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सरकार ने काला पीलिया को पूरी तरह समाप्त करने के लिए छिपे मरीजों की पहचान के लिए बनाई योजना
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पीजीआई के ओपीडी में पर्ची बनवाने के लिए कतार में लगे मरीज
रोहतक। प्रदेश में काला पीलिया को जड़ से समाप्त करने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। इसके लिए सभी सरकारी अस्पतालों में हेपेटाइटिस - बी व सी के छिपे हुए मरीजों की स्क्रीनिंग की जाएगी। केंद्र सरकार के इस उपक्रम के तहत प्रदेश के विभिन्न जिलों के लिए जांच किट भी मुहैया करा दी गई हैं। इस दौरान गर्भवती महिलाओं, टीबी मरीज, एचआईवी पीड़ित, बंदी, हाईरिस्क व अल्कोलिक लोगों की जांच अनिवार्य की है। इनमें संक्रमण की संभावना ज्यादा रहती है। स्वास्थ्य विभाग काला पीलिया के प्रति लोगों को जागरूक करेंगा। इसके अलावा कैंप के जरिये भी ऐसे रोगियों की पहचान की जाएगी।
पीजीआई में हर दिन आ रहे दस मरीज
काला पीलिया के शुरुआती समय में स्पष्ट लक्षण नहीं हैं। इस कारण अक्सर मरीज को अपनी बीमारी का पता ही नहीं लग पाता है। अक्सर किसी अन्य बीमारी का इलाज कराने या रक्तदान के बाद मरीज में काला पीलिया की स्थिति का पता लगता है। पीजीआई काला पीलिया के रोजाना औसतन दस नए मरीज सामने आ रहे हैं। इनमें से करीब तीन से चार मरीज केवल रक्तदान करने के बाद सामने आते हैं।
समय रहते बीमारी की पहचान व इलाज जरूरी
हेपेटाइटिस की बीमारी की शुरुआत में ही पहचान संभव नहीं है। अक्सर काफी देर बाद खासकर लीवर पर दबाव पड़ने पर मरीज अस्पताल पहुंचता है। उस समय काफी देर हो चुकी है। ऐसे में इस बीमारी की समय रहते पहचान जरूरी है। इसके लिए स्क्रीनिंग सबसे बेहतर व कारगर उपाय है।
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4 तरह का होता है हेपेटाइटिस
हेपेटाइटिस चार तरह का होता है। हेपेटाइटिस ए व ई, दूषित पेयजल व खाने से होता है। जबकि हेपेटाइटिस-बी व सी संक्रमण से फैलता है। यह मुख्यत: खून के फैलता है। संक्रमित खून चढ़ने या खून में संक्रमण होने से यह बीमारी होती है। इसके बड़े कारण डायलसिस, संक्रमित खून, बार-बार इंजेक्शन लगाना, संक्रमित रेजर इस्तेमाल करना है।
पहले साल एक - एक लाख मरीजों की स्क्रीनिंग
हेपेटाइटिस - बी व सी के छिपे हुए मरीजों की पहचान के लिए सरकार ने लक्ष्य तय किया है। योजना के तहत इस साल एक लाख हेपेटाइटिस - बी व एक लाख हेपेटाइटिस - सी के मरीजों की स्क्रीनिंग करनी है। इसके बाद अगले वर्ष का लक्ष्य जारी किया जाएगा। स्क्रीनिंग के लिए जिला स्तर पर दो हजार व पीजीआई के लिए पांच हजार किट मुहैया कराई गई हैं। इन जांच कैंप के जरिये काला पीलिया के मरीजों का डाटा तैयार होगा। इससे सरकार समय पर मरीजों के लिए पर्याप्त मात्रा में दवा की व्यवस्था कर सकेगी।
ये हैं लक्षण
- लीवर पर दबाव आना।
- आंखों में पीलिया आना।
- पेट में पानी भर जाना।
- पांवों में सूजन आना।
- खून की उल्टी आना।
- शौच में खून आना।
- शरीर में खून की कमी।
- शरीर का कमजोर होना।
औसतन दस मरीज रोजाना सामने आ रहे हैं
पीजीआई के जीवन रेखा कार्यक्रम की सफलता के बाद सरकार ने नेशनल वायरल हेपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम (एनवीएचसीपी) शुरू किया है। इसके तहत प्रदेश में काला पीलिया के मरीजों को फ्री दवा दी जा रही है। पीजीआई रोजाना औसतन दस नए काला पीलिया के मरीज सामने आ रहे हैं। इन्हें सरकारी योजना के तहत निशुल्क इलाज व जांच मुहैया कराई जा रही है। इस सफलता का श्रेय प्रदेश सरकार व कुलपति डॉ. ओपी कालरा को जाता है।
- डॉ. प्रवीण मल्होत्रा, सीनियर प्रोफेसर एवं इंचार्ज, माडल ट्रीटमेंट सेंटर, पीजीआईएमएस।
किट मुहैया कराई गई है
