अनुसंधान अपने आप रोक दिया जाएगा, लेकिन अभी ऐसा नहीं है। बात जिले की करें तो यहां जनसंख्या कम होने के चलते स्वयंसेवक नहीं मिल पा रहे हैं और जो आ रहे हैं वह दूर-दराज के एरिया से हैं। अनुसंधानकर्ता चाहते हैं कि शहर के आसपास से स्वयंसेवक अनुसंधान में शामिल हों, ताकि उन्हें सैंपल देने के लिए आने में समस्या ना हो। वहीं माना जा रहा है कि लोगों में सूचना फैल चुकी है कि अनुसंधान में वैक्सीन लगने के साथ प्लेसिबो भी लगाई जा रही है। इसलिए कोई प्लेसिबो क्यों लगवाए, जब 2021 में वैक्सीन आ ही रही है।
विज्ञापन
बोले अधिकारी
तीसरे चरण में 330 के करीब स्वयंसेवकों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है और तीसरे चरण की दूसरी खुराक भी देनी शुरू कर दी है। यदि स्वयंसेवक आते हैं तो ठीक है, नहीं तो दूसरे रिसर्च सेंटर अपने यहां स्वयंसेवकों पर वैक्सीन प्रयोग कर लेंगे। कोवैक्सीन किसी के लिए घातक नहीं हैं, इससे किसी को कोरोना नहीं हुआ है। अनुसंधान में शामिल होना मानवता की भलाई करने जैसा है, जबकि वैक्सीन तैयार होने के बाद तो वह वैक्सीन की तरह उपलब्ध होगी।
विज्ञापन
- डॉ. रमेश वर्मा, को-इन्वेस्टिगेटर, कोवैक्सीन अनुसंधान, पीजीआईएमएस