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आईएमटी ब्लास्ट : घायल की बायीं आंख की चली गई रोशनी, पीजीआई से मिली छुट्टी

Fri, 20 Aug 2021 02:02 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 20 Aug 2021 02:02 AM IST
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IMT Blast: Injured lost sight of left eye, discharged from PGI
जांच करती पुलिस टीम। - फोटो : फाइल फोटो
खरावड़ के नजदीक आईएमटी फेज 3 में 31 जुलाई की सुबह हुए धमाके में घायल राजकुमार (54) की एक आंख की रोशनी चली गई है। पीजीआई के डॉक्टरों से जवाब मिलने के बाद परिजनों ने दिल्ली के निजी अस्पताल में उसकी जांच करवाई। वहां डॉक्टर ने कहा है कि मात्र 15 प्रतिशत उम्मीद है कि आंख की रोशनी लौट आए।
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वहीं, विस्फोट के 20 दिन बाद भी एनआईए जांच के बाद भी रोहतक पुलिस के हाथ खाली है। आलम यह है कि अभी तक एफएसएल की रिपोर्ट भी नहीं आई है। पुलिस का विस्फोट स्थल के आसपास के एरिया में चल रहा पूछताछ अभियान भी ठंडे बस्ते में चला गया है। घायल राजकुमार ने बताया कि चेहरा व हाथ तो ठीक हो गया है, बायीं आंख की रोशनी चली गई है। पीजीआई के डॉक्टरों ने तो जवाब दे दिया था। इसलिए परिजन छुट्टी करवाकर घर ले आए। एक रिश्तेदार से दिल्ली में बात की, जो दिल्ली पुलिस में डीएसपी हैं। उन्होंने आंखों के विशेषज्ञ डॉक्टरों से मंगलवार को जांच करवाई। डॉक्टर ने कहा कि आंख की रोशनी लौटने की संभावना 15 प्रतिशत ही है।
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मैंने तो कचरा समझकर उठाया था पॉथिलीन, धमाके के साथ आंखों के सामने छाया गया अंधेरा
पीजीआई से छुट्टी के बाद घर पहुंचे राजकुमार ने बताया कि वे हर रोज सुबह साइकिल पर आईएमटी फेज 3 में घूमने जाते थे। 31 जुलाई की सुबह नलके के पास पहुंचा, जहां शौच के लिए शीशी में पानी भरा। इसके बाद सोचा कि किसी ने शराब पीकर कचरा यहां पॉलिथीन में डालकर रख दिया है। पॉलिथीन में दो गांठ लगी थी। जैसे ही उसने पॉलिथीन उठाया तभी जोरदार धमाका हुआ। इस दौरान उसकी आंखों के सामने अंधेरा छा गया। चेहरे व हाथ से खून निकलने लगा। उसे नहीं पता विस्फोट के बाद कैसा धुआं निकला था। इतना जरूर याद है कि धमाका ऐसा था, जैसे ट्रक का टायर फटा हो।
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1997 के धमाके का दिल्ली पुलिस ने खोला था राज
विस्फोट मामले में पुलिस के हाथ अब भी खाली हैं। जांच की गंभीरता का इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि अभी तक एफएसएल की जांच रिपोर्ट भी रोहतक नहीं पहुंची है। बता दें कि 1997 में शहर की पुरानी सब्जी मंडी व किला रोड बाजार में सिलसिलेवार धमाके हुए थे। धमाकों में तीन-चार लोग घायल हो गए थे। दो साल बाद दिल्ली पुलिस ने ही मामले की गुत्थी सुलझाई थी। इसमें दिल्ली का एक युवक काबू किया था, जिसने खुलासा किया था कि अब्दुल करीम टुंडा के कहने पर उसने बम रखे थे। फिलहाल अदालत में मामला विचाराधीन है।


आईएमटी धमाके की गुत्थी सुलझाने का पूरा प्रयास कर रहे हैं। हालांकि एफएसएल की रिपोर्ट अभी नहीं मिली है। इसके लिए लैब में रिमाइंडर भेजा जाएगा। - कृष्ण कुमार, एएसपी एवं जांच अधिकारी
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