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Rohtak News: छुट्टियों का आनंद नहीं ले सका परिवार, होटल मालिक बुकिंग राशि लौटाए

Fri, 25 Apr 2025 02:41 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 25 Apr 2025 02:41 AM IST
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Family could not enjoy holidays, hotel owner returned booking amount
रोहतक। हिमाचल के हिल स्टेशन मशोबरा शहर की वन सिटी का परिवार होटल के कुप्रबंधन के चलते छुट्टियों का आनंद नहीं ले सका। जिला उपभोक्ता आयोग ने होटल मालिक पर 80 हजार रुपये हर्जाना लगाया है, साथ ही बुकिंग राशि 25,573 रुपये भी लौटानी होगी। आयोग के चेयरमैन नागेंद्र कादियान ने फैसले के बाद आदेश जारी कर दिए हैं।
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आयोग के मुताबिक, शहर के उत्तम विहार निवासी रुस्तम मलिक ने अगस्त 2023 में याचिका दायर की थी कि हिमाचल के हिल स्टेशन में परिवार सहित जाने के लिए एक होटल एवं रिसॉर्ट में दो कमरे बुक कराए थे। परिवार सहित वह होटल में पहुंचा, जहां काउंटर पर कर्मचारी ने कहा कि पार्किंग स्थल 200-300 मीटर नीचे गांव के पास है। चालक गाड़ी वहां खड़ी कर देगा। उसने चाबी दे दी। शाम 6:30 बजे कॉल आई कि चालक गाड़ी पर नियंत्रण नहीं रख सका और गाड़ी पहाड़ी से नीचे खाई में 100 फीट नीचे गिर गई।
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स्थानीय लोगों ने चालक को अस्पताल में दाखिल कराया है। क्रेन की मदद से रात 11 बजे कार को बाहर निकाला गया। जब उसने कार में हुए नुकसान की भरपाई के लिए कहा तो होटल मालिक ने इन्कार कर दिया। उसने पुलिस थाने में शिकायत दी। पूरे प्रकरण की वजह से उनका परिवार छुट्टियों का आनंद नहीं ले सका और कारोबार के सिलसिले में उसे फिलीपींस जाना था, वहां भी नहीं जा सका। उसने होटल मालिक से घर छोड़ने के लिए टैक्सी की व्यवस्था करने के लिए कहा। उसे जो कार उपलब्ध करवाई गई, उसकी हालत दयनीय थी। रास्ते में जब वे परवाणू के पास पहुंचे, तो चालक ने कहा कि कार 10 साल से अधिक पुरानी डीजल गाड़ी है। उसने रोहतक जाने से इन्कार कर दिया। इस तरह परिवार को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
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आयोग ने अर्जी पर होटल प्रबंधन को नोटिस भेजा। होटल मालिक ने कहा कि गलत व झूठे आरोप लगाए गए हैं। उसकी प्रतिष्ठा को खराब किया जा रहा है। आयोग ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद फैसला दिया है कि होटल शुल्क 25,573 रुपये याचिकाकर्ता को लौटाए जाएं। दोषपूर्ण सेवाओं के कारण परिवार को हुई परेशानी पर 25 हजार रुपये, सेवा में कमी पर 50 हजार रुपये व 5 हजार रुपये कानूनी खर्च होटल मालिक की ओर से दिए जाएं। आयोग के फैसले का एक माह में पालन किया जाए।

याचिकाकर्ता का कहना है कि उसकी क्षतिग्रस्त कार को करनाल स्थित वर्कशॉप में भेजा गया, जहां बीमा नियमों के तहत 5 माह बाद उसे एजेंसी ने ठीक करके दिया। इन पांच माह के दौरान अपने काम व व्यवसाय के लिए यात्रा करने के लिए महंगी कैब व टैक्सी बुक करनी पड़ी। उसे मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना भी झेलनी पड़ी।
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