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विकास बढ़ाना और उत्पादकता जाल पर काबू पाने में उद्यमशीलता अहम : डॉ. सेन
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21सीटीके08...आईआईएम में डॉ. गौतम सैन का स्वागत करते प्रो. धीरज शर्मा। स्रोत : संस्थान
रोहतक। उद्योग में तेजी से हो रहे बदलावों व ऐतिहासिक चुनौतियों से पार पाने के लिए एकता और नई सोच की आवश्यकता है। भारत के पिछले आर्थिक इतिहास व औपनिवेशिक शासन और शोषण के हानिकारक प्रभाव पर विचार करना होगा। अच्छी नीतियां अपने आप में पर्याप्त नहीं हैं। उन्हें कार्यान्वयन क्षमता के साथ जोड़ा जाना चाहिए। यह कहना है लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक अर्थव्यवस्था में स्नातक कार्यक्रम के संस्थापक डॉ. गौतम सेन का। वे बुधवार को आईआईएम रोहतक में पीजीपी 15 बैच को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि नवाचार व विकास को आगे बढ़ाने और उत्पादकता जाल पर काबू पाने में उद्यमशीलता की भूमिका अहम है। उद्यमशीलता की भावना को प्रोत्साहित करने के साथ असमानता को नियंत्रित करने की आवश्यकता है। उन्होंने छात्रों को नेताओं के रूप में आगे बढ़ने, सकारात्मक बदलाव लाने और राष्ट्र के लिए एक जीवंत भविष्य को आकार देने की उनकी क्षमता पर विश्वास करने के लिए प्रोत्साहित किया।
आईआईएम निदेशक प्रो. धीरज शर्मा ने अतिथि का स्वागत करते हुए भविष्य के नेताओं को आकार देने में अकादमिक बातचीत के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने एक शिक्षाविद व सलाहकार के रूप में वक्ता की बुद्धिमत्ता के लिए उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि दुनिया जानकारी से भरी हुई है। हमें प्राप्त होने वाली हर जानकारी पर तब तक विश्वास करने की आवश्यकता नहीं है, जब तक कि हमारे द्वारा सत्यापित और पुन: सत्यापित न किया जाए।
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उन्होंने कहा कि नवाचार व विकास को आगे बढ़ाने और उत्पादकता जाल पर काबू पाने में उद्यमशीलता की भूमिका अहम है। उद्यमशीलता की भावना को प्रोत्साहित करने के साथ असमानता को नियंत्रित करने की आवश्यकता है। उन्होंने छात्रों को नेताओं के रूप में आगे बढ़ने, सकारात्मक बदलाव लाने और राष्ट्र के लिए एक जीवंत भविष्य को आकार देने की उनकी क्षमता पर विश्वास करने के लिए प्रोत्साहित किया।
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आईआईएम निदेशक प्रो. धीरज शर्मा ने अतिथि का स्वागत करते हुए भविष्य के नेताओं को आकार देने में अकादमिक बातचीत के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने एक शिक्षाविद व सलाहकार के रूप में वक्ता की बुद्धिमत्ता के लिए उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि दुनिया जानकारी से भरी हुई है। हमें प्राप्त होने वाली हर जानकारी पर तब तक विश्वास करने की आवश्यकता नहीं है, जब तक कि हमारे द्वारा सत्यापित और पुन: सत्यापित न किया जाए।
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