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किसानों को भारी पड़ा मानसून का भटकना, प्रति हेक्टेयर छह हजार रुपये तक बढ़ेगी लागत

Wed, 23 Jun 2021 02:18 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 23 Jun 2021 02:18 AM IST
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Farmers suffered heavy monsoon, cost will increase up to six thousand rupees per hectare
धान की रोपाई 15 जून से शुरू होती है। इस बार मानसून ने समय से पहले देश के दक्षिणी हिस्से में दस्तक दे दी थी। मौसम वैज्ञानिकों को उम्मीद थी कि 15-16 जून तक मानसून रोहतक भी पहुंच जाएगा। लेकिन पश्चिमी हवाओं से टकराने के बाद मानसून भटक गया। मानसून का भटकना जिले के किसानों को काफी भारी पड़ा है। उनकी धान उत्पादन की लागत करीब छह हजार रुपये प्रति हेक्टेयर बढ़ जाएगी।
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सरकार ने धान की रोपाई 15 जून से करने के आदेश दिए हैं। उससे पहले धान की सीधी बिजाई की जाती है। रोपाई के लिए किसान एक जून से पौध तैयार करते हैं, ताकि 15 जून से रोपाई कर सकें। पिछले साल जिले में धान का रकबा करीब 60 हजार हेक्टेयर था। जिले के किसान ट्यूबवेेल या नहरी पानी से सिंचाई करते हैं, जिनमें ट्यूबवेल पर निर्भर किसानों की संख्या काफी ज्यादा है। उनमें भी अधिकांश किसान डीजल से चलने वाली मोटरों का प्रयोग करते हैं क्योंकि जिले में खेतीबाड़ी ट्यूबवेल के लिए बिजली के कनेक्शन बहुत कम हैं। चुनिंदा किसानों ने सौर ऊर्जा प्लांट लगवाए हैं। इस साल समय से पहले अच्छे मानसून की संभावना जताई गई थी। किसानों को उम्मीद थी कि 15 जून को धान की रोपाई शुरू होने के समय मानसून की बारिश हो जाएगी। मानसून नहीं पहुंचा, पर किसानों के लिए रोपाई करना मजबूरी थी। कृषि विभाग की पिछले हफ्ते की साप्ताहिक रिपोर्ट के मुताबिक शुक्रवार तक जिले में 4200 हेक्टेयर में धान की रोपाई हो चुकी थी। मंगलवार तक यह रकबा और ज्यादा हो गया है क्योंकि किसान लगातार रोपाई कर रहे हैं। एक एकड़ में सिंचाई करने पर 30 लीटर डीजल लगता है, जिस पर करीब 2400 रुपये का खर्च आता है। इस तरह एक हेक्टेयर पर किसानों के छह हजार रुपये अतिरिक्त खर्च हुए हैं। अगर समय से बारिश आती पर ज्यादा नहीं होती, किसानों को ट्यूबवेल चलाना पड़ता तो भी दो हजार रुपये प्रति हेक्टेयर खर्च होते। इतना ही नहीं, अगर कुछ दिन बारिश न हुई तो खेतों में भरे पानी का तेज धूप से वाष्पीकरण हो जाएगा। किसानों को दोबारा पानी लगाना पड़ेगा, लागत और बढ़ेगी।
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10 हजार एकड़ कम करने का लक्ष्य
राज्य सरकार ने रोहतक जिले को धान का रकबा छह हजार एकड़ कम करने का लक्ष्य दिया था। मेरा पानी, मेरी विरासत योजना के तहत किसानों को धान की जगह वैकल्पिक फसलें को प्रोत्साहित करना था। बाद में रोहतक आए अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. राकेश गुप्ता ने वह लक्ष्य बढ़ाकर 10 हजार एकड़ कर दिया था। धान की जगह दूसरी फसलें लगाने वाले किसानों को सरकार सात हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि देगी। उनकी फसल एमएसपी पर खरीदी जाएगी, बीमा का प्रीमियम सरकार भरेगी। लेकिन इसकी सफलता की उम्मीद कम है क्योंकि सरकार ने जो वैकल्पिक फसलें दी हैं, उनमें से बाजरा हटा लिया है। बाकी फसलें जिले में होती ही नहीं हैं।
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220 हेक्टेयर में हुई सीधी बिजाई
गिरते भूजल स्तर के मद्देनजर कृषि विभाग धान की सीधी बिजाई को प्रोत्साहित करता है। लेकिन किसानों में इसके प्रति कोई रुझा नहीं है। बहुत ही कम किसान इस विधि को अपना रहे हैं। इस साल जिले में 220 हेक्टेयर रकबे में धान की सीधी बिजाई की गई है।
जिले में सबसे ज्यादा किसान डीजल से ट्यूबवेल चला कर सिंचाई करते हैं। अगर समय से बारिश नहीं होती है तो उनकी उत्पादन लागत बढ़ती है। बिजली के कनेक्शन सरकार जारी नहीं कर रही है, उन पर लागत कुछ कम आती है। नहरी पानी पर सबसे कम खर्च आता है।

- प्रीत सिंह, प्रधान, किसान सभा
धान की रोपाई शुरू होने तक मानसून के पहुंचने की उम्मीद थी, लेकिन अब तक जिले में बारिश नहीं हुई है। किसान ट्यूबवेल से सिंचाई कर रहे हैं, इससे उनकी उत्पादन लागत करीब छह हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तक बढ़ सकती है।
- डॉ. इंदर सिंह, उप निदेशक, कृषि विभाग
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