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Rohtak News: ‘थारा फूफा जिंदा है’ टाइटल मामले में सुनवाई 8 मई को
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कोर्ट में पेशी के बाद बाहर आते सामाजिक कार्यकर्ता नवीन जयहिंद और 104 वर्षीय दादा दुलीचंद। संवाद
रोहतक। 'थारा फूफा जिंदा है' टाइटल को लेकर दायर याचिका के जवाब में शुक्रवार को हरियाणवी एप के ब्रांड एंबेसडर ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा, डायरेक्टर संजय भसीन, विश्वास चौहान, हरीश छाबड़ा के वकील कोर्ट में पेश होकर अदालत में जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। अदालत ने आठ मई तक जवाब देने के लिए तिथि तय की है।
अपनी पेंशन काटे जाने के विरोध में 'थारा फूफा जिंदा है' आंदोलन करने वाले करीब 104 वर्षीय दादा दुलीचंद बुधवार को मानसरोवर पार्क स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा के पास पहुंचे थे। यहां से रथ में सवार होकर रोहतक कोर्ट गए। रथ पर सारथी बनकर नवीन जयहिंद उनके साथ रहे। उनका आरोप है कि एप संचालकों ने अपनी फिल्म में उनके आंदोलन का कंटेंट चुराया है। इस संबंध में कोर्ट में फिल्म के खिलाफ याचिका दायर की है। अदालत ने पांच लोगों को नोटिस भेजकर 12 अप्रैल तक जवाब मांगा था।
दादा दुलीचंद बोले, लड़ाई मान सम्मान की है , पैसे की नहीं, सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे
अदालत से बाहर आए गांधरा निवासी दादा दुलीचंद ने कहा कि उनकी यह लड़ाई मान-सम्मान की है, पैसे के लिए नहीं है। पैसा किसी गौशाला में दान कर दिया जाए। वहीं, सामाजिक कार्यकर्ता नवीन जयहिंद ने कहा कि 104 वर्षीय दादा दुलीचंद ने 2 साल पहले थारा फूफा जिंदा है मुहिम चलाई थी। इसके बाद प्रदेश के बुजुर्गों, दिव्यांग और विधवाओं की पेंशन बनाई गई। सरकारी कागजों में सरकार ने इन्हें मरा हुआ दिखाया था और इसी को लेकर तब इन्होंने संघर्ष किया था और यह अभियान चलाया। उन्होंने अदालत को बताया कि पूरी दुनिया में सबसे पहले थारा फूफा जिन्दा है की मुहिम दादा दुलीचंद के साथ उन्होंने चलाई थी। इस एप ने व्यवसायिक तौर पर यह शब्द इस्तेमाल किए हैं। अगर वे गलत साबित होते है तो कोर्ट चाहे तो बेशक नवीन जयहिंद पर जुर्माना लगा दे।
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अपनी पेंशन काटे जाने के विरोध में 'थारा फूफा जिंदा है' आंदोलन करने वाले करीब 104 वर्षीय दादा दुलीचंद बुधवार को मानसरोवर पार्क स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा के पास पहुंचे थे। यहां से रथ में सवार होकर रोहतक कोर्ट गए। रथ पर सारथी बनकर नवीन जयहिंद उनके साथ रहे। उनका आरोप है कि एप संचालकों ने अपनी फिल्म में उनके आंदोलन का कंटेंट चुराया है। इस संबंध में कोर्ट में फिल्म के खिलाफ याचिका दायर की है। अदालत ने पांच लोगों को नोटिस भेजकर 12 अप्रैल तक जवाब मांगा था।
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दादा दुलीचंद बोले, लड़ाई मान सम्मान की है , पैसे की नहीं, सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे
अदालत से बाहर आए गांधरा निवासी दादा दुलीचंद ने कहा कि उनकी यह लड़ाई मान-सम्मान की है, पैसे के लिए नहीं है। पैसा किसी गौशाला में दान कर दिया जाए। वहीं, सामाजिक कार्यकर्ता नवीन जयहिंद ने कहा कि 104 वर्षीय दादा दुलीचंद ने 2 साल पहले थारा फूफा जिंदा है मुहिम चलाई थी। इसके बाद प्रदेश के बुजुर्गों, दिव्यांग और विधवाओं की पेंशन बनाई गई। सरकारी कागजों में सरकार ने इन्हें मरा हुआ दिखाया था और इसी को लेकर तब इन्होंने संघर्ष किया था और यह अभियान चलाया। उन्होंने अदालत को बताया कि पूरी दुनिया में सबसे पहले थारा फूफा जिन्दा है की मुहिम दादा दुलीचंद के साथ उन्होंने चलाई थी। इस एप ने व्यवसायिक तौर पर यह शब्द इस्तेमाल किए हैं। अगर वे गलत साबित होते है तो कोर्ट चाहे तो बेशक नवीन जयहिंद पर जुर्माना लगा दे।
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