{"_id":"590b98a64f1c1ba874442ff5","slug":"home-district-of-backward-cm-only-40-marks-in-sanitation-ranking-rohtak-development","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्वच्छता रैंकिंग में पिछड़ा सीएम का गृह जिला, मिले मात्र 40 फीसदी अंक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्वच्छता रैंकिंग में पिछड़ा सीएम का गृह जिला, मिले मात्र 40 फीसदी अंक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Fri, 05 May 2017 02:40 AM IST
विज्ञापन
सॉलिड वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट की नाकामी पड़ी भारी
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आपके, हमारे और जिले से जुडे़ राजनेताओं के लिए यह चिंतन के साथ ही बेहद शर्म का विषय है कि अपना रोहतक स्वच्छता के मामले में 2015 के मुकाबले सात पायदान लुढ़ककर देश में 295वें स्थान पर पहुंच गया है। इस जिले की मिट्टी में प्रदेश के मुख्यमंत्री जन्मे हैं तो सरकार के नंबर दो मंत्री कैप्टन अभिमन्यु भी रोहतक शहर में ही रहते हैं।
शहरी निकाय की कैबिनेट मंत्री का मायका अपने यहां ही है। वहीं, राज्यमंत्री मनीष ग्रोवर हमारे विधायक हैं। इस फेहरिस्त में कई और दिग्गजों के नाम हैं लेकिन साफ-सफाई वाले शहरों की सूची में हम बहुत पीछे हैं। शर्म की बात यह है कि मुख्यमंत्री का गृह जिला होने के बावजूद स्वच्छता रैंकिंग में हमारा पायदान दो सालों में बढ़ने के बजाए गिरा है। पिछली सरकार में इस शहर को सीएम सिटी का दर्जा रहा है और अब सांसद पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे हैं और मेयर कांग्रेस की हैं।
तमाम बड़ी राजनैतिक हस्तियों का गढ़ होने के बावजूद शहर दो साल में सात पायदान पीछे खिसक कर देश में 295वें स्थान पर पहुंच गया है। 2015 में सफाई के मामले में जिला 288 वें स्थान पर था। इतना ही नहीं रोहतक का प्रदेश के 19 शहरों में 11वां स्थान है। सीएम का कार्यक्षेत्र करनाल दो सालों में प्रदेश का नंबर एक शहर हो गया लेकिन उनके गृह जिले रोहतक को स्वच्छता के 2000 अंकों में से मात्र 800 अंक मिले हैं।
विज्ञापन
केंद्र की ओर से जनवरी माह में स्वच्छता व सफाई को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर सर्वे करवाया गया। इसमें 10 लाख या इससे ऊपर की आबादी वाले शहरों को लिया गया। प्रदेश के अंदर रोहतक सहित 19 शहरों को शामिल किया गया। सर्वे के दौरान केंद्रीय स्वच्छता एजेंसी की तीन सदस्यीय टीम दो दिन रोहतक में रही। अपने तरीके से शहर में जगह-जगह जाकर जांच पड़ताल की और स्वच्छता व सफाई की व्यवस्था का जायजा लिया। इसके बाद अब देश भर की रैकिंग जारी की गई है। इसमें अपने शहर को 40 प्रतिशत अंक मिले हैं। अंकों के हिसाब से अपने शहर की सफाई के मामले में थर्ड डिवीजन आई है।
दम तोड़ गए भाजपा नेताओं के सफाई व स्वच्छता के दावे
एक तरफ पीएम मोदी सफाई व स्वच्छता पर जोर दे रहे हैं लेकिन भाजपाई रोहतक शहर में उनके सफाई के सपने को साकार नहीं कर सके। उल्टा रोहतक 2015 के मुकाबले छह कदम पीछे चला गया। यह हाल तब है जब प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर का जन्म रोहतक जिले के गांव निंदाना में हुआ था जबकि पालन पोषण जिले के ही गांव बनियानी में हुआ है। साथ ही लंबे समय तक संघ में रहते हुए उनकी कर्म स्थली रोहतक शहर ही रहा है।
वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु हिसार के नारनौंद हलके से विधायक हैं लेकिन शहर के सेक्टर 14 में रहते हैं। शहरी निकाय मंत्री कविता जैन चाहे सोनीपत से विधायक हैं लेकिन उनका मायका रोहतक के रेलवे रोड पर है। प्रदेश के सहकारिता व शहरी निकाय राज्य मंत्री मनीष ग्रोवर सिटी से ही विधायक हैं। इसके बावजूद सफाई व स्वच्छता के मामले में रोहतक आगे बढ़ने की बजाए पीछे जा रहा है।
सॉलिड वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट की नाकामी पड़ी भारी
शहर में हर रोज 50 टन कचरा निकालता है। इसे पहले जींद रोड पर डाला जाता था। नजदीक की शिक्षण संस्था की आपत्ति के बाद पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कार्यकाल में भिवानी रोड पर 10 साल पहले सॉलिड वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट की आधारशिला रखी गई थी। प्लांट 2016 में आकर चालू हो सका। दिल्ली की एक एजेंसी को प्लांट संचालन का जिम्मा दिया गया। नगर निगम और कंपनी के बीच हुए विवाद के बाद एजेंसी भी प्लांट बंद करके चली गई। स्वच्छता व सफाई के सर्वे को लेकर यह भी देखा जाता है कि किस तरह शहर में कहां-कहां डस्टबिन रखे हैं। वहां से कूड़ा किस तरह लिफ्ट करके ले जाया जाता है। उसके कंपोजिंग की क्या व्यवस्था है। प्लांट बंद होने के कारण भिवानी रोड पर कूड़े के ढेर लगे हैं। इस कारण भी निगम को बहुत कम अंक मिले।
सार्वजनिक शौचालयों की कमी
शहर में मेडिकल मोड़ पर ही सार्वजनिक शौचालय है। पुराने शहर खासकर पुराना बस स्टैंड, दुर्गा भवन, भिवानी स्टैंड, रेलवे रोड, किला रोड, झज्जर रोड व शांतमई चौक तक सार्वजनिक शौचालय की लंबे समय से कमी महसूस की जा रही है। निगम अभी तक नए शौचालय नहीं बनवा सका है।
आधे शहर में सीवरेज ही नहीं
मार्च माह के प्रथम सप्ताह में मेयर रेनू डाबला ने पार्षदों से सीवरेज का लेकर रिपोर्ट मांगी थी। जांच में पाया कि 2013 में पास हुई 34 कालोनियों, वार्ड नंबर 1,2,3,4,7,8 और 20 के काफी एरिया में सीवरेज लाइन नहीं है। साथ ही पुराने शहर व गांधी कैंप इलाके में सीवरेज लाइन तो हैं, लेकिन सफाई न होने से ब्लाक रहती हैं। इसके चलते गंदा पानी सड़कों पर खड़ा रहता है।
भाजपा केवल बातें करती है, सर्वे ने खोली पोल
प्रदेश की भाजपा सरकार व उसके मंत्री केवल बातें करते हैं। धरातल पर काम नहीं करते। यही कारण है कि रोहतक सफाई के मामले में दो साल में सात कदम पीछे चला गया। केंद्र की भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुए सर्वे ने सरकार की पोल खोल दी है।
दीपेंद्र हुड्डा, सांसद, रोहतक।
अम्रुत योजना से शहर बनेगा क्लीन
प्रदेश के अंदर ज्यादातर शहरों की रैंकिंग में सुधार हुआ है। इससे वे पूरी तरह संतुष्ट हैं। रोहतक सहित कई शहर सफाई के मामले में पिछडे़ हैं। अम्रुत योजना के तहत शहरों को क्लीन किया जाएगा।
कविता जैन, शहरी निकाय मंत्री।
पहले से बेहतर हुआ है हमारा शहर
हमारा रोहतक पहले से काफी साफ सुथरा हुआ है, शहरवासी भी इसमें पूरा सहयोग दे रहे हैं। यह हम सबका कर्तव्य है कि हम अपने शहर को और अधिक सुंदर बनाएं जिससे हमें गर्व हो कि हम प्रदेश ही नहीं देश के सबसे स्वच्छ शहर में रहते हैं। पूर्व सरकार के कार्यकाल में शहर के क्या हालात थे यह सब जानते हैं। भाजपा सरकार इस ओर पूरी ईमानदारी से काम कर रही है। सर्वे टीम के अपने पैरामीटर हैं उन पर खरा उतरने के लिए भविष्य में और अधिक ध्यान दिया जाएगा।
मनीष ग्रोवर, सहकारिता मंत्री।
हर किसी के अपने-अपने तर्क
