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गतका पार्टी ने दिखाए हैरतअंगेज करतब
ब्यूरो/अमर उजाला,रोहतक
Updated Wed, 23 Mar 2016 02:05 AM IST
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गुरुद्वारा मंजी साहिब
- फोटो : amar ujala
गुरुद्वारा मंजी साहिब में मंगलवार को 66वां होला मोहल्ला पर्व मनाया गया। गुरुद्वारे में लगे मेले में पूरे प्रदेश की सिख संगत ने आकर शीश नवाया। सुबह मार्शल आर्ट, गतका और घुड़सवारी से सिखों ने हैरतअंगेज करतब दिखाए। इसके बाद शबद कीर्तन और अखंड पाठ के माध्यम से गुर महिमा का गुणगान किया गया। गुरुद्वारे में लंगर भी लगाया गया जिसमें साध-संगत ने प्रसाद छका।
यह पर्व गुरु गोबिंद सिंह की देन
जींद जिले के दामनवाला निवासी कृष्ण सिंह एवं दिल्ली से आए सरदार कुलदीप सिंह ने बताया कि यह पर्व गुरु गोबिंद सिंह ने शुरू किया। होली के त्यौहार में और अधिक रंग और उल्लास भरने के उद्देश्य से उन्होंने इस होला महल्ला पर्व की शुरुआत की।
गुरु तेग बहादुर की याद में बना मंजी गुरुद्वारा
अमृतसर से दिल्ली जाते समय गुरु तेग बहादुर सिंह लाखनमाजरा में लगभग 13 दिन रुके। इस दौरान गांव में भरपूर अमनचैन देखकर उन्होंने सोचा कि यह जगह तो शांति और भाईचारे का प्रतीक होनी चाहिए। वर्तमान में उसी स्थान पर गुरुद्वारा मंजी साहिब बना है।
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जुल्म न करने का दिया संदेश
पर्व की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कृष्ण सिंह ने बताया कि लोगों में देशभक्ति एवं भाईचारे को बनाए रखना ही गुरु गोविंद का मूलमंत्र था। यही कारण है कि उन्होंने जुल्म न करने और न ही उसे सहने की शिक्षा दी।
गांव में नहीं है एक भी सिख परिवार
तपा प्रधान सुरेश राठी बताते हैं कि गांव में एक भी सिख परिवार नहीं होने के बावजूद यह गुरुद्वारा आपसी सौहार्द की मिशाल पेश कर रहा है। मोहल्ला पर्व पर सभी ग्रामीण इस पर्व में शरीक होते हैं। इसके अलावा हर पूर्णमासी लगने वाले भंडारे में ग्रामीण अपना सहयोग देते हैं। गुरुद्वारे के ठीक सामने प्राचीन श्रीराम मंदिर है। ग्रामीणों की दोनों धर्मस्थलों के प्रति गहरी आस्था है।
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यह पर्व गुरु गोबिंद सिंह की देन
जींद जिले के दामनवाला निवासी कृष्ण सिंह एवं दिल्ली से आए सरदार कुलदीप सिंह ने बताया कि यह पर्व गुरु गोबिंद सिंह ने शुरू किया। होली के त्यौहार में और अधिक रंग और उल्लास भरने के उद्देश्य से उन्होंने इस होला महल्ला पर्व की शुरुआत की।
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गुरु तेग बहादुर की याद में बना मंजी गुरुद्वारा
अमृतसर से दिल्ली जाते समय गुरु तेग बहादुर सिंह लाखनमाजरा में लगभग 13 दिन रुके। इस दौरान गांव में भरपूर अमनचैन देखकर उन्होंने सोचा कि यह जगह तो शांति और भाईचारे का प्रतीक होनी चाहिए। वर्तमान में उसी स्थान पर गुरुद्वारा मंजी साहिब बना है।
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जुल्म न करने का दिया संदेश
पर्व की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कृष्ण सिंह ने बताया कि लोगों में देशभक्ति एवं भाईचारे को बनाए रखना ही गुरु गोविंद का मूलमंत्र था। यही कारण है कि उन्होंने जुल्म न करने और न ही उसे सहने की शिक्षा दी।
गांव में नहीं है एक भी सिख परिवार
तपा प्रधान सुरेश राठी बताते हैं कि गांव में एक भी सिख परिवार नहीं होने के बावजूद यह गुरुद्वारा आपसी सौहार्द की मिशाल पेश कर रहा है। मोहल्ला पर्व पर सभी ग्रामीण इस पर्व में शरीक होते हैं। इसके अलावा हर पूर्णमासी लगने वाले भंडारे में ग्रामीण अपना सहयोग देते हैं। गुरुद्वारे के ठीक सामने प्राचीन श्रीराम मंदिर है। ग्रामीणों की दोनों धर्मस्थलों के प्रति गहरी आस्था है।