{"_id":"687176dbb484de72ba0a9345","slug":"employee-suspended-for-taking-bribe-of-rs-2000-in-the-name-of-getting-a-bed-in-pgi-rohtak-news-c-17-roh1020-688453-2025-07-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rohtak News: पीजीआई में बिस्तर दिलाने के नाम पर दो हजार रुपये रिश्वत लेने वाला कर्मी निलंबित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rohtak News: पीजीआई में बिस्तर दिलाने के नाम पर दो हजार रुपये रिश्वत लेने वाला कर्मी निलंबित
Sat, 12 Jul 2025 02:10 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Sat, 12 Jul 2025 02:10 AM IST
विज्ञापन
चार जुलाई को अमर उजाला में प्रकाशित खबर।
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। पीजीआई में मरीज को भर्ती कराने से पहले बिस्तर दिलाने के नाम पर दो हजार रुपये लेने वाले अनुबंधित कर्मचारी विशाल को निलंबित कर दिया गया है। आरोपी कर्मचारी को एचकेआरएन (हरियाणा कौशल रोजगार निगम) में भर्ती नहीं करने के भी आदेश भी दिए हैं। वहीं, दूसरी ओर अनुबंधित कर्मचारी को बचाने वाले किसी भी अधिकारी पर अब भी संस्थान ने कोई कार्रवाई नहीं की है।
मरीजों को भर्ती कराने से पहले बिस्तर दिलाने के मामले की पीजीआई प्रशासन ने जांच पूरी कर दी है। इसमें वह दो हजार रुपये रिश्वत लेने में दोषी मिला है। हालांकि, इस मामले में पीजीआई प्रशासन की करीब साढ़े तीन माह की देरी से कार्रवाई पर अब भी सवाल उठ रहे हैं।
यह था मामला
बताया गया है कि 25 मार्च को शंभू सैनी अपने भाई को गंभीर हालत में पीजीआई लाए थे। उन्हें यहां भर्ती कराने के लिए बिस्तर नहीं मिला था। बिस्तर दिलाने के नाम पर पीजीआई के अनुबंधित कर्मचारी विशाल ने दो हजार रुपये मांगे। भाई की गंभीर हालत को देखते हुए शंभू ने विशाल को दो हजार रुपये ऑनलाइन माध्यम से दे दिए।
विज्ञापन
इसके बाद कर्मचारी ने उसको बिस्तर दिला दिया। भाई के स्वस्थ होने के बाद 2 अप्रैल को पीजीआई प्रशासन से इसकी शिकायत की। प्रशासन की ओर की प्राथमिक जांच में विशाल पर रिश्वत लेने का आरोप सही पाया गया था। इसके बावजूद पीजीआई के स्वच्छता विभाग के डिप्टी मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. महेश महला ने माफीनामा लेकर उसे बारी कर दिया था।
-- -- -- -- -- --
क्या विशाल सिर्फ एक मोहरा है...
जांच में दोषी पाए जाने के बावजूद विशाल पर कार्रवाई नहीं करने से हर कोई हैरान था। सवाल उठ रहा था कि आखिर पीजीआई प्रशासन किसकी शह पर एक अनुबंधित कर्मचारी को बचा रहा है। सवाल यह भी था कि क्या विशाल सिर्फ एक मोहरा है, मरीजों की भर्ती में रिश्वतखोरी का खेल कोई और ही खेल रहा है।
बिस्तर दिलाने के नाम पर रुपये लेने वाले कर्मचारी को निलंबित कर दिया गया है। उसे एचकेआरएन में शामिल नहीं करने के भी आदेश दिए हैं। इस तरह कर्मचारी आगे भी ऐसा न करें, इसलिए यह कठोर कदम उठाना जरूरी था।
- डॉ. एसके सिंघल, निदेशक, पीजीआई।
विज्ञापन
रोहतक। पीजीआई में मरीज को भर्ती कराने से पहले बिस्तर दिलाने के नाम पर दो हजार रुपये लेने वाले अनुबंधित कर्मचारी विशाल को निलंबित कर दिया गया है। आरोपी कर्मचारी को एचकेआरएन (हरियाणा कौशल रोजगार निगम) में भर्ती नहीं करने के भी आदेश भी दिए हैं। वहीं, दूसरी ओर अनुबंधित कर्मचारी को बचाने वाले किसी भी अधिकारी पर अब भी संस्थान ने कोई कार्रवाई नहीं की है।
मरीजों को भर्ती कराने से पहले बिस्तर दिलाने के मामले की पीजीआई प्रशासन ने जांच पूरी कर दी है। इसमें वह दो हजार रुपये रिश्वत लेने में दोषी मिला है। हालांकि, इस मामले में पीजीआई प्रशासन की करीब साढ़े तीन माह की देरी से कार्रवाई पर अब भी सवाल उठ रहे हैं।
विज्ञापन
यह था मामला
बताया गया है कि 25 मार्च को शंभू सैनी अपने भाई को गंभीर हालत में पीजीआई लाए थे। उन्हें यहां भर्ती कराने के लिए बिस्तर नहीं मिला था। बिस्तर दिलाने के नाम पर पीजीआई के अनुबंधित कर्मचारी विशाल ने दो हजार रुपये मांगे। भाई की गंभीर हालत को देखते हुए शंभू ने विशाल को दो हजार रुपये ऑनलाइन माध्यम से दे दिए।
विज्ञापन
इसके बाद कर्मचारी ने उसको बिस्तर दिला दिया। भाई के स्वस्थ होने के बाद 2 अप्रैल को पीजीआई प्रशासन से इसकी शिकायत की। प्रशासन की ओर की प्राथमिक जांच में विशाल पर रिश्वत लेने का आरोप सही पाया गया था। इसके बावजूद पीजीआई के स्वच्छता विभाग के डिप्टी मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. महेश महला ने माफीनामा लेकर उसे बारी कर दिया था।
क्या विशाल सिर्फ एक मोहरा है...
जांच में दोषी पाए जाने के बावजूद विशाल पर कार्रवाई नहीं करने से हर कोई हैरान था। सवाल उठ रहा था कि आखिर पीजीआई प्रशासन किसकी शह पर एक अनुबंधित कर्मचारी को बचा रहा है। सवाल यह भी था कि क्या विशाल सिर्फ एक मोहरा है, मरीजों की भर्ती में रिश्वतखोरी का खेल कोई और ही खेल रहा है।
बिस्तर दिलाने के नाम पर रुपये लेने वाले कर्मचारी को निलंबित कर दिया गया है। उसे एचकेआरएन में शामिल नहीं करने के भी आदेश दिए हैं। इस तरह कर्मचारी आगे भी ऐसा न करें, इसलिए यह कठोर कदम उठाना जरूरी था।
- डॉ. एसके सिंघल, निदेशक, पीजीआई।

चार जुलाई को अमर उजाला में प्रकाशित खबर।