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Rohtak News: बगैर लाइसेंस सामान बेच रहे खाद्य विक्रेता
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विकास सैनी
रोहतक।
खाद्य साम्रगी चयन में लापरवाही आपको बीमार बना सकती है। इसकी वजह गुणवत्ताहीन और मिलावटी सामान की बिक्री है। एफडीए (खाद्य एवं औषधी प्रशासक) विभाग रिपोर्ट यही बयां कर रही है। जिले में खाद्य सामग्री बेचने वाले ज्यादातर प्रतिष्ठान नियमाें के विरुद्ध खाद्य पदार्थ बेच रहे हैं। इनके पास न खाद्य सामग्री बेचने का लाइसेंस है न ही किसी ने पंजीकरण कराया है।
एक अनुमान के अनुसार, जिले में 250 से ज्यादा होटल, रेस्टोरेंट व ढाबे हैं। सब्जी-फल, किराना स्टोर, मिठाई की दुकान-गोदाम, चाय-दूध विक्रेताओं समेत करीब 5000 खाने का सामान बेचने वाले प्रतिष्ठान और गली नुक्कड़ पर लगने होने वाली करीब 4000 से ज्यादा रेहड़ियां हैं। विभाग की रिपोर्ट पर नजर डालें तो केवल 1830 खाद्य सामग्री विक्रेताओं ने एफएसएसए (फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट) के तहत पंजीकरण कराया है। यह संख्या भी साल में 12 लाख रुपये से कम टर्नओवर वालों की है। इसके अलावा 12 लाख से अधिक व 20 करोड़ रुपये सालाना कारोबार करने वाले 610 लोगों ने ही लाइसेंस लिया है। जबकि यह संख्या कहीं अधिक है। इसके अलावा 20 करोड़ रुपये सालाना टर्न ओवर से अधिक के लिए केंद्र से सेंट्रल लाइसेंस लेना अनिवार्य है। ऐसा नहीं होने पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान है।
6 माह की सजा व 5 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान
एफएसएसए (फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट) 2006 के तहत किसी भी तरह की खाद्य सामग्री बेचने के लिए नियमानुसार एफडीए विभाग से पंजीकरण या लाइसेंस लेना जरूरी है। ऐसा नहीं करने वाले विक्रेता को छह माह तक सजा व पांच लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है। इसके लिए विभाग को कार्रवाई का अधिकार है।
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यह है पंजीकरण या लाइसेंस शुल्क
- 2000 रुपये सालाना: खाद्य सामग्री के रिटेल विक्रेता।
- 2000 रुपये सालाना: खाद्य सामग्री के डिस्ट्रीब्यूटर।
- 3000 रुपये सालाना: 2 मीट्रिक टन तक मैन्यूफेक्चरर या उत्पादक।
- 5000 रुपये सालाना: 2 मीट्रिक टन से अधिक के मैन्यूफेक्चरर।
खाद्य सामग्री बेचने के लिए पंजीकरण कराना या लाइसेंस लेना जरूरी है। विभाग इसके लिए निर्धारित शुल्क जमा करा कर पंजीकरण संख्या या लाइसेंस जारी करता है। इससे खाद्य सामग्री में गड़बड़ी होने पर कार्रवाई करना आसान होता है। ग्राहक के लिए भी संबंधित विक्रेता पर कार्रवाई की अपील संभव होती है।
ओम कुमार, पदाभिहित अधिकारी (डीओ), दवा एवं औषधी प्रशासक।
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रोहतक।
खाद्य साम्रगी चयन में लापरवाही आपको बीमार बना सकती है। इसकी वजह गुणवत्ताहीन और मिलावटी सामान की बिक्री है। एफडीए (खाद्य एवं औषधी प्रशासक) विभाग रिपोर्ट यही बयां कर रही है। जिले में खाद्य सामग्री बेचने वाले ज्यादातर प्रतिष्ठान नियमाें के विरुद्ध खाद्य पदार्थ बेच रहे हैं। इनके पास न खाद्य सामग्री बेचने का लाइसेंस है न ही किसी ने पंजीकरण कराया है।
एक अनुमान के अनुसार, जिले में 250 से ज्यादा होटल, रेस्टोरेंट व ढाबे हैं। सब्जी-फल, किराना स्टोर, मिठाई की दुकान-गोदाम, चाय-दूध विक्रेताओं समेत करीब 5000 खाने का सामान बेचने वाले प्रतिष्ठान और गली नुक्कड़ पर लगने होने वाली करीब 4000 से ज्यादा रेहड़ियां हैं। विभाग की रिपोर्ट पर नजर डालें तो केवल 1830 खाद्य सामग्री विक्रेताओं ने एफएसएसए (फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट) के तहत पंजीकरण कराया है। यह संख्या भी साल में 12 लाख रुपये से कम टर्नओवर वालों की है। इसके अलावा 12 लाख से अधिक व 20 करोड़ रुपये सालाना कारोबार करने वाले 610 लोगों ने ही लाइसेंस लिया है। जबकि यह संख्या कहीं अधिक है। इसके अलावा 20 करोड़ रुपये सालाना टर्न ओवर से अधिक के लिए केंद्र से सेंट्रल लाइसेंस लेना अनिवार्य है। ऐसा नहीं होने पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान है।
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6 माह की सजा व 5 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान
एफएसएसए (फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट) 2006 के तहत किसी भी तरह की खाद्य सामग्री बेचने के लिए नियमानुसार एफडीए विभाग से पंजीकरण या लाइसेंस लेना जरूरी है। ऐसा नहीं करने वाले विक्रेता को छह माह तक सजा व पांच लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है। इसके लिए विभाग को कार्रवाई का अधिकार है।
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यह है पंजीकरण या लाइसेंस शुल्क
- 2000 रुपये सालाना: खाद्य सामग्री के रिटेल विक्रेता।
- 2000 रुपये सालाना: खाद्य सामग्री के डिस्ट्रीब्यूटर।
- 3000 रुपये सालाना: 2 मीट्रिक टन तक मैन्यूफेक्चरर या उत्पादक।
- 5000 रुपये सालाना: 2 मीट्रिक टन से अधिक के मैन्यूफेक्चरर।
खाद्य सामग्री बेचने के लिए पंजीकरण कराना या लाइसेंस लेना जरूरी है। विभाग इसके लिए निर्धारित शुल्क जमा करा कर पंजीकरण संख्या या लाइसेंस जारी करता है। इससे खाद्य सामग्री में गड़बड़ी होने पर कार्रवाई करना आसान होता है। ग्राहक के लिए भी संबंधित विक्रेता पर कार्रवाई की अपील संभव होती है।
ओम कुमार, पदाभिहित अधिकारी (डीओ), दवा एवं औषधी प्रशासक।