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दो माह बाद भी किसानों को नहीं मिला मुआवजा.
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रोहतक। बारिश और जलभराव से बर्बाद हुई फसलों का मुआवजा अब तक जिले के किसानों को नहीं मिल सका। जबकि, स्पेशल गिरदावरी के बाद करीब दो माह पहले सरकार ने मुआवजा राशि जारी करने की घोषणा की थी। लेकिन जिला प्रशासन अब तक कागजी खानापूर्ति ही पूरी नहीं कर सका है।
अक्तूबर, नवंबर 2019 में बारिश और जलभराव से फसलों को काफी नुकसान हुआ था। सरकार के आदेश के बाद जिला प्रशासन ने पांच गांवों भगवतीपुर, समर गोपालपुर, घड़ौदी, चांदी, बसाना में स्पेशल गिरदावरी करवाई थी। जिसकी रिपोर्ट में सामने आया था कि इन गांवों में 1497 एकड़ धान की फसल को नुकसान पहुंचा था। उसके बाद रबी सीजन के दौरान फरवरी, मार्च 2020 में फिर बारिश से फसलों को नुकसान हुआ। जिला प्रशासन ने सात गांवों कन्हेली, मायना, शिमली, करौंथा, बालंद, खेड़ी साध और पहरावर में स्पेशल गिरदावरी करवाई थी। जिसकी रिपोर्ट में सामने आया था कि इन गांवों की 524 एकड़ रकबे में लगी फसलें बारिश और ओलों से बर्बाद हो गईं। किसान सभा ने कई बार जिला प्रशासन को ज्ञापन देकर मुआवजा जारी करवाने की मांग की। लेकिन प्रशासन का यही कहना था कि सरकार को रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। वहां से राशि जारी होते ही किसानों को मुआवजा दे दिया जाएगा। आखिर किसान सभा ने कोरोना काल के दौरान मुआवजे की मांग को लेकर पहले कई दिन तक लघु सचिवालय के बाहर धरना दिया, फिर बड़ा प्रदर्शन किया। जिसके बाद पांच जुलाई को सरकार ने किसानों के मुआवजे की राशि जारी कर दी। तत्कालीन डीसी आरएस वर्मा ने इसकी घोषणा भी कर दी। इसके साथ ही किसानों से उनके बैंक खातों की जानकारी मांग ली गई ताकि उनका राशि सीधे ट्रांसफर कर दी जाए। राजस्व विभाग ने फैसला किया कि कोरोना के चलते किसानों को यहां बुलाने के बजाय पटवारी गांव में जाएगा। वह, नंबरदार और सरपंच सभी प्रभावित किसानों से उनके बैंक खातों का ब्योरा ले लेंगे। लेकिन दो माह बाद भी यह प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो पाई है। किसान सभा के प्रधान प्रीत सिंह ने कहा कि फसलें बर्बाद हुए कई माह हो चुके हैं। फसलों से होने वाली आय पर ही उनका जीवन निर्भर है। इसलिए प्रशासन को जल्द से जल्द राशि जारी कर देनी चाहिए। जब सरकार से पैसे आ चुके हैं तो कागजी खानापूर्ति में इतना समय नहीं लगना चाहिए।
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लगभग सभी गांवों के प्रभावित किसानों के बैंक खातों का ब्योरा पटवारियों ने गांवों में जाकर एकत्र कर लिया था। कागजी खानापूर्ति अंतिम चरण में है। एक-दो दिन में एसडीएम कार्यालय की ओर से पैसे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए जाएंगे।
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-राजेश कुमार, तहसीलदार, रोहतक
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अक्तूबर, नवंबर 2019 में बारिश और जलभराव से फसलों को काफी नुकसान हुआ था। सरकार के आदेश के बाद जिला प्रशासन ने पांच गांवों भगवतीपुर, समर गोपालपुर, घड़ौदी, चांदी, बसाना में स्पेशल गिरदावरी करवाई थी। जिसकी रिपोर्ट में सामने आया था कि इन गांवों में 1497 एकड़ धान की फसल को नुकसान पहुंचा था। उसके बाद रबी सीजन के दौरान फरवरी, मार्च 2020 में फिर बारिश से फसलों को नुकसान हुआ। जिला प्रशासन ने सात गांवों कन्हेली, मायना, शिमली, करौंथा, बालंद, खेड़ी साध और पहरावर में स्पेशल गिरदावरी करवाई थी। जिसकी रिपोर्ट में सामने आया था कि इन गांवों की 524 एकड़ रकबे में लगी फसलें बारिश और ओलों से बर्बाद हो गईं। किसान सभा ने कई बार जिला प्रशासन को ज्ञापन देकर मुआवजा जारी करवाने की मांग की। लेकिन प्रशासन का यही कहना था कि सरकार को रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। वहां से राशि जारी होते ही किसानों को मुआवजा दे दिया जाएगा। आखिर किसान सभा ने कोरोना काल के दौरान मुआवजे की मांग को लेकर पहले कई दिन तक लघु सचिवालय के बाहर धरना दिया, फिर बड़ा प्रदर्शन किया। जिसके बाद पांच जुलाई को सरकार ने किसानों के मुआवजे की राशि जारी कर दी। तत्कालीन डीसी आरएस वर्मा ने इसकी घोषणा भी कर दी। इसके साथ ही किसानों से उनके बैंक खातों की जानकारी मांग ली गई ताकि उनका राशि सीधे ट्रांसफर कर दी जाए। राजस्व विभाग ने फैसला किया कि कोरोना के चलते किसानों को यहां बुलाने के बजाय पटवारी गांव में जाएगा। वह, नंबरदार और सरपंच सभी प्रभावित किसानों से उनके बैंक खातों का ब्योरा ले लेंगे। लेकिन दो माह बाद भी यह प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो पाई है। किसान सभा के प्रधान प्रीत सिंह ने कहा कि फसलें बर्बाद हुए कई माह हो चुके हैं। फसलों से होने वाली आय पर ही उनका जीवन निर्भर है। इसलिए प्रशासन को जल्द से जल्द राशि जारी कर देनी चाहिए। जब सरकार से पैसे आ चुके हैं तो कागजी खानापूर्ति में इतना समय नहीं लगना चाहिए।
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लगभग सभी गांवों के प्रभावित किसानों के बैंक खातों का ब्योरा पटवारियों ने गांवों में जाकर एकत्र कर लिया था। कागजी खानापूर्ति अंतिम चरण में है। एक-दो दिन में एसडीएम कार्यालय की ओर से पैसे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए जाएंगे।
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-राजेश कुमार, तहसीलदार, रोहतक