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गणपति महोत्सव : दो दिन में करें निरीक्षण, प्राण प्रतिष्ठा के बाद नहीं लगाने देंगे हाथ
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Sat, 03 Sep 2016 02:16 AM IST
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ganesha
- फोटो : amarujala
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दो दिन बाद गणपति महोत्सव शुरू होने वाला है। एक ओर बप्पा के भक्त दिनरात तैयारियों में मशगूल हैं तो दूसरी ओर गणेश विसर्जन को लेकर प्रशासन, साधु-संतों और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों में खींचतान शुरू हो गई है। प्रशासन की शर्त पर शहर में लगने वाले छोटे-बड़े पंडालों में कलाकारों से प्रमाणित मिट्टी की मूर्ति लाई जा रही है। इसके बावजूद प्रशासन जेएलएन नहर में विसर्जन की अनुमति नहीं दे रहा है।
इस बार भक्तों की भावनाओं से खिलवाड़ न हो, इसलिए साधु-संत आगे आ गए हैं। साधु-संतों ने प्रशासन को दो दिन का अल्टीमेटम दिया है। अगर दो दिन में प्रशासन ने पंडालों में स्थापित होने वाली मूर्तियों का निरीक्षण नहीं किया तो सोमवार को प्राण प्रतिष्ठा के बाद बप्पा की मूर्ति को हाथ नहीं लगाने देंगे। साथ ही जेएलएन नहर में विसर्जन करने से रोका तो धरना-प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है।
शहर के हर छोटे-बड़े मंदिरों और घरों में दो दिन बाद गणपति आने वाले हैं। आगामी 11 दिनों तक चलने वाले इस उत्सव को लेकर घर-घर में तैयारियां चल रही हैं। वहीं, डीसी और एसडीएम अभी तक विसर्जन के लिए स्थल तय नहीं कर पाए हैं। दोनों ही अधिकारी एक-दूसरे पर स्थान तय करने की जिम्मेदारी टाल रहे हैं। उधर, धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ भक्तों की भी विसर्जन को लेकर चिताएं बढ़कर गई हैं। भक्तों का कहना है कि वे इस बार अपनी धार्मिक भावना से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे। वे खासतौर से दिल्ली, कोलकाता और मुंबई से बप्पा की मूर्ति लेकर आ रहे हैं। इसलिए वे नहर में ही पूर्ण रूप से विधिविधान से देवा का विसर्जन करेंगे। अगर प्रशासन ने विसर्जन में बाधा डाली तो गणपति की प्रतिमा को लेकर नहर पर ही धरने पर बैठ जाएंगे और विसर्जन नहीं करेंगे।
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गौकर्ण तालाब में करेंगे विसर्जन, तभी मिलेगी अनुमति
इधर, श्री 78 संघ परिवार का प्रतिनिधिमंडल लगातार सात दिन से प्रशासनिक अधिकारियों से दुर्गा भवन मंदिर में गणेशोत्सव की अनुमति और जेएलएन नहर में विसर्जन की अनुमति देने के लिए मुलाकात कर रहा है। शुक्रवार को भी प्रतिनिधिमंडल ने एसडीएम डॉ. मुनीष नागपाल से बातचीत की तो उन्होंने कहा कि अभी डीसी से बात नहीं हो पाई है।
मामले में डीसी से बातचीत होेने के बाद ही स्थल तय करेंगे। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल पुलिस विभाग में नहर में विसर्जन देने की अनुमति लेने गया। वहां उनसे कहा गया कि वे लिखित में दें गौकर्ण डेरे के तालाब में ही विसर्जन करेंगे फिर उन्हें अनुमति दी जाएगी। संघ के मीडिया प्रवक्ता निपिन गुप्ता ने कहा कि वे तो मूर्ति कलाकार से प्रमाणित एक पत्र भी दे रहे हैं, जिसमें स्पष्ट लिखा है कि मूर्ति मिट्टी की है और इको फ्रैंडली रंगाें से बनाई गई है। इसके बाद भी उन्हें नहर में विसर्जन के लिए अनुमति नहीं मिल रही है।
कल तक करें निरीक्षण, फिर नहीं छूने देंगे