हेपेटाइटिस - बी व सी के मरीजों की पहचान के लिए स्क्रीनिंग की जाएगी। इसके लिए मुख्यालय से किट मुहैया कराई गई हैं। हेपेटाइटिस के कारण लीवर कैंसर व सिरोसिस रोग (लीवर काम करना बंद कर देता है) का खतरा बढ़ जाता है। अस्पताल में आने वाले मरीजों जिनमें गर्भवती महिलाओं, टीबी मरीज, एचआईवी, बंदी, हाईरिस्क व अल्कोहलिक मरीजों की जांच अनिवार्य रूप से की जाएगी।
- डॉ. अनिल बिरला, सिविल सर्जन, रोहतक।
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पीजीआई में हर दिन आ रहे दस मरीज
काला पीलिया के शुरुआती समय में स्पष्ट लक्षण नहीं हैं। इस कारण अक्सर मरीज को अपनी बीमारी का पता ही नहीं लग पाता है। अक्सर किसी अन्य बीमारी का इलाज कराने या रक्तदान के बाद मरीज में काला पीलिया की स्थिति का पता लगता है। पीजीआई काला पीलिया के रोजाना औसतन दस नए मरीज सामने आ रहे हैं। इनमें से करीब तीन से चार मरीज केवल रक्तदान करने के बाद सामने आते हैं।
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समय रहते बीमारी की पहचान व इलाज जरूरी
हेपेटाइटिस की बीमारी की शुरुआत में ही पहचान संभव नहीं है। अक्सर काफी देर बाद खासकर लीवर पर दबाव पड़ने पर मरीज अस्पताल पहुंचता है। उस समय काफी देर हो चुकी है। ऐसे में इस बीमारी की समय रहते पहचान जरूरी है। इसके लिए स्क्रीनिंग सबसे बेहतर व कारगर उपाय है।
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4 तरह का होता है हेपेटाइटिस
हेपेटाइटिस चार तरह का होता है। हेपेटाइटिस ए व ई, दूषित पेयजल व खाने से होता है। जबकि हेपेटाइटिस-बी व सी संक्रमण से फैलता है। यह मुख्यत: खून के फैलता है। संक्रमित खून चढ़ने या खून में संक्रमण होने से यह बीमारी होती है। इसके बड़े कारण डायलसिस, संक्रमित खून, बार-बार इंजेक्शन लगाना, संक्रमित रेजर इस्तेमाल करना है।
पहले साल एक - एक लाख मरीजों की स्क्रीनिंग
हेपेटाइटिस - बी व सी के छिपे हुए मरीजों की पहचान के लिए सरकार ने लक्ष्य तय किया है। योजना के तहत इस साल एक लाख हेपेटाइटिस - बी व एक लाख हेपेटाइटिस - सी के मरीजों की स्क्रीनिंग करनी है। इसके बाद अगले वर्ष का लक्ष्य जारी किया जाएगा। स्क्रीनिंग के लिए जिला स्तर पर दो हजार व पीजीआई के लिए पांच हजार किट मुहैया कराई गई हैं। इन जांच कैंप के जरिये काला पीलिया के मरीजों का डाटा तैयार होगा। इससे सरकार समय पर मरीजों के लिए पर्याप्त मात्रा में दवा की व्यवस्था कर सकेगी।
ये हैं लक्षण
- लीवर पर दबाव आना।
- आंखों में पीलिया आना।
- पेट में पानी भर जाना।
- पांवों में सूजन आना।
- खून की उल्टी आना।
- शौच में खून आना।
- शरीर में खून की कमी।
- शरीर का कमजोर होना।
औसतन दस मरीज रोजाना सामने आ रहे हैं
पीजीआई के जीवन रेखा कार्यक्रम की सफलता के बाद सरकार ने नेशनल वायरल हेपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम (एनवीएचसीपी) शुरू किया है। इसके तहत प्रदेश में काला पीलिया के मरीजों को फ्री दवा दी जा रही है। पीजीआई रोजाना औसतन दस नए काला पीलिया के मरीज सामने आ रहे हैं। इन्हें सरकारी योजना के तहत निशुल्क इलाज व जांच मुहैया कराई जा रही है। इस सफलता का श्रेय प्रदेश सरकार व कुलपति डॉ. ओपी कालरा को जाता है।
- डॉ. प्रवीण मल्होत्रा, सीनियर प्रोफेसर एवं इंचार्ज, माडल ट्रीटमेंट सेंटर, पीजीआईएमएस।
किट मुहैया कराई गई है
हेपेटाइटिस - बी व सी के मरीजों की पहचान के लिए स्क्रीनिंग की जाएगी। इसके लिए मुख्यालय से किट मुहैया कराई गई हैं। हेपेटाइटिस के कारण लीवर कैंसर व सिरोसिस रोग (लीवर काम करना बंद कर देता है) का खतरा बढ़ जाता है। अस्पताल में आने वाले मरीजों जिनमें गर्भवती महिलाओं, टीबी मरीज, एचआईवी, बंदी, हाईरिस्क व अल्कोहलिक मरीजों की जांच अनिवार्य रूप से की जाएगी।
- डॉ. अनिल बिरला, सिविल सर्जन, रोहतक।