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प्रदेश में अब सभी को मिलेगा काला पीलिया का मुफ्त उपचार

Thu, 19 Jan 2017 02:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक Updated Thu, 19 Jan 2017 02:25 AM IST
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hapatitis medicine free in haryana, jaundice treatment, rohak pgi, bjp government
Medical tourism - फोटो : file photo
स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज की पहल पर स्वास्थ्य विभाग प्रदेश को काला पीलिया मुक्त करने की ओर अग्रसर है। पहले प्रदेश के एससी और बीपीएल परिवार को निशुल्क और सामान्य वर्ग को सरकारी कीमत पर सस्ता उपचार दिया जा रहा था। लेकिन अब सभी को काला पीलिया का निशुल्क उपचार दिया जाएगा। इस संबंध में डायरेक्टर जरनल हेल्थ सर्विसज (डीजीएचएस) ने 18 जनवरी को प्रदेश के सभी सिविल सर्जन को पत्र जारी कर दिया है। 
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डीजीएचएस ने अपने पत्र में सभी जिलों के सिविल सर्जन से कहा है कि वे अपने जिलों के काला पीलिया के मरीजों की संख्या के हिसाब से छह माह की दवा की डिमांड भेज दें। इसमें उन्हीं मरीजों के लिए दवा की डिमांड भेजी जाएगी, जिनके पास हरियाणा का रिहायशी प्रमाण पत्र होगा। स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने एससी और बीपीएल परिवार के साथ सभी वर्ग के काला पीलिया के रोगियों को निशुल्क उपचार देने का निर्णय लिया है। गौरतलब है कि हरियाणा मेडिकल सर्विस कारपोरेशन के एमडी ने डीजीएचएस को 22 दिसंबर 2016 को पत्र जारी कर इस संबंध में निर्देश जारी किए थे। अब यह योजना धरातल पर कार्यान्वित होने जा रही है।
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पड़ोसी राज्यों के मरीजों की बढे़ंगी मुश्किलें
पीजीआईएमएस रोहतक में राजस्थान, पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड तक के काला पीलिया के मरीज उपचार के लिए आते हैं। हरियाणा के सामान्य वर्ग के लिए निर्धारित कम कीमत का काला पीलिया का उपचार उन्हें उपलब्ध हो जाता था। अब सामान्य वर्ग का भी निशुल्क उपचार होने से सरकार का दवा कंपनियों से बाजार में दवा उपलब्ध कराने का कांट्रेक्ट खत्म हो जाएगा। इसके चलते बाहरी राज्यों से आने वाले मरीजों को महंगा उपचार लेना पड़ेगा। चिकित्सकों की मानें तो 15 से 20 मरीज प्रतिदिन ओपीडी में उत्तराखंड, दिल्ली, यूपी, राजस्थान, पंजाब से काला पीलिया के आते हैं। 
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लिवर खराब होने के साथ मौत तक का भय 
काला पीलिया का उपचार नहीं होने से मरीज का लिवर खराब हो जाता है। इसके बाद मरीज की मौत होने का भय रहता है। लिवर खराब होने पर उसे बदलवाने की जरूरत पड़ती है, इसके लिए मरीज को तकरीबन 25 लाख रुपये और डोनर की जरूरत पड़ती है। सरकार की योजना से प्रदेश के लाखों लोगों की जान बचाई जा सकेगी। 

मई 2016 में बंद हो गई थी दवा 
मई 2016 में एससी और बीपीएल परिवार के लोगों के लिए काला पीलिया की दवा सरकारी स्टाक में आनी बंद हो गई थी। डेढ़ माह पहले करीब 25 प्रतिशत मरीजों के लिए दवा आई। इस दौरान सामान्य वर्ग का सरकार द्वारा तय कीमत पर उपचार होता रहा। प्रदेश में काला पीलिया के लाखों मरीज हैं।


सबसे अधिक फतेहाबाद, कैथल, जींद, नरवाना, असंध, करनाल, सोनीपत, समालखा और पानीपत में हैं। पीजीआई में काला पीलिया का तीन माह का उपचार 18 हजार रुपये में हो रहा था, इसमें तीन से चार जांच भी शामिल थीं। इसके लिए जिला अस्पताल से मरीजों को सिविल सर्जन से रेफर करवा कर रोहतक पीजीआईएमएस आना पड़ता था। अब मरीजों को जिला स्तर पर ही दवा मिल सकेगी। 
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