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Rohtak News: हुड्डा चौपालों से देंगे अभय के 'परिवर्तन' का जवाब

Mon, 08 May 2023 03:02 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 08 May 2023 03:02 AM IST
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Hooda will answer Abhay's 'parivartan' from the chaupals
विजेंद्र कौशिकरोहतक। प्रदेश में अंदर चुनावी साल 2024 से एक साल पहले राजनीतिक दल माहौल बनाने में लग गए हैं। इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) की ओर से अभय चौटाला परिवर्तन यात्रा के तहत जिले में पिछले चार दिन से डटे हुए हैं।
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गढ़ी सांपला, रोहतक व कलानौर हलके में ग्रामीणों से सीधे रूबरू होते हुए अभय ने भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार से ज्यादा पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा पर सियासी वार किए। परिवर्तन यात्रा के बहाने परिवर्तन लाने की चाह में जुटे अभय पर हुड्डा ने पलटवार की तैयारी कर ली है।
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15 व 16 मई को हुड्डा अपने हलके गढ़ी सांपला के 12 गांवों में जाएंगे, जहां चौपाल से ही अभय के सवालों का जवाब देंगे। इतना ही नहीं, सोमवार को झज्जर जिले के दौरे के दौरान वापसी में भी रोहतक आएंगे।
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गढ़ी सांपला-किलोई हलका चाहे 2000 से अब तक पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का गढ़ बना हुआ है, लेकिन चुनावी इतिहास को देखें तो इनेलो भी परचम लहरा चुकी है। ताऊ देवीलाल के नेतृत्व में लोकदल ने 1982 व 1987 में दो बार हुड्डा परिवार को मात दी। इतना ही नहीं, 1967 में गढ़ी सांपला किलोई हलके से अलग बने हसनगढ़ हलके में तो लोकदल (अब इनेलो ) का दबदबा रहा। सियासी पंडितों का कहना है कि पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा व अभय चौटाला गैर भाजपा राजनीति करते हैं। दोनों का प्रमुख वोट बैंक जाट समुदाय से आता है। जाट समाज जिसको अपना नेता मानेगा, वहीं बाजी मारेगा। ऐसे में अभय चौटाला पूर्व सीएम हुड्डा को उनके हलके में ही आकर घेर रहे हैं।

हरिचंद हुड्डा ने लोकदल के झंडे तले हुड्डा परिवार को दो बार हराया
वर्ष 1967 में सांपला हलके को तोड़कर हसनगढ़ व किलोई हलका बनाया गया। पहले विधानसभा चुनाव में अस्थल बोहर मठ के महंत श्रेयोनाथ ने पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पिता रणबीर सिंह हुड्डा को हरा दिया। हालांकि एक साल बाद हुए उप चुनाव में रणबीर सिंह हुड्डा ने हार का बदला ले लिया। 1972 के विधानसभा चुनाव में रणबीर सिंह हुड्डा ने अपने बेटे कैप्टन प्रताप सिंह को मैदान में उतारा, लेकिन वे महंत श्रेयोनाथ से हार गए। 1977 में हरिचंद हुड्डा ने रणबीर सिंह हुड्डा व 1982 में भूपेंद्र सिंह हुड्डा को मात दी जबकि 1987 में श्रीकृष्ण हुड्डा से भूपेंद्र सिंह हुड्डा चुनाव हार गए। कांग्रेस की हार का क्रम 1991 में टूटा, जब कृष्णमूर्ति हुड्डा ने श्रीकृष्ण हुड्डा को मात दी। उस समय भूपेंद्र सिंह हुड्डा ताऊ देवीलाल को हराकर लोकसभा में चले गए थे। अब भूपेंद्र सिंह हुड्डा पिछले पांच विधानसभा चुनाव से अजेय बने हुए हैं। उनके विरोधी उनको हलके में ही घेरने का प्रयास कर रहे हैं। वर्ष 2014 से सत्ता से दूर हुड्डा भी अपना घर (हलका) संभालने में जुटे हैं।


ये रहेंगे कार्यक्रम
पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के सचिव शादीलाल कपूर ने बताया कि 14 मई की शाम पूर्व सीएम रोहतक पहुंचेगे। 15 मई को सुबह 10 बजे ब्राह्मणवास, 11 बजे बसंतपुर, 12 बजे धामड़, एक बजे जसिया, 2 बजे सांघी व 4 बजे कटवाड़ा में ग्रामीणों से रूबरू होंगे। अगले दिन 16 मई को सुबह 10 बजे गांव नांदल, 11 बजे चिड़ी व 12 बजे खिड़वाली, 2 बजे घुसकानी, 3 बजे जिंदरान व 4 बजे टिटौली गांव में पहुंचेंगे।
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