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100 मरीजों में से 10 की आंखों का बढ़ रहा दबाव

Thu, 11 Mar 2021 12:58 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 11 Mar 2021 12:58 AM IST
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Increased eye pressure in 10 out of 100 patients
कोरोना संक्रमणकाल में काला मोतिया के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। ग्लूकोमा जागरूकता सप्ताह के तहत दो दिन पीजीआईएमएस में लगाए गए स्क्रीनिंग कैंप में सामने आया कि 100 में से 10 मरीजों की आंखों पर अधिक दबाव है। यदि समय पर ऐसे सभी मरीजों का उपचार हो तो उन्हें नेत्रहीन होने से बचाया जा सकता है।
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पीजीआईएमएस के नेत्र रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ. सुमित सचदेवा ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि सामान्य रूप से 40 से अधिक आयु वालों में काला मोतिया रोग मिलता है। फिलहाल 25 से 30 साल की आयु वालों में भी यह समस्या देखने को मिल रही है। उन्होंने बताया कि 3300 बच्चों की जांच में एक बच्चे में यह रोग मिल जाता है। इस वर्ष अधिक मरीज मिलने की वजह कोरोना के चलते ओपीडी का बंद रहना भी रहा है। क्योंकि मरीज ओपीडी बंद होने के कारण जांच नहीं करवा पाए और उनकी बीमारी बढ़ गई। इसके साथ ही कई मरीज समय पर दवा न करवा पाने के कारण बीमारी का शिकार हो गए हैं।
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क्या है ग्लूकोमा
ग्लूकोमा काला मोतिया के नाम से जाना जाता है। पिछले सालों की तुलना में इस साल इससे ग्रस्त अधिक मरीज सामने आ रहे हैं। इसमें आंखों पर दबाव बढ़ने लगता है और आंखों की नसें सूखने लगती है। इससे आंखों की रोशनी धीरे-धीरे समाप्त होने लगती है और एकदम व्यक्ति देखने में असहज हो जाता है। साल में 400 नए केस आते हैं। मरीज की आंखों में 10 से 20 मिलीमीटर मरकरी का दबाव होता है। इससे अधिक होने पर ग्लूकोमा की जांच होनी चाहिए।
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पांच मिनट में होती है जांच और उपचार के कई विकल्प
प्रोफेसर डॉ. सुमित सचदेवा बताते हैं कि नेत्र विभाग में ग्लूकोमा जांचने की कई मशीन हैं। एक मरीज की जांच करने में महज पांच मिनट का समय लगता है। संस्थान में विश्वस्तरीय आधुनिक मशीनें उपलब्ध हैं। इसके उपचार में सर्जरी, लेजर सर्जरी व दवाओं का विकल्प उपलब्ध है। दवाओं पर चलने वाले मरीजों के लिए लंबे समय दवा का सेवन करना पड़ता है। संस्थान हर साल 1200 से 1400 मरीजों की आंखों की उपचार कर रक्षा करता है।
ग्लूकोमा के लक्षण
1. रोशनी के चारों ओर आभा दिखना।
2. नजर में संकरापन।
3. चश्मे का नंबर बदलना।
4. धुंधलापन व आंख में लालिमा।
5. आंखों व सिर में दर्द।
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