मैंने अभी निगम कार्यभार संभाला है। गुरुग्राम में कमिश्नर रहते हुए काफी सुधार करवाया था। रोहतक में भी सफाई पर विशेष जोर दिया जा रहा है। पिछले तीन दिन से विशेष सफाई अभियान चल रहा है। अगली बार काफी सुधार देखने को मिलेगा।
प्रदीप कुमार, निगम आयुक्त व एडीसी
निगम में 20 प्रतिशत एरिया ग्रामीण क्षेत्र का शामिल है। दूसरा 10 प्रतिशत एरिया में स्लम बस्ती हैं। दोनों तरह उच्च स्तर की सफाई व्यवस्था बनाने में समय लगेगा। पहले निगम के पास सफाई कर्मियों की कमी थी। अब तीन माह से हालात में सुधार आया है। अगली बार रैंकिंग में सुधार देखने को मिलेगा।
रेनू डाबला, मेयर, नगर निगम।
विज्ञापन
शहरी निकाय की कैबिनेट मंत्री का मायका अपने यहां ही है। वहीं, राज्यमंत्री मनीष ग्रोवर हमारे विधायक हैं। इस फेहरिस्त में कई और दिग्गजों के नाम हैं लेकिन साफ-सफाई वाले शहरों की सूची में हम बहुत पीछे हैं। शर्म की बात यह है कि मुख्यमंत्री का गृह जिला होने के बावजूद स्वच्छता रैंकिंग में हमारा पायदान दो सालों में बढ़ने के बजाए गिरा है। पिछली सरकार में इस शहर को सीएम सिटी का दर्जा रहा है और अब सांसद पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे हैं और मेयर कांग्रेस की हैं।
विज्ञापन
तमाम बड़ी राजनैतिक हस्तियों का गढ़ होने के बावजूद शहर दो साल में सात पायदान पीछे खिसक कर देश में 295वें स्थान पर पहुंच गया है। 2015 में सफाई के मामले में जिला 288 वें स्थान पर था। इतना ही नहीं रोहतक का प्रदेश के 19 शहरों में 11वां स्थान है। सीएम का कार्यक्षेत्र करनाल दो सालों में प्रदेश का नंबर एक शहर हो गया लेकिन उनके गृह जिले रोहतक को स्वच्छता के 2000 अंकों में से मात्र 800 अंक मिले हैं।
विज्ञापन
केंद्र की ओर से जनवरी माह में स्वच्छता व सफाई को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर सर्वे करवाया गया। इसमें 10 लाख या इससे ऊपर की आबादी वाले शहरों को लिया गया। प्रदेश के अंदर रोहतक सहित 19 शहरों को शामिल किया गया। सर्वे के दौरान केंद्रीय स्वच्छता एजेंसी की तीन सदस्यीय टीम दो दिन रोहतक में रही। अपने तरीके से शहर में जगह-जगह जाकर जांच पड़ताल की और स्वच्छता व सफाई की व्यवस्था का जायजा लिया। इसके बाद अब देश भर की रैकिंग जारी की गई है। इसमें अपने शहर को 40 प्रतिशत अंक मिले हैं। अंकों के हिसाब से अपने शहर की सफाई के मामले में थर्ड डिवीजन आई है।
दम तोड़ गए भाजपा नेताओं के सफाई व स्वच्छता के दावे
एक तरफ पीएम मोदी सफाई व स्वच्छता पर जोर दे रहे हैं लेकिन भाजपाई रोहतक शहर में उनके सफाई के सपने को साकार नहीं कर सके। उल्टा रोहतक 2015 के मुकाबले छह कदम पीछे चला गया। यह हाल तब है जब प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर का जन्म रोहतक जिले के गांव निंदाना में हुआ था जबकि पालन पोषण जिले के ही गांव बनियानी में हुआ है। साथ ही लंबे समय तक संघ में रहते हुए उनकी कर्म स्थली रोहतक शहर ही रहा है।
वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु हिसार के नारनौंद हलके से विधायक हैं लेकिन शहर के सेक्टर 14 में रहते हैं। शहरी निकाय मंत्री कविता जैन चाहे सोनीपत से विधायक हैं लेकिन उनका मायका रोहतक के रेलवे रोड पर है। प्रदेश के सहकारिता व शहरी निकाय राज्य मंत्री मनीष ग्रोवर सिटी से ही विधायक हैं। इसके बावजूद सफाई व स्वच्छता के मामले में रोहतक आगे बढ़ने की बजाए पीछे जा रहा है।
सॉलिड वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट की नाकामी पड़ी भारी
