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दूसरे दिन भी 23 शवों का अंतिम संस्कार
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कोरोना संक्रमित मरीजों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। लगातार दूसरे दिन वीरवार को रोहतक नगर निगम ने 23 शवों का अंतिम संस्कार करवाया। इसमें भिवानी के पांच-पांच माह के दो जुड़वा बच्चे भी शामिल हैं। इसके अलावा सबसे ज्यादा रोहतक के छह, दिल्ली के चार व सोनीपत के तीन शवों का अंतिम संस्कार किया गया है। 3 मई 2020 से 22 अप्रैल 2021 तक नगर निगम रोहतक कोरोना संक्रमित 574 शवों का दाह संस्कार कर चुका है।
प्रदेश का सबसे बड़ा चिकित्सा संस्थान पीजीआई रोहतक में ही है, जहां आसपास के जिलों से गंभीर मरीजों को भी दाखिल कराया जाता है। सरकार की हिदायतों के तहत कोरोना संक्रमित किसी भी मरीज की रोहतक में मौत होती है तो उसका अंतिम संस्कार नगर निगम रोहतक द्वारा किया जाएगा। करीब एक साल में नगर निगम अब तक साढ़े 500 से ज्यादा शवों का अंतिम संस्कार कर चुका है। इसमें रोहतक के अलावा आसपास के जिलों के शव भी शामिल हैं।
मरने वालों में बुजुर्गों के साथ बच्चे व युवा भी
कोरोना संक्रमण बुजुर्गों को ही नहीं, बच्चे व युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रहा है। बुधवार को रोहतक नगर निगम ने कोरोना प्रोटोकाल के तहत 23 शवों का अंतिम संस्कार किया था। वीरवार को भी शाम तक 23 शवों का अंतिम संस्कार किया गया। इसमें भिवानी के दो जुड़वा बच्चे भी हैं, जिनकी उम्र मात्र 5-5 माह थी। दोनों के शव हिंदू रीति-रिवाज के तहत दफनाए गए। वहीं, रोहतक के खेड़ी साध गांव का 27 साल के युवक से लेकर पलवल की 30 व भिवानी की 32 साल की महिला तक शामिल हैं।
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एक दिन में कहां के कितने शवों हुआ रोहतक में अंतिम संस्कार
नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि लगातार दूसरे दिन वीरवार को 23 शव निगम के पास संस्कार के लिए पहुंचे। इसमें 15 शवों का वैश्य संस्था के नजदीक श्मशान में जबकि 8 का जींद रोड स्थित शिव शंकर श्मशान भूमि में अंतिम संस्कार किया गया। जिन शवों का कोरोना प्रोटॉकाल के तहत संस्कार हुआ, उसमें रोहतक जिले के छह शव शामिल है। इसमें एक फरमाणा, एक गुढ़ान, एक नया बांस, एक खेड़ी साध, एक कंसाला व एक काठमंडी से है। जबकि दिल्ली के चार, भिवानी के दो बच्चों सहित चार, सोनीपत व झज्जर से तीन-तीन, जींद, पलवल व फतेहाबाद का एक-एक शव शामिल हैं।
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प्रदेश का सबसे बड़ा चिकित्सा संस्थान पीजीआई रोहतक में ही है, जहां आसपास के जिलों से गंभीर मरीजों को भी दाखिल कराया जाता है। सरकार की हिदायतों के तहत कोरोना संक्रमित किसी भी मरीज की रोहतक में मौत होती है तो उसका अंतिम संस्कार नगर निगम रोहतक द्वारा किया जाएगा। करीब एक साल में नगर निगम अब तक साढ़े 500 से ज्यादा शवों का अंतिम संस्कार कर चुका है। इसमें रोहतक के अलावा आसपास के जिलों के शव भी शामिल हैं।
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मरने वालों में बुजुर्गों के साथ बच्चे व युवा भी
कोरोना संक्रमण बुजुर्गों को ही नहीं, बच्चे व युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रहा है। बुधवार को रोहतक नगर निगम ने कोरोना प्रोटोकाल के तहत 23 शवों का अंतिम संस्कार किया था। वीरवार को भी शाम तक 23 शवों का अंतिम संस्कार किया गया। इसमें भिवानी के दो जुड़वा बच्चे भी हैं, जिनकी उम्र मात्र 5-5 माह थी। दोनों के शव हिंदू रीति-रिवाज के तहत दफनाए गए। वहीं, रोहतक के खेड़ी साध गांव का 27 साल के युवक से लेकर पलवल की 30 व भिवानी की 32 साल की महिला तक शामिल हैं।
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एक दिन में कहां के कितने शवों हुआ रोहतक में अंतिम संस्कार
नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि लगातार दूसरे दिन वीरवार को 23 शव निगम के पास संस्कार के लिए पहुंचे। इसमें 15 शवों का वैश्य संस्था के नजदीक श्मशान में जबकि 8 का जींद रोड स्थित शिव शंकर श्मशान भूमि में अंतिम संस्कार किया गया। जिन शवों का कोरोना प्रोटॉकाल के तहत संस्कार हुआ, उसमें रोहतक जिले के छह शव शामिल है। इसमें एक फरमाणा, एक गुढ़ान, एक नया बांस, एक खेड़ी साध, एक कंसाला व एक काठमंडी से है। जबकि दिल्ली के चार, भिवानी के दो बच्चों सहित चार, सोनीपत व झज्जर से तीन-तीन, जींद, पलवल व फतेहाबाद का एक-एक शव शामिल हैं।