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Rohtak News: वारंटी अवधि में फ्रिज ठीक किया न बदला, कंपनी को देने होंगे 61 हजार रुपये
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माई सिटी रिपोर्टर
रोहतक। फ्रिज निर्माता कंपनी ने वारंटी अवधि के बीच न तो मरम्मत की और न ही उत्पाद को बदला। सेवाओं में कमी मानते हुए जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने सेक्टर-3 निवासी उपभोक्ता चंद्र सिंह को 61 हजार रुपये नौ प्रतिशत ब्याज सहित वापस देने का निर्णय दिया है। साथ ही, पांच हजार रुपये हर्जाने व पांच हजार रुपये कानूनी खर्च के तौर पर देने के आदेश दिए।
आयोग के रिकाॅर्ड के मुताबिक, चंद्र सिंह ने शिकायत दी थी कि उसने मानसरोवर पार्क के नजदीक से 87 हजार रुपये में फ्रिज खरीदा था। फरवरी 2022 तक फ्रिज अच्छी तरह चला। बाद में कूलिंग नहीं की। कंपनी का कर्मचारी 3 हजार रुपये शुल्क लेकर जांच करने पहुंचा। इसके बावजूद समाधान नहीं किया गया।
2023 में उपभोक्ता ने आयोग में याचिका दायर कर मांग की कि लागत राशि 18 प्रतिशत ब्याज सहित लौटाई जाए। 50 हजार रुपये सेवा में कमी और 11 हजार रुपये कानूनी खर्च के तौर पर दिलवाएं। आयोग के नोटिस के जवाब में कंपनी ने कहा कि फ्रिज की वारंटी अवधि एक साल थी। इसके बावजूद पांच साल बाद शिकायत की गई।
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दूसरी तरफ शिकायतकर्ता पक्ष ने आयोग के सामने तथ्य पेश किए गए एक साल फ्रिज की वारंटी है जबकि कंप्रेशर की वारंटी 10 साल है। आयोग ने दोनों पक्षों की बहस के बाद कहा कि जब कंप्रेशर की वारंटी 10 साल है तो एक साल की वारंटी कोई मायने नहीं रखती।
ऐसे में कंपनी उपभोक्ता को 30 प्रतिशत राशि की कटौती के बाद 61 हजार रुपये नौ प्रतिशत ब्याज सहित दें। साथ ही, एक माह के अंदर पांच हजार रुपये सेवाओं में कमी तो पांच हजार कानूनी खर्च के तौर पर दें।
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रोहतक। फ्रिज निर्माता कंपनी ने वारंटी अवधि के बीच न तो मरम्मत की और न ही उत्पाद को बदला। सेवाओं में कमी मानते हुए जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने सेक्टर-3 निवासी उपभोक्ता चंद्र सिंह को 61 हजार रुपये नौ प्रतिशत ब्याज सहित वापस देने का निर्णय दिया है। साथ ही, पांच हजार रुपये हर्जाने व पांच हजार रुपये कानूनी खर्च के तौर पर देने के आदेश दिए।
आयोग के रिकाॅर्ड के मुताबिक, चंद्र सिंह ने शिकायत दी थी कि उसने मानसरोवर पार्क के नजदीक से 87 हजार रुपये में फ्रिज खरीदा था। फरवरी 2022 तक फ्रिज अच्छी तरह चला। बाद में कूलिंग नहीं की। कंपनी का कर्मचारी 3 हजार रुपये शुल्क लेकर जांच करने पहुंचा। इसके बावजूद समाधान नहीं किया गया।
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2023 में उपभोक्ता ने आयोग में याचिका दायर कर मांग की कि लागत राशि 18 प्रतिशत ब्याज सहित लौटाई जाए। 50 हजार रुपये सेवा में कमी और 11 हजार रुपये कानूनी खर्च के तौर पर दिलवाएं। आयोग के नोटिस के जवाब में कंपनी ने कहा कि फ्रिज की वारंटी अवधि एक साल थी। इसके बावजूद पांच साल बाद शिकायत की गई।
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दूसरी तरफ शिकायतकर्ता पक्ष ने आयोग के सामने तथ्य पेश किए गए एक साल फ्रिज की वारंटी है जबकि कंप्रेशर की वारंटी 10 साल है। आयोग ने दोनों पक्षों की बहस के बाद कहा कि जब कंप्रेशर की वारंटी 10 साल है तो एक साल की वारंटी कोई मायने नहीं रखती।
ऐसे में कंपनी उपभोक्ता को 30 प्रतिशत राशि की कटौती के बाद 61 हजार रुपये नौ प्रतिशत ब्याज सहित दें। साथ ही, एक माह के अंदर पांच हजार रुपये सेवाओं में कमी तो पांच हजार कानूनी खर्च के तौर पर दें।