शहर में हर रोज 50 टन कचरा निकालता है। इसे पहले जींद रोड पर डाला जाता था। नजदीक की शिक्षण संस्था की आपत्ति के बाद पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कार्यकाल में भिवानी रोड पर 10 साल पहले सॉलिड वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट की आधारशिला रखी गई थी। प्लांट 2016 में आकर चालू हो सका। दिल्ली की एक एजेंसी को प्लांट संचालन का जिम्मा दिया गया। नगर निगम और कंपनी के बीच हुए विवाद के बाद एजेंसी भी प्लांट बंद करके चली गई। स्वच्छता व सफाई के सर्वे को लेकर यह भी देखा जाता है कि किस तरह शहर में कहां-कहां डस्टबिन रखे हैं। वहां से कूड़ा किस तरह लिफ्ट करके ले जाया जाता है। उसके कंपोजिंग की क्या व्यवस्था है। प्लांट बंद होने के कारण भिवानी रोड पर कूड़े के ढेर लगे हैं। इस कारण भी निगम को बहुत कम अंक मिले।
सार्वजनिक शौचालयों की कमी
शहर में मेडिकल मोड़ पर ही सार्वजनिक शौचालय है। पुराने शहर खासकर पुराना बस स्टैंड, दुर्गा भवन, भिवानी स्टैंड, रेलवे रोड, किला रोड, झज्जर रोड व शांतमई चौक तक सार्वजनिक शौचालय की लंबे समय से कमी महसूस की जा रही है। निगम अभी तक नए शौचालय नहीं बनवा सका है।
आधे शहर में सीवरेज ही नहीं
मार्च माह के प्रथम सप्ताह में मेयर रेनू डाबला ने पार्षदों से सीवरेज का लेकर रिपोर्ट मांगी थी। जांच में पाया कि 2013 में पास हुई 34 कालोनियों, वार्ड नंबर 1,2,3,4,7,8 और 20 के काफी एरिया में सीवरेज लाइन नहीं है। साथ ही पुराने शहर व गांधी कैंप इलाके में सीवरेज लाइन तो हैं, लेकिन सफाई न होने से ब्लाक रहती हैं। इसके चलते गंदा पानी सड़कों पर खड़ा रहता है।
भाजपा केवल बातें करती है, सर्वे ने खोली पोल
प्रदेश की भाजपा सरकार व उसके मंत्री केवल बातें करते हैं। धरातल पर काम नहीं करते। यही कारण है कि रोहतक सफाई के मामले में दो साल में सात कदम पीछे चला गया। केंद्र की भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुए सर्वे ने सरकार की पोल खोल दी है।
दीपेंद्र हुड्डा, सांसद, रोहतक।
अम्रुत योजना से शहर बनेगा क्लीन
प्रदेश के अंदर ज्यादातर शहरों की रैंकिंग में सुधार हुआ है। इससे वे पूरी तरह संतुष्ट हैं। रोहतक सहित कई शहर सफाई के मामले में पिछडे़ हैं। अम्रुत योजना के तहत शहरों को क्लीन किया जाएगा।
कविता जैन, शहरी निकाय मंत्री।
पहले से बेहतर हुआ है हमारा शहर
हमारा रोहतक पहले से काफी साफ सुथरा हुआ है, शहरवासी भी इसमें पूरा सहयोग दे रहे हैं। यह हम सबका कर्तव्य है कि हम अपने शहर को और अधिक सुंदर बनाएं जिससे हमें गर्व हो कि हम प्रदेश ही नहीं देश के सबसे स्वच्छ शहर में रहते हैं। पूर्व सरकार के कार्यकाल में शहर के क्या हालात थे यह सब जानते हैं। भाजपा सरकार इस ओर पूरी ईमानदारी से काम कर रही है। सर्वे टीम के अपने पैरामीटर हैं उन पर खरा उतरने के लिए भविष्य में और अधिक ध्यान दिया जाएगा।
मनीष ग्रोवर, सहकारिता मंत्री।
हर किसी के अपने-अपने तर्क
मैंने अभी निगम कार्यभार संभाला है। गुरुग्राम में कमिश्नर रहते हुए काफी सुधार करवाया था। रोहतक में भी सफाई पर विशेष जोर दिया जा रहा है। पिछले तीन दिन से विशेष सफाई अभियान चल रहा है। अगली बार काफी सुधार देखने को मिलेगा।
प्रदीप कुमार, निगम आयुक्त व एडीसी
निगम में 20 प्रतिशत एरिया ग्रामीण क्षेत्र का शामिल है। दूसरा 10 प्रतिशत एरिया में स्लम बस्ती हैं। दोनों तरह उच्च स्तर की सफाई व्यवस्था बनाने में समय लगेगा। पहले निगम के पास सफाई कर्मियों की कमी थी। अब तीन माह से हालात में सुधार आया है। अगली बार रैंकिंग में सुधार देखने को मिलेगा।
रेनू डाबला, मेयर, नगर निगम।