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सरकार का फैसला विश्वविद्यालय की स्वायत्तता पर हमला
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राज्य सरकार के फैसले को विश्वविद्यालय की स्वायत्तता पर हमला बताते हुए एमडीयू के शिक्षक और गैर शिक्षक कर्मचारी संघ इसके विरोध में आ गए हैं। दोनों ने एकजुट होकर सरकार के तुगलकी फरमान का विरोध करने का फैसला किया है।
एमडीयू के गैर शिक्षक कर्मचारी संघ की आमसभा की मीटिंग प्रधान रणधीर कटारिया की अगुवाई में हुई। उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव ने 8 अक्तूबर 2021 को पत्र जारी किया है, जिसके अनुसार अब सरकार विश्वविद्यालयों में भर्तियां कर सकेगी। इसका डटकर विरोध किया जाएगा। बैठक में यह भी फैसला लिया गया कि अगर विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद इस एजेंडे को लाती है तो उसका भी विरोध किया जाएगा, किसी भी सूरत में एजेंडा पास नहीं होने दिया जाएगा। बैठक में शिक्षक संघ ने भी गैर शिक्षक संघ को इस मुद्दे पर समर्थन का एलान किया। शिक्षक संघ के प्रधान डॉ. विकास, महासचिव डॉ. सुधीर कटारिया, कार्यकारी परिषद के सदस्य डॉ. सुरेंद्र यादव मौजूद रहे। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि अगर यह फैसला वापस न लिया गया तो पूरे प्रदेश में विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता बचाने के लिए शिक्षक, कर्मचारी और छात्र मिल कर संघर्ष करेंगे। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की नौकरियां अपने हाथ में लेना विश्वविद्यालय की स्वायत्तता पर हमला है। किसी भी सूरत में विश्वविद्यालय की स्वायत्तता पर हमला नहीं होने देंगे। कर्मचारियों ने कुलपति और कुलसचिव कार्यालय पर नारेबाजी की। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का हवाला देते हुए कुलपति को पत्र लिखा है। बैठक में उप प्रधान राजेश गिरधर, महासचिव रविंद्र लोहिया, सह सचिव रमेश रोहिल्ला, कोषाध्यक्ष विकास अहलावत, डॉ. सुरेश मलिक, फूल कुमार बोहत, कुलवंत मलिक, सुरेश कौशिक आदि मौजूद रहे।
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एमडीयू के गैर शिक्षक कर्मचारी संघ की आमसभा की मीटिंग प्रधान रणधीर कटारिया की अगुवाई में हुई। उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव ने 8 अक्तूबर 2021 को पत्र जारी किया है, जिसके अनुसार अब सरकार विश्वविद्यालयों में भर्तियां कर सकेगी। इसका डटकर विरोध किया जाएगा। बैठक में यह भी फैसला लिया गया कि अगर विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद इस एजेंडे को लाती है तो उसका भी विरोध किया जाएगा, किसी भी सूरत में एजेंडा पास नहीं होने दिया जाएगा। बैठक में शिक्षक संघ ने भी गैर शिक्षक संघ को इस मुद्दे पर समर्थन का एलान किया। शिक्षक संघ के प्रधान डॉ. विकास, महासचिव डॉ. सुधीर कटारिया, कार्यकारी परिषद के सदस्य डॉ. सुरेंद्र यादव मौजूद रहे। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि अगर यह फैसला वापस न लिया गया तो पूरे प्रदेश में विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता बचाने के लिए शिक्षक, कर्मचारी और छात्र मिल कर संघर्ष करेंगे। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की नौकरियां अपने हाथ में लेना विश्वविद्यालय की स्वायत्तता पर हमला है। किसी भी सूरत में विश्वविद्यालय की स्वायत्तता पर हमला नहीं होने देंगे। कर्मचारियों ने कुलपति और कुलसचिव कार्यालय पर नारेबाजी की। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का हवाला देते हुए कुलपति को पत्र लिखा है। बैठक में उप प्रधान राजेश गिरधर, महासचिव रविंद्र लोहिया, सह सचिव रमेश रोहिल्ला, कोषाध्यक्ष विकास अहलावत, डॉ. सुरेश मलिक, फूल कुमार बोहत, कुलवंत मलिक, सुरेश कौशिक आदि मौजूद रहे।
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