गणेश विसर्जन को लेकर भक्तों की भावनाओं से इस बार खिलवाड़ नहीं होने देंगे। पिछली बार प्रशासन ने विसर्जन से सात दिन पहले नेशनल ग्रीन ट्रीब्यूनल के आदेश दिखाकर गौकर्ण तालाब में विसर्जन करने दिया था। इस बार प्रशासन की शर्त पर ही पंडालों मेें मिट्टी के गणपति लाए जा रहे हैं, जोकि पीओपी मूर्ति से तीन गुणा महंगी पड़ती है। प्रशासन को दो दिन का समय दिया गया है कि वे अपनी टीम भेजकर मूर्तियों का निरीक्षण कर लें। सोमवार को पंडालों में मूर्ति स्थापना होने के बाद उसे छूने नहीं देंगे।
- स्वामी परम चैतन्य, अध्यक्ष, जन सेवा संस्थान।
साधु-संत देंगे साथ, नहीं होने देंगे अन्याय
पिछले साल गणपति विसर्जन को लेकर प्रशासन ने जो कुछ भी किया है, वे इस बार नहीं होने देंगे। इस बार साधु-संत बप्पा के भक्तों के साथ हैं और अन्याय नहीं होने देंगे। अगर मिट्टी से बनी मूर्तियों का विसर्जन जेएलएन नहर में नहीं करने दिया गया तो वहीं धरने पर बैठ जाएंगे। देशभर में यह त्योहार मनाया जाता है, जिसमें 80 प्रतिशत जगहों पर पीओपी की मूर्तियां स्थापित की जाती हैं। सभी का नहर में ही विसर्जन किया जाता है। केवल रोहतक में ही विसर्जन को लेकर भक्तों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
- महंत कर्णपुरी, डेरा बाबा बालकपुरी महाराज।
हिंदू धर्म की भावनाओं को ठेस न पहुंचाए प्रशासन
हिंदू धर्म में गणेश महोत्सव का विशेष स्थान है। प्रशासन भक्तों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का कार्य न करे। हर बार की तरह जेएलएन नहर में ही मूर्तियों का विसर्जन करने की अनुमति दे। उनके पास प्रशासन आया था कि गौकर्ण तालाब में इस बार विसर्जन करने दिया जाए। वे इस बार कोई जिम्मेदारी नहीं लेंगे। अगर पीओपी की मूर्तियां आती हैं तो जिम्मदारी प्रशासन की होगी। अगर प्रशासन जिम्मेदारी लेता है तो वह तैयार हैं।
- महंत कपिल पुरी, डेरा बाबा लक्ष्मणपुरी महाराज।
गणपति विसर्जन को लेकर अभी स्थल तय नहीं हो पाया है। विसर्जन स्थल तय करने की जिम्मेदारी एसडीएम की है और वे ही निर्धारित करेंगे।
- अतुल कुमार, जिला उपायुक्त।
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इस बार भक्तों की भावनाओं से खिलवाड़ न हो, इसलिए साधु-संत आगे आ गए हैं। साधु-संतों ने प्रशासन को दो दिन का अल्टीमेटम दिया है। अगर दो दिन में प्रशासन ने पंडालों में स्थापित होने वाली मूर्तियों का निरीक्षण नहीं किया तो सोमवार को प्राण प्रतिष्ठा के बाद बप्पा की मूर्ति को हाथ नहीं लगाने देंगे। साथ ही जेएलएन नहर में विसर्जन करने से रोका तो धरना-प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है।
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शहर के हर छोटे-बड़े मंदिरों और घरों में दो दिन बाद गणपति आने वाले हैं। आगामी 11 दिनों तक चलने वाले इस उत्सव को लेकर घर-घर में तैयारियां चल रही हैं। वहीं, डीसी और एसडीएम अभी तक विसर्जन के लिए स्थल तय नहीं कर पाए हैं। दोनों ही अधिकारी एक-दूसरे पर स्थान तय करने की जिम्मेदारी टाल रहे हैं। उधर, धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ भक्तों की भी विसर्जन को लेकर चिताएं बढ़कर गई हैं। भक्तों का कहना है कि वे इस बार अपनी धार्मिक भावना से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे। वे खासतौर से दिल्ली, कोलकाता और मुंबई से बप्पा की मूर्ति लेकर आ रहे हैं। इसलिए वे नहर में ही पूर्ण रूप से विधिविधान से देवा का विसर्जन करेंगे। अगर प्रशासन ने विसर्जन में बाधा डाली तो गणपति की प्रतिमा को लेकर नहर पर ही धरने पर बैठ जाएंगे और विसर्जन नहीं करेंगे।
