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Hindi News ›   Haryana ›   Rohtak News ›   Illiterate employee handed a list of names written in English

अनपढ़ कर्मचारी को थमा दी अंग्रेजी में लिखे नामों की सूची

Fri, 25 Apr 2014 02:35 AM IST
रोहतक
रोहतक Updated Fri, 25 Apr 2014 02:35 AM IST
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समय: 12 बजे, स्थान लघु सचिवालय में उपायुक्त का कोर्ट रूम। अंदर कुर्सी पर बैठे थे आरटीआई कमीशन के कमिश्नर। रूम के गेट पर खड़ा परेशान कर्मचारी। हाथ में अंग्रेजी में लिखा हुआ एक कागज।
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कागज के अनुसार सुनवाई के लिए लोगों के नामों को पढ़कर रूम में भेजना। हुडा का चतुर्थ श्रेणी का अनपढ़ कर्मचारी ईश्वर असमंजस में। कुछ देर में अंदर गया, बाबू को बताया कि उसे पढ़ना नहीं आता। इसके बाद बाबू ने एक कागज पर नाम हिंदी में लिख दिए।
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कर्मचारी फिर बोला, साहब पढ़ना ही नहीं आता। लेकिन बागू समझ नहीं पाया और उसे नामों को पढ़कर लोगों को अंदर भेजने को कहा। आखिर में उसने परिवादियों और दूसरे कर्मचारियों की मदद ली।  
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इसके बाद वह इसी अनुमान से कि कितने लोग अंदर जा चुके हैं, अगला नाम किसी से पढ़वा लेता और आवाज देता। दोपहर दो बजे तक कोर्ट के बाहर कुछ ऐसा ही चलता रहा। ईश्वर ने बताया कि साहब पढ़ना ही नहीं आता, लेकिन काम तो करना ही है ना। दूसरों से नाम पढ़वाकर बोल रहा हूं।



आरटीआई कमीशन के कमिश्नर समीर माथुर ने बृहस्पतिवार को लघु सचिवालय में रोहतक, झज्जर और सोनीपत जिले के 12 मामलों की सुनवाई की। दोनों पक्षों से बातचीत की गई। कुछ कर्मचारियों को सभी सूचना देने के आदेश दिए। उन्होंने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में बताया कि लोगों के लिए ही वे यहां आएं हैं, ताकि उनके मामले जल्द निपटाए जा सकें और नियमानुसार सूचना मिल सके।



उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य हर काम में पारदर्शिता लाना है, ताकि जनता को यह पता रहे कि कहां क्या हो रहा है, कितना पैसा खर्च हो रहा है। जनता को यह जानने का हक दिया गया है।



सूचना मिलने में देरी होने को लेकर उन्होंने माना कि यह सही है कई बार सूचना देने में देरी होती है, लेकिन फिर भी प्रयास रहता है कि संबंधित को सूचना मिल जाए। कई बार आवेदकों द्वारा सही ढंग से आवेदन नहीं करने पर भी उसे पर्याप्त सूचना नहीं मिल पाती है।



आरटीआई एक्टिविस्टों द्वारा राइट टू इंफॉर्मेशन के तहत पहली और दूसरी अपील तक सूचना न मिलने पर चंडीगढ़ तक लगाई जाने वाली दौड़ जल्द ही थम जाएगी। आरटीआई कमीशन जल्द ही ऐसे में मामलों में दोनों पक्षों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बातचीत करने के बाद फैसला देगा।




इसके अलावा हर महकमे के अधिकारियों और कर्मचारियों को ट्रेनिंग भी दी जाएगी कि वह कैसे आमजन को सूचना मुहैया करा सकते हैं। इसके साथ ही कर्मचारी आम आदमी के साथ कैसे दोस्ताना व्यवहार करें।
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