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सौ एकड़ में विकसित होंगे बाग, तीन साल तक पंचायतें करेंगी देखभाल

Wed, 10 Jun 2020 01:03 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 10 Jun 2020 01:03 AM IST
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in 100 acer devlop garden
रोहतक। हर साल दिवाली के पटाखों और धान की पराली के बीच स्मॉग के साये में रहने वाले एनसीआर के लोगों को रोहतक राहत देगा। जिले में सौ एकड़ के अंदर बाग विकसित किए जाएंगे। इतना ही नहीं, इससे पंचायतों को अतिरिक्त कमाई होगी। वहीं, पौधे की देखरेख की जिम्मेदारी भी पंचायतों की ही होगी।
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हॉर्टिकल्चर विभाग ने विकास व पंचायत विभाग के साथ मिल कर यह प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी की है। दोनों विभागों की कोशिश है कि बारिश से पहले ही जगह चिन्हित कर पौधे लग जाएं। ताकि इस मानसून का पूरा फायदा उठाया जा सके। इस प्रोजेक्ट के तहत जिले के सौ एकड़ रकबे में फलदार पौधों के बाग विकसित किए जाएंगे। हॉर्टिकल्चर विभाग इसके लिए पंचायतों को इंसेंटिव देगा। विकास व पंचायत विभाग जिले भर के गांवों में उपलब्ध जमीनों की पहचान करेगा। जमीन पंचायत की होगी। पंचायतें ही पौधे खरीदेंगी, गड्ढे खुदवा कर उन्हें लगवाएंगी। बाग के चारों तरफ कंटीली तारों की बाड़ लगवाएंगी।
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तीन साल तक पौधों को खाद, पानी देने और उनकी देखरेख का इंतजाम करेंगी। तीन साल बाद पेड़ तैयार हो जाएंगे तो पंचायतों को बागों से नियमित आमदनी शुरू हो जाएगी। पंचायतों का इसमें आर्थिक फायदा है। वहीं, हॉर्टिकल्चर विभाग का मकसद जिले में वन्य क्षेत्र बढ़ाना है। इससे धान का रकबा भी कुछ कम हो सकता है। इसलिए विभाग ने यह भी प्रस्ताव रखा है कि अगर कोई व्यक्ति अपनी जमीन पर बाग विकसित करना चाहता है तो वह भी इसका फायदा उठा सकता है। एनसीआर में प्रदूषण की स्थिति बहुत खराब है। ऐसे में सौ एकड़ वन्य क्षेत्र काफी राहत दे सकता है। जिसका फायदा पूरे एनसीआर के लोगों को होगा।
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ये पौधे लगाए जाएंगे
हॉर्टिकल्चर विभाग की योजना है कि अमरूद, बेर या नींबू के पौधे लगाए जाएं। इनके दो फायदे हैं। ये छोटे पौधे होते हैं और तीन साल में तैयार हो जाते हैं। इनमें फसल भी साल में दो बार आती है, जिससे पंचायतों को ज्यादा आर्थिक फायदा होगा। वहीं, आम जैसे फलों के पेड़ तैयार होने में समय ज्यादा लगता है और फसल भी साल में एक बार आती है।
पंचायतों को मिलेगा इंसेंटिव
पौधे लगाने के तीन साल बाद पंचायतों को बाग से आमदनी होने लगेगी, तब तक हॉर्टिकल्चर विभाग उन्हें इंसेंटिव देगा। पंचायतों को पहले साल 4500 रुपये प्रति एकड़ दिए जाएंगे। अगले दोनों सालों के दौरान उन्हें 1500-1500 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से दिए जाएंगे। पंचायतों को उसमें ही सारा इंतजाम करना होगा।
मजदूरों को मिलेगा काम
इस प्रोजेक्ट का एक मकसद कोरोना को लेकर पैदा हुई परिस्थितियों में गांवों के अनस्किल्ड लेबर को रोजगार दिलाना भी है। पंचायतें मनरेगा के तहत मजदूर लगाएंगी जोकि गड्ढे खोदेंगे और पौधे लगाएंगे। वे ही कंटीली बाड़ भी लगाएंगे। इस तरह हर गांव में कुछ लोगों को रोजगार मिलेगा, जिससे रूरल इकोनॉमी को बूस्ट मिलेग।

हॉर्टिकल्चर विभाग के प्रस्ताव के अनुसार सभी बीडीपीओ को निर्देश दिए गए हैं कि जल्द से जल्द गांवों में बागों के लिए जगह चिह्नित करें। ताकि मानसून सीजन में ही पौधे लगवा दिए जाएं। इसमें पंचायतों का फायदा है और एनसीआर को प्रदूषण से बड़ी राहत मिलेगी।
- नरेंद्र धनखड़, जिला विकास व पंचायत अधिकारी, रोहतक
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