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गौकर्ण तालाब में करेंगे विसर्जन, तभी मिलेगी अनुमति
इधर, श्री 78 संघ परिवार का प्रतिनिधिमंडल लगातार सात दिन से प्रशासनिक अधिकारियों से दुर्गा भवन मंदिर में गणेशोत्सव की अनुमति और जेएलएन नहर में विसर्जन की अनुमति देने के लिए मुलाकात कर रहा है। शुक्रवार को भी प्रतिनिधिमंडल ने एसडीएम डॉ. मुनीष नागपाल से बातचीत की तो उन्होंने कहा कि अभी डीसी से बात नहीं हो पाई है।
मामले में डीसी से बातचीत होेने के बाद ही स्थल तय करेंगे। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल पुलिस विभाग में नहर में विसर्जन देने की अनुमति लेने गया। वहां उनसे कहा गया कि वे लिखित में दें गौकर्ण डेरे के तालाब में ही विसर्जन करेंगे फिर उन्हें अनुमति दी जाएगी। संघ के मीडिया प्रवक्ता निपिन गुप्ता ने कहा कि वे तो मूर्ति कलाकार से प्रमाणित एक पत्र भी दे रहे हैं, जिसमें स्पष्ट लिखा है कि मूर्ति मिट्टी की है और इको फ्रैंडली रंगाें से बनाई गई है। इसके बाद भी उन्हें नहर में विसर्जन के लिए अनुमति नहीं मिल रही है।
कल तक करें निरीक्षण, फिर नहीं छूने देंगे
गणेश विसर्जन को लेकर भक्तों की भावनाओं से इस बार खिलवाड़ नहीं होने देंगे। पिछली बार प्रशासन ने विसर्जन से सात दिन पहले नेशनल ग्रीन ट्रीब्यूनल के आदेश दिखाकर गौकर्ण तालाब में विसर्जन करने दिया था। इस बार प्रशासन की शर्त पर ही पंडालों मेें मिट्टी के गणपति लाए जा रहे हैं, जोकि पीओपी मूर्ति से तीन गुणा महंगी पड़ती है। प्रशासन को दो दिन का समय दिया गया है कि वे अपनी टीम भेजकर मूर्तियों का निरीक्षण कर लें। सोमवार को पंडालों में मूर्ति स्थापना होने के बाद उसे छूने नहीं देंगे।
- स्वामी परम चैतन्य, अध्यक्ष, जन सेवा संस्थान।
साधु-संत देंगे साथ, नहीं होने देंगे अन्याय
पिछले साल गणपति विसर्जन को लेकर प्रशासन ने जो कुछ भी किया है, वे इस बार नहीं होने देंगे। इस बार साधु-संत बप्पा के भक्तों के साथ हैं और अन्याय नहीं होने देंगे। अगर मिट्टी से बनी मूर्तियों का विसर्जन जेएलएन नहर में नहीं करने दिया गया तो वहीं धरने पर बैठ जाएंगे। देशभर में यह त्योहार मनाया जाता है, जिसमें 80 प्रतिशत जगहों पर पीओपी की मूर्तियां स्थापित की जाती हैं। सभी का नहर में ही विसर्जन किया जाता है। केवल रोहतक में ही विसर्जन को लेकर भक्तों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
- महंत कर्णपुरी, डेरा बाबा बालकपुरी महाराज।
हिंदू धर्म की भावनाओं को ठेस न पहुंचाए प्रशासन
हिंदू धर्म में गणेश महोत्सव का विशेष स्थान है। प्रशासन भक्तों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का कार्य न करे। हर बार की तरह जेएलएन नहर में ही मूर्तियों का विसर्जन करने की अनुमति दे। उनके पास प्रशासन आया था कि गौकर्ण तालाब में इस बार विसर्जन करने दिया जाए। वे इस बार कोई जिम्मेदारी नहीं लेंगे। अगर पीओपी की मूर्तियां आती हैं तो जिम्मदारी प्रशासन की होगी। अगर प्रशासन जिम्मेदारी लेता है तो वह तैयार हैं।
- महंत कपिल पुरी, डेरा बाबा लक्ष्मणपुरी महाराज।
गणपति विसर्जन को लेकर अभी स्थल तय नहीं हो पाया है। विसर्जन स्थल तय करने की जिम्मेदारी एसडीएम की है और वे ही निर्धारित करेंगे।
- अतुल कुमार, जिला उपायुक्त।